IPO का अभी कुछ क्लियर नहीं, लेकिन NSE के शेयरों पर टूट पड़े हैं निवेशक, इस कारण दिख रहा क्रेज

NSE Share Price: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के शेयर अभी मार्केट में लिस्ट नहीं हैं लेकिन अनलिस्टेड मार्केट में इसका क्रेज शानदार दिख रहा है। मार्च में इसके करीब 71 लाख शेयरों का लेन-देन हुआ। जनवरी 2021 से इसमे शेयर ट्रांसफर डेटा पब्लिश करना शुरू किया था और यह किसी एक महीने में दूसरा सबसे हाई वॉल्यूम रहा। पिछले महीने इसके शेयर 2947 रुपये प्रति शेयर के औसत भाव से लेन-देन हुआ

अपडेटेड Apr 25, 2023 पर 10:35 AM
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NSE के शेयरों में यह दमदार दिलचस्पी इसके आईपीओ को लेकर अभी तक कोई स्पष्टता नहीं होने के बावजूद दिख रहा है। हालांकि इसे लेकर आश्चर्य नहीं करना चाहिए क्योंकि देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है और इक्विटी सेगमेंट में इसकी 93 फीसदी हिस्सेदारी है।

NSE Share Price: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के शेयर अभी मार्केट में लिस्ट नहीं हैं लेकिन अनलिस्टेड मार्केट में इसका क्रेज शानदार दिख रहा है। मार्च में इसके करीब 71 लाख शेयरों का लेन-देन हुआ। जनवरी 2021 से इसमे शेयर ट्रांसफर डेटा पब्लिश करना शुरू किया था और यह किसी एक महीने में दूसरा सबसे हाई वॉल्यूम रहा। पिछले महीने इसके शेयर 2947 रुपये प्रति शेयर के औसत भाव से लेन-देन हुआ जो फरवरी में 2980 रुपये के औसत भाव से थोड़ा ही कम है लेकिन मार्च 2022 की तुलना में यह 22 फीसदी ऊंचा भाव रहा। पिछले महीने इसके शेयरों का भाव न्यूनतम 2800 रुपये और अधिकतम 3300 रुपये रहा।

टर्नओवर वैल्यू में NSE से सिर्फ Adani Enterprises आगे

मार्च में एनएसई के शेयरों का टर्नओवर 2113 करोड़ रुपये रहा। टर्नओवर वैल्यू के हिसाब से एनएसई से आगे सिर्फ अदाणी एंटरप्राइजेज (Adani Enterprises) रही। अदाणी एंटरप्राइजेज के शेयरों की ट्रेडिंग का टर्नओवर वैल्यू पिछले महीने करीब 8400 करोड़ रुपये रहा। दिसंबर 2022 के बाद से वैल्यू के हिसाब से एनएसई एक्टिवली ट्रेड होने वाले टॉप-5 स्टॉक्स में शुमार है।


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एनएसई के शेयरों की डील करने वाले ब्रोकर्स के मुताबिक चूंकि इसके शेयर लिस्ट नहीं हैं तो इसके शेयर मिलने में चार से पांच महीने का समय लग जाता है और कभी-कभी इससे भी ज्यादा। ब्रोकर्स के मुताबिक जब कोई डील होती है तो इस डील के होने और बोर्ड से मंजूरी के मिलने के बाद जब शेयर ट्रांसफर होते हैं तो इसमें चार-पांच महीने या इससे भी ज्यादा का वक्त लग जाता है।

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आखिर क्यों दिख रही एनएसई के शेयरों में दिलचस्पी

एनएसई के शेयरों में यह दमदार दिलचस्पी इसके आईपीओ को लेकर अभी तक कोई स्पष्टता नहीं होने के बावजूद दिख रहा है। हालांकि इसे लेकर आश्चर्य नहीं करना चाहिए क्योंकि देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है और इक्विटी सेगमेंट में इसकी 93 फीसदी हिस्सेदारी है। इसके अलावा करेंसी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में भी इसकी मौजूदगी दमदार है। फ्यूचर्स इंडस्ट्री एसोसिएशन के आंकड़ों के हिसाब से इसका ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन 70 फीसदी के नजदीक है और यह दुनिया का टॉप डेरिवेटिव्स प्लेटफॉर्म है।

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एनएसई में पैसे लगाने वाले निवेशकों की संख्या पांच साल में बेतहाशा बढ़ी है। वित्त वर्ष 2021 के आखिरी में करीब 650 लोगों के पास ही इसके शेयर हैं और अब यह आंकड़ा 4300 के पार पहुंच गया है। इसमें डीमार्ट फाउंडर राधाकिशन दमानी जैसे दिग्गजों ने भी पैसे लगाए हुए हैं। मार्च में FPIs (विदेशी संस्थागत निवेशकों) ने मार्च में इसके 13.6 लाख शेयरों की नेट खरीदारी की औऱ घरेलू निवेशकों ने 29 लाख शेयरों की नेट खरीदारी। हालांकि एनआरआई निवेशकों ने 42 लाख शेयरों की नेट बिक्री की।

एनएसई के वित्तीय सेहत की बात करें तो अप्रैल-दिसंबर 2022 में इसका कंसालिडेटेड रेवेन्यू 50 फीसदी बढ़कर 8,320 करोड़ रुपये और कंसालिडेटेड नेट प्रॉफिट 55 फीसदी उछलकर 4,590 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इसका ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन 73% रहा।

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