स्टॉक्स जैसे रिस्की एसेट की कीमतें चढ़ती-उतरती रहती हैं। इसकी बड़ी वजह सेंटीमेंट और निवेशकों का व्यवहार होता है। ओकट्री कैपिटल के होवार्ड मार्क्स ने अपनी नई रिपोर्ट में यह कहा है। उन्होंने अगस्त की शुरुआत में दुनियाभर के स्टॉक मार्केट्स में आई गिरावट के बारे में भी बताया है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट रेट में कमी के संकेत देने के बाद जुलाई के आखिर में मार्केट में तेजी थी। अमेरिकी इकोनॉमी के डेटा से अच्छी ग्रोथ के भी संकेत मिले थे। लेकिन, जापान से आने वाली खबरों ने मार्केट का मूड खराब कर दिया।
इन वजहों से अचानक बिगड़ा बाजार का मूड
बैंक ऑफ जापान (Bank of Japan) ने इंटरेस्ट रेट बढ़ाने का ऐलान कर दिया। इसके बाद येन कैरी ट्रेड (Yen Carry Trade) की अनवाइडिंग शुरू हो गई। फिर निवेशकों ने अपनी पॉजिशन घटाने के लिए एसेट्स बेचने शुरू कर दिए। फिर, अगस्त की शुरुआत में आए अमेरिकी इकोनॉमी के डेटा ने बाजार में डर का माहौल बना दिया। इससे दुनियाभर के मार्केट में तेज गिरावट आई। अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग पर्चेजिंग मैनेजर्स इडेक्स में गिरावट और बेरोजगारी बढ़ने के आकड़ों को अमेरिकी इकोनॉमी में मंदी का संकेत माना गया। दिग्गज निवेशक वॉरेन बफे (Warren Buffett) ने Apple में निवेश घटा दिया। इससे सेंटीमेंट और कमजोर हो गया।
मूड में बदलाव का सीधा असर मार्केट के सेंटीमेंट पर पड़ता है
होवार्ड मार्क्स ने निराशा से उम्मीद के बीच के इस पीरियड के बारे में बताया है। उनका कहना है कि इनवेस्टर्स के मूड में बदलाव का असर बाजार से जुड़ी धारणा पर पड़ता है। उन्होंने कहा, "असल दुनिया में चीजें बहुत अच्छी और कम अच्छी के बीच रहती हैं, लेकिन निवेश की दुनिया में धारणा अक्सकर उम्मीद से निराशा में बदल जाती है।" इसका असर निवेशकों के सेंटिमेंट पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि जब अगस्त की शुरुआत में कीमतें गिरीं तो इसकी वजह स्थिति में किसी तरह की गिरावट नहीं थी बल्कि मार्केट को लेकर निवेशकों की धारणा निगेटिव हो गई थी।
यह भी पढ़ें: Nifty 50 से इन शेयरों की होगी विदाई, तो इनकी होगी एंट्री, ऐसे हुआ कैलकुलेशन
मूड के हिसाब से चीजों के मतलब निकाले जाते हैं
उन्होंने कहा कि जब समय अच्छा होता है तो निवेशक सिर्फ पॉजिटिव चीजों को देखते हैं। वे निगेटिव चीजों को भूल जाते हैं। वह हर चीज का पॉजिटिव मतलब निकालते हैं। लेकिन, जब चीजें बदलती हैं तो वे इसके उलट व्यहवार करने लगते हैं। इसका मार्केट पर बड़ा असर देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि निवेश की दुनिया में ज्यादातर घटनाक्रम का पॉजिटिव या निगेटिव मतलब निकाला जा सकता है। यह तब के मूड पर निर्भर करता है। मार्केट किसी प्राकृतिक सिद्धांत से नहीं चलता है।