यूक्रेन में रूस के आक्रमण तेज होने के बाद शुक्रवार को तेल की कीमतें कई वर्षों के उच्चतम स्तर (multi-year highs) पर पहुंच गई। दुनिया में क्रूड के दूसरे सबसे बड़े निर्यातक से तेल खरीदारी रुकने की वजह से तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। क्रूड की कीमतों में 2020 के मध्य में सबसे बड़ी साप्ताहिक तेजी आई थी। इस दौरान ब्रेंट बेंचमार्क 16 प्रतिशत और यूएस क्रूड 21 प्रतिशत बढ़ा था। सबसे अधिक कारोबार वाला ऑइल फ्यूचर क्रमशः 2013 और 2008 के बाद सबसे ऊंचे स्तरों पर बंद हुआ।
पूरे हफ्ते तेल में उछाल आया क्योंकि अमेरिका और उसके सहयोगियों ने रूस पर प्रतिबंधों को बढ़ा दिया। वहीं रूसी तेल और गैस की बिक्री रुकने से आने वाले महीनों में आपूर्ति संकट और बढ़ने की आशंका है।
Brent futures 7.65 डॉलर या 6.9 प्रतिशत बढ़कर 118.11 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि यूUS West Texas Intermediate (WTI) crude 8.01 डॉलर या 7.4 प्रतिशत बढ़कर 115.68 डॉलर पर बंद हुआ।
यह फरवरी 2013 के बाद से Brent के लिए और सितंबर 2008 के बाद से WTI के लिए सबसे अधिक क्लाोजिंग स्तर था। सप्ताह के दौरान, Brent मई 2012 के बाद से अपने उच्चतम इंट्राडे और सितंबर 2008 के बाद से WTI अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।
बता दें कि रूस प्रतिदिन 4 से 5 मिलियन बैरल तेल का निर्यात करता है। इससे यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल निर्यातक बन जाता है। कच्चे तेल के निर्यात में रूस केवल सऊदी अरब से पीछे है। व्यापारी पूरे सप्ताह रूसी तेल बेचने में मुश्किलों का सामना कर रहे थे। शुक्रवार को Shell PLC रूसी कार्गो का एकमात्र उल्लेखनीय खरीदार था, जिसे physical Brent crude के लिए $ 28 की भारी छूट पर बेचा गया था।
तेल का संकट जारी रहने की संभावना है। दोनों प्रमुख दलों के सांसदों के दबाव में Biden प्रशासन ने कहा कि वह रूसी तेल के अमेरिकी आयात में कटौती के विकल्पों पर विचार कर रहा है। जबकि यह वैश्विक आपूर्ति और उपभोक्ताओं पर असर को कम करने की कोशिश करता है।
अधिकांश अमेरिकी रूसी तेल आयात पर प्रतिबंध लगाने के विचार का समर्थन करते हैं। शुक्रवार को Reuters/Ipsos poll के अनुसार इसमें से 80 प्रतिशत ने कहा कि अमेरिका को रूसी तेल खरीदना बंद कर देना चाहिए।
कनाडा ने इस हफ्ते की शुरुआत में रूसी तेल के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था। रूस के सबसे बड़े खरीदारों में चीन, दक्षिण कोरिया, जर्मनी और नीदरलैंड (China, South Korea, Germany and Netherlands) शामिल हैं। कुछ रिफाइनर ने रूसी तेल खरीदना बंद कर दिया है। इसके अलावा ट्रेडिंग फर्म अधिक प्रतिबंधों के डर से रूसी विक्रेताओं के साथ लेनदेन करने से बचना चाहते हैं।