अब स्टॉक्स की तरह खरीद-बेच सकेंगे सोना, NSE पर शुरू हुई EGR ट्रेडिंग; निवेश से पहले जान लें 5 बड़ी बातें

अब NSE पर EGR के जरिए स्टॉक्स की तरह सोने की खरीद-बिक्री हो सकेगी। निवेशकों को डिजिटल गोल्ड में सीधा मालिकाना हक, फिजिकल डिलीवरी और पारदर्शी प्राइसिंग मिलेगी। जानिए EGR क्या है, Gold ETF से कितना अलग है और इसमें निवेश से पहले किन बातों को समझना जरूरी है।

अपडेटेड May 18, 2026 पर 10:38 PM
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EGR को डीमैट अकाउंट में शेयरों की तरह रखा जाएगा और इसमें सेटलमेंट गारंटी भी मिलेगी।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE ने 18 मई से इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट यानी EGR सेगमेंट में लाइव ट्रेडिंग शुरू कर दी है। एक्सचेंज ने बताया कि 16 मई को मॉक ट्रेडिंग सेशन बिना किसी तकनीकी गड़बड़ी के सफल रहा था। इसके बाद अब लाइव ट्रेडिंग भी आसानी से शुरू हो गई है। NSE के मुताबिक सभी सिस्टम सही तरीके से काम कर रहे हैं।

क्या है EGR?

EGR सोने में निवेश और ट्रेडिंग का डिजिटल तरीका है। इसके जरिए निवेशक स्टॉक एक्सचेंज पर गोल्ड खरीद और बेच सकते हैं। EGR में 99.9 फीसदी शुद्धता यानी 999 और 99.5 फीसदी शुद्धता यानी 995 वाले गोल्ड की सुविधा मिलेगी।


इस सिस्टम में गोल्ड फंजिबल होता है, यानी निवेशकों को क्वालिटी के अंतर की चिंता नहीं करनी पड़ती। साथ ही अलग-अलग डिनोमिनेशन में ट्रेडिंग की सुविधा होने से छोटे और बड़े दोनों तरह के निवेशकों के लिए यह आसान विकल्प माना जा रहा है।

Gold ETF से कैसे अलग है EGR?

EGR और Gold ETF में सबसे बड़ा फर्क मालिकाना हक और फिजिकल डिलीवरी का है। EGR में निवेशक के पास वॉल्ट में रखे असली गोल्ड का सीधा मालिकाना हक होता है। जरूरत पड़ने पर निवेशक अपने डिजिटल होल्डिंग को फिजिकल गोल्ड बार में भी बदल सकता है।

वहीं Gold ETF सिर्फ गोल्ड की कीमत को ट्रैक करने वाला म्यूचुअल फंड यूनिट होता है। इसमें निवेशक को असली सोने की डिलीवरी नहीं मिलती।

SEBI करेगा रेगुलेट

EGR को SEBI रेगुलेट करेगा और इसकी ट्रेडिंग NSE प्लेटफॉर्म पर होगी। इसे Securities Contracts Regulation Act, 1956 के तहत सिक्योरिटी का दर्जा दिया गया है।

इस पूरे सिस्टम में एक्सचेंज, क्लियरिंग कॉरपोरेशन, डिपॉजिटरी और वॉल्ट मैनेजर मिलकर काम करेंगे। NSE ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म देगा। NCL खरीदार और विक्रेता के बीच EGR और पैसे का सेटलमेंट करेगा। वहीं डिपॉजिटरी EGR को डिमैट फॉर्म में रखेगी और वॉल्ट मैनेजर फिजिकल गोल्ड की स्टोरेज, डिपॉजिट और निकासी संभालेंगे।

ट्रेडिंग टाइम और सेटलमेंट

EGR को डीमैट अकाउंट में शेयरों की तरह रखा जाएगा और इसमें सेटलमेंट गारंटी भी मिलेगी। ट्रेडिंग सोमवार से शुक्रवार सुबह 9 बजे से रात 11:30 बजे या 11:55 बजे तक होगी। समय अमेरिकी डेलाइट सेविंग के हिसाब से थोड़ा बदल सकता है।

इसका सेटलमेंट T+1 आधार पर होगा। यानी ट्रेड के अगले कारोबारी दिन सेटलमेंट पूरा हो जाएगा। इसमें रिटेल निवेशकों के अलावा ज्वैलर्स, बुलियन ट्रेडर्स और रिफाइनरीज भी हिस्सा ले सकेंगी।

‘वन नेशन, वन प्राइस’ सिस्टम पर जोर

NSE का कहना है कि EGR देशभर में गोल्ड के लिए ‘वन नेशन, वन प्राइस’ सिस्टम बनाने में मदद करेगा। एक्सचेंज बेस्ड ट्रेडिंग से कीमतों में पारदर्शिता बढ़ेगी और अलग-अलग राज्यों में सोने की कीमतों का अंतर कम होगा।

इससे बाजार में लिक्विडिटी बेहतर होगी और मंजूरशुदा वॉल्ट्स में रखे गोल्ड की क्वालिटी भी सुनिश्चित की जा सकेगी। कीमतें खरीदार और विक्रेता की बोली के आधार पर तय होंगी, ठीक वैसे ही जैसे शेयर बाजार में होती हैं।

कई शहरों में शुरू हुए सेंटर

अहमदाबाद और मुंबई में वॉल्टिंग और कलेक्शन सेंटर पहले से चालू थे। अब 18 मई से दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और बेंगलुरु में भी ये सेंटर शुरू कर दिए गए हैं।

NSE ने कहा है कि आने वाले समय में चरणबद्ध तरीके से और सेंटर जोड़े जाएंगे। एक्सचेंज की योजना देशभर में करीब 120 सेंटर का नेटवर्क तैयार करने की है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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