एनएसई और बीएसई ने आज से 500 करोड़ रुपये से कम की मार्केट कैप वाली कंपनियों पर बढ़ाई निगरानी

एक्सचेंजों की तरफ से कहा गया है कि इस फ्रेम वर्क के तहत आने वाली सिक्यूरिटीज (अगर स्क्रिप पहले से ही 2 फीसदी प्राइस बैंड में है) में ट्रेड सेटलमेंट 5 फीसदी या 2 फीसदी प्राइस बैंड के साथ ट्रेड फॉर ट्रेड मैकेनिज्म के जरिए होगा। स्टेज टू की सिक्यूरिटीज के लिए ट्रेड सेटलमेंट 2 फीसदी प्राइस बैंड के साथ ट्रेड फॉर ट्रेड मैकेनिज्म के जरिए होगा। पीरियोडिक कॉल ऑक्शन के साथ सप्ताह में एक बार इन प्रतिभूतियों के ट्रेडिंग की अनुमति दी जाएगी

अपडेटेड Jun 05, 2023 पर 11:32 AM
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एक्सचेंजों की ओर से कहा गया है कि पब्लिक सेक्टर की कंपनियों, पब्लिक सेक्टर के बैंकों और ऐसे शेयरों जो डेरीवेटिव सेगमेंट में हैं, उनको ESM ढांचे के तहत शॉर्टलिस्टिंग की प्रक्रिया से बाहर रखा जाएगा

स्मॉल-कैप शेयरो में होने वाले भारी उतार-चढ़ाव पर अंकुश लगाने के लिए देश प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज बीएसई और एनएसई ने 500 करोड़ रुपये से कम मार्केट कैप वाली कंपनियों निगरानी बढ़ाने का फैसला किया है। यह इनहेंस्ड सर्विलांस मेजर (ESM) 5 जून यानी आज से लागू हो गई है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) और बीएसई ने शुक्रवार को जारी दो अलग-अलग सर्कुलर में कहा कि सेबी और एक्सचेंजों ने एक संयुक्त बैठक में "माइक्रो-स्मॉल" कंपनियों (मेन बोर्ड पर 500 करोड़ रुपये से कम मार्केट कैप वाली) के लिए ईएसएम ढांचा (उन्नत निगरानी तंत्र) लागू करने का फैसला लिया है।

जानिए किन स्क्रिप्स को किया जाएगा शामिल

इस निगरानी व्यवस्था में उन शेयरों के रखा जाएगा जिनके हाई प्राइस और लो प्राइस (high-low price variation) में और एक क्लोजिंग से दूसरी क्लोजिंग (close-to-close price variation) में अस्वाभाविक या बहुत ज्यादा अंतर होगा।


एक्सचेंजों की तरफ से कहा गया है कि इस फ्रेम वर्क के तहत आने वाली सिक्यूरिटीज (अगर स्क्रिप पहले से ही 2 फीसदी प्राइस बैंड में है) में ट्रेड सेटलमेंट 5 फीसदी या 2 फीसदी प्राइस बैंड के साथ ट्रेड फॉर ट्रेड मैकेनिज्म के साथ होगा। स्टेज टू की सिक्यूरिटीज के लिए ट्रेड सेटलमेंट 2 फीसदी प्राइस बैंड के साथ ट्रेड फॉर ट्रेड मैकेनिज्म के जरिए होगा। पीरियोडिक कॉल ऑक्शन के साथ सप्ताह में एक बार इन प्रतिभूतियों के ट्रेडिंग की अनुमति दी जाएगी।

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इन कंपनियों को इस निगरानी तंत्र से रखा जाएगा बाहर

एक्सचेंजों की ओर से कहा गया है कि पब्लिक सेक्टर की कंपनियों, पब्लिक सेक्टर के बैंकों और ऐसे शेयरों जो डेरीवेटिव सेगमेंट में हैं, उनको ESM ढांचे के तहत शॉर्टलिस्टिंग की प्रक्रिया से बाहर रखा जाएगा।

फ्रेमवर्क के शॉर्ट लिस्ट किए गए शेयरों को कम से कम तीन महीने तक इस निगरानी व्यवस्था में रखा जाएगा। हालांकि इस फ्रेमवर्क के स्टेज II के तहत आने वाली सिक्यूरिटीज को कम से कम 1 महीने के लिए इस निगरानी के तहत रखा जाएगा। एक्सचेंजो का कहना है कि किसी सिक्यूरिटी के इस फ्रेम वर्क में आने के एक महीने बाद साप्ताहिक समीक्षा की जाएगी। अगर इस समीक्षा में शामिल सिक्यूरिटी की क्लोजिंग टू क्लोजिंग प्राइस का अंतर समीक्षाधीन महीने में 8 फीसदी से कम रहता है तो उक्त सिक्यूरिटी को ESM फ्रेमवर्क के स्टेज वन में डाला जा सकता है। इस निगरानी में तीन महीने पूरे करने वाली सिक्यूरिटीज को सबकुछ सही पाए जाने पर चरणगत तरीके से इस निगरानी तंत्र बाहर किया जाएगा।

 

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