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UPI पर फीस से ट्रेडर्स को लग सकता है बड़ा झटका! नितिन कामथ ने समझा दिया पूरा गणित

Nithin Kamath UPI MDR: 15 अक्टूबर 2026 से लागू हो रहे UPI MDR चार्जेस से शेयर ब्रोकिंग इंडस्ट्री में हड़कंप मच गया है।  डिस्काउंट ब्रोकर जेरोधा के संस्थापक नितिन कामथ ने एक बड़ी बात कही है।  उनका कहना है कि ग्राहक ट्रेडिंग अकाउंट में पैसा ट्रांसफर तो करते हैं, लेकिन ट्रेड करने की कोई गारंटी नहीं होती। ऐसे में बिना किसी कमाई के ब्रोकर्स को सिर्फ यूपीआई फीस के रूप में करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ेगा

Abhishek Guptaअपडेटेड Sep 16, 2026 पर 12:34 PM
UPI पर फीस से ट्रेडर्स को लग सकता है बड़ा झटका! नितिन कामथ ने समझा दिया पूरा गणित
बिना किसी कमाई के ब्रोकर्स को सिर्फ यूपीआई फीस के रूप में करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ेगा

UPI MDR Impact on Broking: 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर लागू होने जा रहे 0.40% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) ने जहां बैंकों की बल्ले-बल्ले कर दी है, वहीं देश के स्टॉक ब्रोकिंग कंपनियों की नींद उड़ा दी है।

देश के प्रमुख डिस्काउंट ब्रोकर जेरोधा के संस्थापक नितिन कामथ ने इस नए नियम पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि अगर ब्रोकिंग के लिए यूपीआई फीस की सीमा तय नहीं की गई, तो ब्रोकर्स को बिना किसी कमाई के करोड़ों रुपये का नुकसान होगा। इसका सीधा असर आम निवेशकों पर पड़ सकता है और फ्री इक्विटी डिलीवरी का दौर खत्म हो सकता है।

ई-कॉमर्स और ब्रोकिंग में अंतर: 'पैसा आया, लेकिन सौदा नहीं हुआ'

यूपीआई पर फीस लगाने का स्वागत करते हुए नितिन कामथ ने माना कि इससे मार्केट में गूगलपे और फोनपे के 95% एकाधिकार को चुनौती मिलेगी। लेकिन उन्होंने ब्रोकिंग बिजनेस के एक अनोखे पहलू की तरफ ध्यान दिलाया। उन्होंने बताया की, जब आप यूपीआई से पेमेंट करते हैं, तो कोई सामान खरीदते हैं जिससे कंपनी को कमाई होती है। वहीं जब कोई ग्राहक अपने ट्रेडिंग अकाउंट में यूपीआई से पैसा ट्रांसफर करता है, तो इसकी कोई गारंटी नहीं होती कि वह शेयर खरीदेगा या ट्रेड करेगा।

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