भारतीय शेयर बाजार पर दबाव कुछ कम हुआ है। एक्सिस कैपिटल के मैनेजिंग डायरेक्टर एंड हेड ऑफ इक्विटीज रमन जौहर का मानना है कि निफ्टी 50 के धीरे-धीरे ऊपर जाने की उम्मीद है। इसकी वजह कंपनियों की अर्निंग्स में इम्प्रूवमेंट है। हालांकि, फिलहाल निफ्टी में अचानक बड़ी तेजी की उम्मीद कम है।
कंपनियों की अर्निंग्स बढ़ने से शेयरों में आएगी तेजी
जौहर का कहना है कि निफ्टी 50 आगे सीमित दायरे में रह सकता है। इसे 24,000 लेवल पर अच्छा सपोर्ट है। हालांकि, विदेशी निवेशकों के निवेश और आईपीओ मार्केट में गतिविधियां बढ़ने का असर सूचकांक पर पड़ सकता है। कंपनियों की अर्निंग्स में इम्प्रूवमेंट काफी अहम है। बीते 2-3 सालों में पहली बार इनवेस्टर्स का भरोसा लार्जकैप स्टॉक्स पर बढ़ा है।
बाजार में छोटे-बड़े शेयरों में रिकवरी के संकेत
इनवेस्टर्स को लगता है कि लार्जकैप कंपनियों की ग्रोथ डबल डिजिट में रह सकती है। एक्सिस कैपिटल के कवरेज के तहत आने वाले करीब 75 फीसदी स्टॉक्स ने उम्मीद के मुताबिक या उम्मीद से ज्यादा रिटर्न दिए हैं। यह इस बात का संकेत है कि बाजार में छोटे-बड़े सभी तरह के शेयरों में रिकवरी आ रही है।
कंजम्प्शन कंपनियों में बीते दो सालों की सबसे अच्छी रेवेन्यू ग्रोथ
जौहर ने कहा कि घरेलू कंजम्प्शन सभी थीम में सबसे अहम थीम है। कंजम्प्शन कंपनियों में बीते दो सालों में सबसे ज्यादा रेवेन्यू ग्रोथ दिखी है। डिस्क्रेशनरी बिजनेसेज, पेंट्स, क्विक-सर्विस रेस्टॉरेंट्स, न्यू एज कंपनियों, होटल्स और रियल एस्टेट में भी स्ट्रॉन्ग डिमांड दिख रही है। अर्बन और प्रीमियम कंजम्पशन की ग्रोथ तेज बनी हुई है।
रियल एस्टेट सेक्टर का आउटलुक पॉजिटिव
उन्होंने रियल एस्टेट को लेकर भी पॉजिटिव नजरिया व्यक्ति किया। देश के सात बड़े शहरों में घरों की बिक्री साल दर साल आधार पर 11 फीसदी रही है। हालांकि, नए लॉन्चेज अब भी 17 फीसदी कम है। उनका मानना है कि नए लॉन्च में सुस्ती में आगे कमी आएगी। रियल एस्टेट में अच्छी डिमांड का असर सीमेंट सेक्टर पर भी पड़ेगा। खासकर मानसून सीजन के बात इसमें इम्प्रूवमेंट दिखेगा।
बीते दो महीनों में फॉरेन इनवेस्टर्स फ्लो में इम्प्रूवमेंट
फॉरेन इनवेस्टर फ्लो में भी इम्प्रूवमेंट है। लगातार दो महीने फ्लो पॉजिटिव रहा है। हालांकि, जौहर का मानना है कि इसका मतलब यह नहीं कि विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार में पूरी तरह से वापसी हो गई है। एक बड़ा फंड प्राइमरी मार्केट में भी जा रहा है। इससे सेकेंडरी मार्केट और प्राइमरी मार्केट के बीच प्रतिस्पर्धा की स्थिति बनी है।
फॉरेन इनवेस्टर्स का काफी पैसा आईपीओ में जा रहा
अगस्त में भारत में फॉरेन इनवेस्टर्स के कुल निवेश का करीब 40 फीसदी प्राइमरी मार्केट्स यानी आईपीओ में गया। जुलाई में यह 50 फीसदी था। इसका मतलब है कि अगर यह ट्रेंड जारी रहता है तो कंपनियों की अर्निंग्स बढ़ने के बावजूद निफ्टी में तेजी सीमित रहेगी। अभी फॉरेन इनवेस्टर्स ने भारत को एशिया में अपना सबसे पसंदीदा डेस्टिनेशन नहीं बनाया है।