टोयोटा (Toyota) को टक्कर देने के लिए होंडा (Honda) और निसान (Nissan) का विलय होने वाला था लेकिन अब यह प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया है। दोनों कंपनियों ने आज 13 फरवरी को ऐलान किया कि उने बोर्ड ने विलय की बातचीत के पक्ष में फैसला लिया है। हालांकि दोनों इलेक्ट्रिक गाड़ियों को लेकर अपनी साझेदारी को जारी रखेंगी। अगर दोनों कंपनियों के बीच विलय हो जाता तो उससे करीब 6 हजार करोड़ के वैल्यू वाली कंपनी बनती जोकि टोयोटा, फॉक्सवैगन (Volkswagen) और हुंडई (Hyundai) के बाद दुनिया की चौथी सबसे बड़ी गाड़ी कंपनी होती।
जापान की तीसरी सबसे बड़ी ऑटोमेकर निसान ने होंडा के साथ बातचीत से बाहर निकलने का इसलिए फैसला लिया, क्योंकि दोनों के बीच कई मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई। इसमें से एक तो यह था कि होंडा ने निसान को एक सहायक कंपनी बनाने का प्रस्ताव रखा था, जैसा कि न्यूज एजेंसी रायटर्स को सूत्रों ने पहले बताया था। पहले होंडा और निसान के साथ मित्सुबिशी मोटर्स ने ऐलान किया था कि वे इस साल के आखिरी तक मिल जाएंगे लेकिन बाद में सूत्रों ने बताया कि मित्सुबिसी इसके लिए तैयार नहीं थी। अब तीनों कंपनियों का कहना है कि वे इलेक्ट्र्कि वेईकल्स को लेकर रणनीतिक साझेदारी के फ्रेमवर्क के भीतर काम करेंगी।
क्या है Honda और Nissan की स्थिति
निसान और होंडा को चीन के अहम बाजार में चीन की इलेक्ट्रिक वेईकल कंपनियों जैसे कि BYD के तेज उभार ने परेशान किया। इसके अलावा एक और अहम बाजार अमेरिका में टैरिफ की आशंकाओं ने भी चिंताएं बढ़ाई हैं। इन सब दिक्कतों के चलते निसान ने पिछले साल नवंबर रीस्ट्रक्चरिंग का ऐलान किया था जिसके चहत 9 हजार की छंटनी और वैश्विक क्षमता में 20 फीसदी की कटौती की जाएगी लेकिन अभी तक यह सामने नहीं आया है कि इसका असर कहां होगा। सूत्रों ने दिसंबर में बताया था कि निसान को चीन में अपनी क्षमता और घटानी होगी, जहां वह Dongfeng Motor के साथ ज्वाइंट वेंचर के जरिए आठ फैक्ट्री चला रही है। उसने पहले कंपनी अपने चांगझू प्लांट में प्रोडक्शन बंद कर चुकी है।
दिसंबर में विलय के ऐलान से पहले निसान और होंडा दोनों अलग-अलग तकनीकी साझेदारी के लिए बातचीत कर रहे थे। अब चूंकि दोनों के रास्ते अलग हो गए हैं तो निसान नए सहयोगी तलाश रही है और सूत्रों के मुताबिक ताइवान के फॉक्सकॉन के साथ इसे लेकर बातचीत हो सकती है। फॉक्सकॉन के प्रमुख यंग लियू ने बुधवार को कहा भी कि वह निसान में हिस्सेदारी लेने पर विचार करेंगे लेकिन मुख्य उद्देश्य साझेदारी ही है।