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अमेरिका में ब्याज दरों में नहीं हुआ बदलाव, एक्सपर्ट्स से जानिए भारतीय बाजारों पर क्या होगा इसका असर

फेडरल ओपन मार्केट कमिटी ने अपने बेंचमार्क फेडरल फंड्स रेट को 3.75-4 प्रतिशत की रेंज में ही बनाए रखा है। यह फैसला बाजार की उम्मीदों के अनुरूप है। इस फैसले को 10-2 के वोट से मंजूरी मिली। फेड गवर्नर लिसा कुक और क्लीवलैंड फेड की अध्यक्ष बेथ हैमैक दरों में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी के पक्ष में थीं

Edited By: Sudhanshu Dubeyअपडेटेड Oct 29, 2026 पर 12:07 PM
अमेरिका में ब्याज दरों में नहीं हुआ बदलाव, एक्सपर्ट्स से जानिए भारतीय बाजारों पर क्या होगा इसका असर
भारतीय इक्विटी मार्केट के लिए इसके नतीजे काफी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। अमेरिकी ब्याज दरों में और बढ़ोतरी होने से अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर ऊंचे स्तर पर बने रह सकते

अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने बुधवार, 28 अक्टूबर को ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया। सितंबर में दरों में 0.25 प्रतिशत (quarter-percentage-point) की बढ़ोतरी के बाद,पॉलिसी मेकर्स ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मजबूती के संकेतों और लगातार बनी हुई महंगाई के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। यूएस फेड के दो अधिकारियों ने इस फैसले का विरोध किया और वे दरों में एक और बढ़ोतरी के पक्ष में थे।

फेडरल ओपन मार्केट कमिटी (FOMC) ने अपने बेंचमार्क फेडरल फंड्स रेट को 3.75-4 प्रतिशत की रेंज में ही बनाए रखा है। यह फैसला बाजार की उम्मीदों के अनुरूप है। इस फैसले को 10-2 के वोट से मंजूरी मिली। फेड गवर्नर लिसा कुक और क्लीवलैंड फेड की अध्यक्ष बेथ हैमैक दरों में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी के पक्ष में थीं।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के वी के विजयकुमार की राय

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के वी के विजयकुमार का कहना है कि फेड द्वारा उम्मीद के मुताबिक दरों को बरकरार रखना ग्लोबल इक्विटी मार्केट के लिए थोड़ा पॉजिटिव है। हालांकि, भारत के नजरिए से देखें तो चुनौतियां अभी भी काफी मजबूत बनी हुई हैं। 10-ईयर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 5% के आसपास बनी हुई है और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के कोई संकेत नहीं हैं। ऐसी खबरें हैं कि चिप की कमी की समस्या 2030 तक बनी रहेगी, जिससे दक्षिण कोरिया और ताइवान में चिप स्टॉक्स और AI ट्रेड में फिर से तेजी बढ़ गई है। इसका मतलब यह है कि विदेशी निवेशक भारत को नजरअंदाज करते हुए AI और AI से जुड़े स्टॉक्स में पैसा लगाना जारी रखेंगे।

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