Nykaa’s bonus issue: नायका के बोनस इश्यू से कंपनी में कॉर्पोरेट गवर्नेंस (Corporate Governance) सवालों के घेरे में आ गया है। कंपनी ने हाल में 5:1 के अनुपात में बोनस इश्यू (Nykaa bonus issue) का ऐलान किया है। कॉर्पोरेट फ्रॉड इनवेस्टिगेशन एक्सपर्ट विद्या राजाराव का दावा है कि यह बोनस इश्यू रिटेल इनवेस्टर्स के साथ धोखा है। उन्होंने उन लोगों पर सवाल उठाए हैं, जो रिटेल इनवेस्टर्स के हितों की सुरक्षा करने में नाकाम रहे। उनका यह भी कहना है कि यह एक बड़ी समस्या का संकेत है।
उन्होंने कहा कि बोनस इश्यू के ऐलान का मकसद और टाइमिंग दोनों को लेकर सवाल पैदा होते हैं। आईपीओ के बाद से कंपनी के बिजनेस में किसी तरह के इम्प्रूवमेंट बगैर बोनस इश्यू का ऐलान कर दिया गया। इसका मकसद सिर्फ कंपनी के शेयरों में संभावित गिरावट को रोकना था। प्री-आईपीओ इनवेस्टमेंट वाले इनवेस्टर्स के लिए लॉक-इन पीरियड 10 नवंबर को खत्म हो गया। माना जा रहा था कि इसके बाद इनवेस्टर्स कंपनी के शेयरों में बिकवाली करेंगे, जिससे इसकी कीमतें काफी नीचे आ सकती हैं। जोमैटो के मामले में ऐसा देखा गया था।
लॉक-इन पीरियड खत्म होने के बाद पीई फंडों, हाई नेटवर्थ इंडीविजुअल्स और दूसरे इनवेस्टर्स ने जोमैटो के शेयर बेचने शुरू कर दिए थे, जिससे इसकी कीमतों में तेज गिरावट आई थी। नायका के प्रमोटरों ने कंपनी के शेयरों में संभावित गिरावट को रोकने के लिए बोनस शेयर इश्यू का दांव चला।
इस तरह के कदमों (बोनस शेयर इश्यू) के बारे में मार्केट रेगुलेटर के रुख के बारे में पूछने पर राजाराव ने कहा कि SEBI इस तरह के मामलों की अनदेखी करता है। वह सूचीबद्ध कंपनियों में कार्पोरेट गवर्नेंस के पालन पर उस तरह से नजर नहीं रख पाया है, जैसा उसे रखना चाहिए। सेबी के डायरेक्टर्स रिटेल इनवेस्टर्स के हितों की सुरक्षा करने को लेकर बड़े-बड़े दावे करते हैं लेकिन उन्होंने जोमैटो के मामले में कुछ नहीं किया। अगर सेबी या एक्सचेंजो की अथाॉरिटी ने जोमैटो के को-फाउंडर की Spouse(पति/पत्नी) को ब्लिंकट को खरीदने से रोक दिया होता तो नायका में कॉर्पोरेट गवर्नेंस के इस अनैतिक प्रैक्टिसेज को रोका जा सकता था।
राजाराव ने कहा कि नायका के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स खासकर इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स को इस इश्यू को लेकर चेतावनी देनी चाहिए थी। उनकी लापरवाही चौंकाने वाली है, क्योंकि इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स को कॉर्पोरेट सेक्टर का कई सालों का अनुभव होता है। वे कई सूचीबद्ध कंपनियों के बोर्ड में डायरेक्टर होते हैं। इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स को बोनस शेयर इश्यू के असली मकसद को लेकर आवाज उठानी चाहिए थी।
उन्होंने कहा कि मैं भी दो लिस्टेड कंपनियों के बोर्ड में इंडिपेंडेंट डायरेक्टर हूं। ऑपरेशनल इश्यू जैसे प्रोडक्ट की कीमतें तय करना या किसी खास सप्लायर को कॉन्ट्रैक्ट देना ऐसे मसले हैं, जिन पर इंडिपेंडेंट डायरेक्टर अपनी आंखें बंद कर सकता है। लेकिन, पूंजी जुटाने जैसे मामले को एप्रूवल के लिए बोर्ड में पेश करना जरूरी है। फिर, बोर्ड यह नहीं कह सकता कि यह ऑपरेशनल इश्यू है। नायका के बोर्ड को पूरी स्कीम की जानकारी दी जानी चाहिए थी। उन्हें इसकी तारीख के बारे में भी बताया जाना चाहिए था।