SAMPATH REDDY

SAMPATH REDDY
पिछले डेढ़ साल की बाजार की रैली में मजबूत लिक्विडिटी और वैल्यूएसन मल्टी प्लाइज में एक्सपैंशन का अहम योगदान रहा है लेकिन कंपनियों के अच्छे प्रदर्शन ने भी इसमें अपना योगदान दिया है। बाजार की हालिया गिरावट को लेकर डरने की जरूरत नहीं है। बाजार में बहुत बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं है। अब आगे बाजार को दूसरी तिमाही के अच्छे नतीजों से सपोर्ट मिलता दिखेगा।
कर्मचारियों के घर से काम करने के चलते लागत में आई गिरावट और कंपनियों के डिजिटल टेक्नोलॉजी पर खर्च बढ़ाने के चलते सॉफ्टवेयर सर्विस सेक्टर की आय में तेज बढ़त देखने को मिली है। टेक्नोलॉजी पर बढ़ते खर्च के चलते सॉफ्टवेयर कंपनियों को बड़ी-बड़ी डील मिलती दिख रही है। इसके चलते इस वित्त वर्ष के साथ ही अगले वित्त वर्ष में भी इन कंपनियों की कमाई में बढ़त आती दिखेगी।
सप्लाई को लेकर आई दिक्कतों की वजह से कमोडिटी की कीमतों में बढ़त हुई है। जिसके चलते स्टील, एल्यूमीनियम, सीमेंट और केमिकल सेक्टर में भी तेज रिकवरी आई है। स्टील औऱ एल्यूमीनियम कंपनियों के मजबूत कैश फ्लो से उनको अपनी बैलेंसीट डी-लीवरेज करने की सहूलियत मिल रही है।
इसके साथ ही भारत में कॉर्पोरेट प्रॉफिटेबिलिटी साइकल अपट्रेंड में नजर आ रहा है। पिछले कुछ महीनों में कोरोना की दूसरी वेव के हल्के पड़ने के साथ ही लॉक डाउन के प्रतिबंधों को हटाया जा रहा है। इकोनॉमी से जुड़े तमाम आंकड़े इस बात का संकेत दे रहे हैं कि देश में आर्थिक और कारोबारी गतिविधियां कोरोना पूर्व स्थिति में लौट रही हैं। इसके साथ देश में टीकाकरण की गति भी काफी तेज रही है।
इसके साथ ही देश में कोरोना टीकाकरण की गति भी काफी तेज रही है। इसे देखते हुए हममें यह विश्वास उत्पन्न हो रहा है कि कोरोना से इकोनॉमी को मिला झटका अब जल्द ही बीते दिनों की बात हो जाएगा। RBI का भी अनुमान है कि वित्त वर्ष 2022 में GDP ग्रोथ रिकवर होकर 9.5 फीसदी के आसपास रहेगी। इन सबको ध्यान में रखते हुए हमारा मानना है कि कंपनियों में प्रदर्शन में दिख रही मजबूती टिकाऊ साबित होगी।
पिछले आंकड़ों पर नजर डालें तो कई साल से कंपनियों की अर्निंग ग्रोथ GDP ग्रोथ के अनुरूप नहीं रही है। लेकिन पिछले कुछ समय से खराब असेट क्वालिटी के चलते दबाव में चल रहे बैंकिंग जैसे सेक्टर में फिर से जान आती दिख रही है। इनके मुनाफे में ग्रोथ के संकेत मिल रहे हैं। इसी तरह मेटल सेक्टर के आय और मुनाफे में जोरदार रिकवरी आ रही है। NCLT के फैसले के बाद मेटल सेक्टर में आए कंसोलिडेशन का असर अब देखने को मिल रहा है।
इसी तरह पिछले कुछ सालों से फार्मा सेक्टर भी US FDA के एक्शन और एक्सपोर्ट मार्केट में कीमत के दबाव के चलते बुरे दौर से गुजर रहा था। लेकिन अब ये सेक्टर भी इन दबावों से उबरता नजर आ रहा है। जिसको देखते हुए कहा जा सकता है कि भारत में अब एक बार फिर कॉर्पोरेट प्रॉफिटैबलिटी साइकिल (GDP के प्रतिशत के रूप में कंपनियों क मुनाफा) करीब एक दशक से ज्यादा के दबाव के बाद अप ट्रेंड में नजर आ रहा है।
हमारा मानना है कि आगे भी कंपनियों का प्रदर्शन मजबूत और टिकाऊ रहेगा। जिससे बाजार को सपोर्ट मिलेगा। बाजार में आने वाला कोई भी करेक्शन हायर वैल्यूएश के बावजूद भी बहुत ज्यादा गहरा नहीं होगा।
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