पिछले 18 महीनों से बाजार में जो टाइम करेक्शन चल रहा था, उसके बाद अब रिकवरी के संकेत दिख रहे हैं। HDFC Securities के MD और CEO धीरज रेली (Dhiraj Relli) का मानना है कि इस वित्त वर्ष में निफ्टी अपने ऑल-टाइम हाई 26,373.20 तक पहुंच सकता है।

पिछले 18 महीनों से बाजार में जो टाइम करेक्शन चल रहा था, उसके बाद अब रिकवरी के संकेत दिख रहे हैं। HDFC Securities के MD और CEO धीरज रेली (Dhiraj Relli) का मानना है कि इस वित्त वर्ष में निफ्टी अपने ऑल-टाइम हाई 26,373.20 तक पहुंच सकता है।
उन्होंने 'The Big Review' रिपोर्ट लॉन्च के दौरान कहा कि यह स्तर इसी साल देखने को मिल सकता है। उनका कहना है कि यह दूसरी, तीसरी या चौथी तिमाही में कभी भी आ सकता है। लेकिन, दिवाली के आसपास यह स्तर हासिल होने की उम्मीद है।
भारत के वैल्यूएशन पर क्या है राय
इवेंट में एनालिस्ट्स ने कहा कि भारत की मार्केट कहानी अभी भी वैल्यूएशन और अर्निंग ग्रोथ पर टिकी हुई है। कई लोग मानते हैं कि भारत दूसरे उभरते बाजारों के मुकाबले महंगा है, लेकिन HDFC Securities का कहना है कि यह प्रीमियम सही वजहों से है।
भारतीय बाजार में बेहतर रिटर्न ऑन इक्विटी (RoE), मजबूत प्राइवेट सेक्टर और सख्त रेगुलेटरी सिस्टम जैसे फैक्टर्स इसे बाकी बाजारों से अलग बनाते हैं और निवेशकों का भरोसा बढ़ाते हैं।
विदेशी निवेशकों की बढ़ रही दिलचस्पी
2023 में भारत का वैल्यूएशन प्रीमियम उभरते बाजारों के मुकाबले करीब 100% तक पहुंच गया था। अब यह घटकर करीब 33% रह गया है, जो इसके लंबे समय के औसत के करीब है।
इस गिरावट के बाद विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी फिर से बढ़ने लगी है और शुरुआती पूछताछ भी देखने को मिल रही है। हालांकि अभी पूरी तरह से पैसा वापस नहीं आया है।
भारतीय बाजार क्यों बना हुआ है दबाव
फिलहाल कुछ फैक्टर्स बाजार पर दबाव बनाए हुए हैं। डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी और कंपनियों की कमाई को लेकर अनिश्चितता निवेशकों को सतर्क बना रही है।
हालांकि, अगर कंपनियों की अर्निंग 10-12% की दर से बढ़ती है, तो वैल्यूएशन और आकर्षक हो सकता है। इससे निवेशकों की वापसी तेज हो सकती है।
बाजार के लिए आगे के ट्रिगर क्या हैं
आने वाले समय में बाजार की दिशा काफी हद तक जियोपॉलिटिकल हालात पर निर्भर करेगी। अगर वैश्विक तनाव कम होता है, तो बाजार में बड़ी गिरावट का खतरा भी कम होगा।
फिलहाल संकेत मिल रहे हैं कि हालात धीरे-धीरे बेहतर हो सकते हैं, जिससे बाजार एक नए टर्निंग पॉइंट की ओर बढ़ सकता है।
घरेलू निवेशक बनेंगे गेम चेंजर
रिकवरी में घरेलू निवेशकों की भूमिका अहम रहने वाली है। म्यूचुअल फंड्स के पास इस समय अच्छा-खासा कैश है और अब वे बड़े और मजबूत स्टॉक्स यानी लार्ज कैप की तरफ रुख कर रहे हैं।
जिन सेक्टर्स में वैल्यूएशन गिरा है, वहां खरीदारी भी शुरू हो चुकी है, भले ही उनकी कमाई पर ज्यादा असर नहीं पड़ा हो।
किन सेक्टर्स में दिख रहा मौका
मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और घरेलू साइक्लिकल सेक्टर्स में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है। इसके अलावा बैंकिंग, आईटी, इंडस्ट्रियल और रियल एस्टेट सेक्टर में अब जोखिम और रिटर्न का संतुलन बेहतर दिख रहा है।
निवेशक इन सेक्टर्स में धीरे-धीरे और हिस्सों में पैसा लगा रहे हैं, जिससे आगे ग्रोथ के मौके बन सकते हैं।
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