शुक्रवार को NSE co-location घोटाले के मामले में सीबीआई एनएसई के 2 अधिकारियों से पूछताछ की। यह जांच NSE co-एनएसई को-लोकेशन घोटाले (location scam) के मामले में की जा रही है। बता दें कि एनएसई के पूर्व जीओओ आनंद सुब्रमण्यन सीबीआई की कस्टडी में है। सीबीआई ने एनएसई के दोनों अधिकारियों के स्टेटमेंट की जांच कस्टडी के दौरान लिए गए आनंद सुब्रमण्यन के स्टेटमेंट (बयान) के साथ मिलान करके की।
सीबीआई के सूत्रों के हवाले से सीएनबीसी टीवी 18 को मिली जानकारी के मुताबिक सीबीआई सक्रियता के साथ इस आरोप की जांच कर रही है कि सेबी अधिकारियों ने जान-बूझकर दोषियों के खिलाफ एक्शन क्यों नहीं लिया।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सीबीआई की जांच से यह बात निकलकर आई है कि इस मामले में सेबी की तरफ से सीबीआई को ऑडिट डाक्युमेंट और दूसरे ईमेल शेयर करने में देरी हुई है। इस केस का 2018 में ऑडिट हुआ था जबकि 2018 में ही एफआईआर भी की गई थी लेकिन सेबी ने मामले से संबंधित रिपोर्ट और मुख्य आरोपियों के बीच हुए ईमेल की कॉपी सीबीआई को 2019 में दी ।
गौरतलब है कि पिछले हफ्ते सीबीआई ने एनएसई के पूर्व जीओओ आनंद सुब्रमण्यन को अरेस्ट किया था। इनको बिना जरुरी योग्यता और अनुभव के चित्रा रामकृष्नन ने एनएसई का जीओओ बना दिया था। आरोप है कि चित्रा रामकृष्नन ने ऐसा किसी कथित हिमालयन योगी के निर्देश पर किया था जिनसे वह अपने कामकाज में निर्देश लिया करती थी और उसको एनएसई से जुड़ी गोपनीय जानकारी भी देती थीं।
सीबीआई सूत्रों के मुताबिक बाद में यह बात सामने आई है कि आनंद सुब्रमण्यन ही वह कथाकथित योगी थे और वो चित्रा रामकृष्नन को एनएसई के कामकाजों में निर्देश देने के साथ ही आनंद सुब्रमण्य को प्रमोटर करने के निर्देश देने के जिम्मेदार थे।
सीबीआई ने हाल ही में आनंद सुब्रमण्यन को चेन्नई से गिरफ्तार किया है और उनको पिछले हफ्ते दिल्ली लेकर आया है। सीबीआई के पास 6 मार्च तक के लिए उनकी कस्टडी है।