Nifty Outlook: अमेरिका-ईरान में नहीं हुआ समझौता, जानिए अब 13 अप्रैल को कैसी रहेगी निफ्टी की चाल

Nifty Outlook: अमेरिका और ईरान के बीच नया समझौता नहीं हुआ। इसके चलते 13 अप्रैल को बाजार में उतार-चढ़ाव रहने की आशंका है। एक्सपर्ट्स से जानिए अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल।

अपडेटेड Apr 12, 2026 पर 4:22 PM
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सेंट्रम ब्रोकिंग के नीलेश जैन का कहना है कि बाजार का ओवरऑल स्ट्रक्चर अभी भी पॉजिटिव है।

Nifty Outlook: निफ्टी ने थोड़े ठहराव के बाद फिर से रफ्तार पकड़ ली और शुक्रवार को 275 अंकों की तेजी के साथ 24,000 का स्तर दोबारा पार कर लिया। मजबूत ग्लोबल संकेतों के चलते इंडेक्स 105 अंकों की बढ़त के साथ खुला और पूरे दिन बाजार में खरीदारी का माहौल बना रहा।

निफ्टी ने 24,000 के अहम स्तर के ऊपर मजबूती से क्लोजिंग दी। बाजार का माहौल पॉजिटिव रहा। इसमें कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और अमेरिका-ईरान के बीच संभावित समझौते की उम्मीद ने सपोर्ट दिया।

पूरे हफ्ते के लिहाज से निफ्टी ने लगातार छह हफ्तों की गिरावट को खत्म करते हुए 5.89 प्रतिशत की मजबूत तेजी दिखाई। यह 5 फरवरी 2021 के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त है।


इन शेयरों में सबसे ज्यादा हलचल

इंडेक्स में एशियन पेंट्स, आयशर मोटर्स और बजाज ऑटो जैसे शेयरों ने तेजी में सबसे बड़ा योगदान दिया। वहीं दूसरी तरफ कोल इंडिया, सन फार्मा और इंफोसिस जैसे शेयर गिरावट में रहे।

सेक्टोरल नजरिए से देखें तो आईटी को छोड़कर बाकी सभी सेक्टर हरे निशान में बंद हुए। खास तौर पर ऑटो, रियल्टी और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर ने बाजार की तेजी को आगे बढ़ाया।

बड़े शेयरों के साथ-साथ छोटे और मझोले शेयरों में भी अच्छी तेजी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 में 1.52 प्रतिशत और स्मॉलकैप 100 में 1.65 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई।

रुपये में उतार-चढ़ाव

भारतीय रुपया लगातार दूसरे दिन कमजोर रहा, लेकिन इसके बावजूद हफ्ते के आधार पर इसमें बढ़त देखने को मिली। आरबीआई की पोजिशन लिमिट डेडलाइन से पहले ट्रेडर्स अपनी पोजिशन कम कर रहे हैं, जिससे रुपये ने संतुलन बनाए रखा।

शुक्रवार को रुपये पर दबाव इसलिए आया क्योंकि वीकेंड पर होने वाली अमेरिका-ईरान वार्ता से पहले कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आ गया।

अमेरिका-ईरान बातचीत का असर

लंबी बातचीत के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच कोई समझौता नहीं हो सका। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ईरान ने उनकी शर्तें नहीं मानीं। अमेरिका चाहता था कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह सीमित करे और साफ भरोसा दे कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। ईरान इस पर पूरी तरह राजी नहीं हुआ।

दूसरी तरफ ईरान चाहता था कि उस पर लगे प्रतिबंध पहले हटाए जाएं। इसके अलावा क्षेत्रीय प्रभाव, तेल मार्गों पर पकड़ और आपसी भरोसे की कमी भी बीच में आ गई। यही वजह रही कि लंबी बातचीत के बाद भी कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया। इस खबर का असर शेयर बाजार के साथ कच्चे तेल और सोने-चांदी पर भी दिख सकता है।

निफ्टी पर एक्सपर्ट की राय

तकनीकी रूप से 24,025 के ऊपर ब्रेकआउट ने बाजार के शॉर्ट टर्म ट्रेंड को मजबूत किया है। HDFC सिक्योरिटीज के नंदीश शाह के मुताबिक, निफ्टी अब 24,200 के आसपास मौजूद 50-DEMA की तरफ बढ़ सकता है। अगला रेजिस्टेंस 24,571 के पास नजर आ रहा है। अगर बाजार में गिरावट आती है तो 23,700 का स्तर अहम सपोर्ट के तौर पर देखा जा रहा है।

सेंट्रम ब्रोकिंग के नीलेश जैन का कहना है कि बाजार का ओवरऑल स्ट्रक्चर अभी भी पॉजिटिव है। अगर शॉर्ट कवरिंग जारी रहती है तो निफ्टी 24,300 से 24,500 के दायरे तक जा सकता है। उनके मुताबिक 23,800 के आसपास तुरंत सपोर्ट है और वोलैटिलिटी में गिरावट बाजार को सपोर्ट कर सकती है।

एलकेपी सिक्योरिटीज के रूपक डे का कहना है कि शॉर्ट टर्म ट्रेंड अभी पॉजिटिव है, लेकिन वीकेंड पर कोई ठोस समझौता नहीं होने का बाजार में नकारात्मक असर भी देखने को मिल सकता है। उनके मुताबिक 23,800 सपोर्ट रहेगा। वहीं, 24,300 से 24,350 का दायरा निकट अवधि में रेजिस्टेंस का काम कर सकता है।

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