Nifty में 11 महीने की सबसे लंबी गिरावट से रिकवरी, खिसका रेजिस्टेंस, तो यहां है खतरा

Nifty Outlook: 11 महीने की सबसे लंबी गिरावट से उबरते हुए आज 20 अगस्त को निफ्टी में रौनक दिखी। हालांकि इस तेजी के साथ चिंता भी लौटी है कि यह तेजी कब तक बनी रहेगी। जानिए मार्केट में रिकवरी किस वजह से आई है और मार्केट की यह रौनक कब तक बनी रहेगी और निफ्टी के लिए अहम लेवल्स क्या हैं

अपडेटेड Aug 20, 2026 पर 2:24 PM
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Nifty Outlook: एक्सपर्ट्स के मुताबिक ग्लोबल यील्ड में नरमी और रिस्क लेने की बेहतर क्षमता से स्टॉक मार्केट रिकवरी को सपोर्ट मिलने की उम्मीद है लेकिन कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और जियोपॉलिटिकल रिस्क पर नजर रखने की जरूरत है।

Nifty Outlook: लगातार सात कारोबारी दिनों की गिरावट के बाद आज निफ्टी ग्रीन हुआ। वैश्विक बॉन्ड मार्केट में स्थिरता से एशियाई बाजारों में रौनक आई और भारतीय मार्केट को भी सपोर्ट मिला। आईटी और फाइनेंशियल स्टॉक्स के दम पर मार्केट में आज बहार छा गई। इसके चलते घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी 50 (Nifty 50) आधे-आधे फीसदी से अधिक उछल पड़े। इससे पहले सात कारोबारी दिनों में निफ्टी 2.1% नीचे आया था जोकि इसके लिए 11 महीने में सबसे लंबी गिरावट साबित हुई।

इस कारण लौटी मार्केट में रिकवरी

कच्चे तेल में उछाल और बॉन्ड यील्ड में उछाल ने मार्केट पर दबाव बनाया और सात कारोबारी दिनों में निफ्टी 2% से अधिक टूट गया था। बॉन्ड यील्ड में उछाल से रिस्क से भरे स्टॉक मार्केट का आकर्षण फीका पड़ा। हालांकि अब अमेरिकी ट्रेजरी ने लॉन्ग टर्म के बॉन्ड्स के बायबैक को डबल करने का ऐलान किया तो मार्केट को सपोर्ट मिला। अमेरिकी ट्रेजरी ने यह ऐलान ऐसे समय में किया, जब इस हफ्ते की शुरुआत में 30-साल की ट्रेजरी यील्ड 2007 के बाद के हाई लेवल पर पर पहुंच गई थी। एक्सपर्ट्स के मुताबिक ग्लोबल यील्ड में नरमी और रिस्क लेने की बेहतर क्षमता से स्टॉक मार्केट रिकवरी को सपोर्ट मिलने की उम्मीद है लेकिन कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और जियोपॉलिटिकल रिस्क पर नजर रखने की जरूरत है।


तो क्या अब बनी रहेगी मार्केट की रौनक?

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के प्राइम रिसर्च हेड देवर्ष वकील (Devarsh Vakil) का कहना है कि तेजी का यह रुझान तभी तक बना रहेगा जब तक अप्रैल, जून और जुलाई के स्विंग लो यानी निचले लेवल्स से होते हुए ऊपर की तरफ जाने वाली ट्रेंडलाइन बनी रहती है, और 24,000 के आसपास मजबूत सपोर्ट बना रहता है। देवर्ष के मुताबिक निफ्टी का रेजिस्टेंस लेवल अब घटकर 24,300 हो गया है और इस लेवल के ऊपर लगातार क्लोजिंग इसकी स्थिरता का पहला संकेत होगा और इससे आगे की तेजी का रास्ता खुलेगा।

एक्सिस डायरेक्ट के रिसर्च हेड राजेश पलविया का कहना है कि शॉर्ट-टर्म में पॉजिटिव माहौल तो है लेकिन जब तक निफ्टी 24,300 के नीचे है, सतर्क रहना होगा। राजेश के मुताबिक नीचे की तरफ अगर 24,000 का सपोर्ट लेवल टूटता है तो यह 23,800 की तरफ फिसल सकता है। वहीं ऊपर की तरफ अगर यह 24,300 के ऊपर लगातार ब्रेकआउट करता है तो फिर से 24,450 का लेवल हासिल कर लेगा। राजेश के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों में संभावित नरमी एक अहम कैटलिस्ट का काम कर सकती है।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट आनंद जेम्स का कहना है कि अगर यह 24,200-260 के ऊपर बना रहता है, तो पुलबैक 24,380-24,540 तक बढ़ सकता है। आनंद के मुताबिक शॉर्ट-टर्म स्ट्रक्चर पॉजिटिव तो हो गया है, लेकिन 24,060 पर नजर रखना ज़रूरी है क्योंकि अगर यह सपोर्ट लेवल नहीं टिकता है, तो गिरावट बढ़ सकती है और यह 23,575 तक फिसल सकता है।

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