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ओला इलेक्ट्रिक के शेयर प्राइस से उसका फंडामेंटल नहीं खा रहा मेल: रामदेव अग्रवाल

Ola Electric Shares: ओला इलेक्ट्रिक के शेयरों में लिस्टिंग के बाद से ही अंधाधुंध तेजी देखी जा रही है। हालांकि इस तेजी ने कंपनी के वैल्यूएशन को वाजिब ठहराना मुश्किल बना दिया है। दिग्गज निवेशक रामदेव अग्रवाल ने ये बातें कहीं। रामदेव अग्रवाल ने हमारे सहयोगी CNBC-TV18 से एक बातचीत में कहा, "ओला इलेक्ट्रिक के मौजूदा फंडामेंटल्स इसके शेयर प्राइस को उचित नहीं ठहरा पाएंगे।"

Vikrant singhअपडेटेड Aug 20, 2024 पर 3:34 PM
ओला इलेक्ट्रिक के शेयर प्राइस से उसका फंडामेंटल नहीं खा रहा मेल: रामदेव अग्रवाल
Ola Electric Shares: ओला इलेक्ट्रिक बिजनेस शुरू करने के बाद से अभी तक मुनाफे में नहीं आ पाई है

Ola Electric Shares: ओला इलेक्ट्रिक के शेयरों में लिस्टिंग के बाद से ही अंधाधुंध तेजी देखी जा रही है। हालांकि इस तेजी ने कंपनी के वैल्यूएशन को वाजिब ठहराना मुश्किल बना दिया है। दिग्गज निवेशक रामदेव अग्रवाल ने ये बातें कहीं। रामदेव अग्रवाल ने हमारे सहयोगी CNBC-TV18 से एक बातचीत में कहा, "ओला इलेक्ट्रिक के मौजूदा फंडामेंटल्स इसके शेयर प्राइस को उचित नहीं ठहरा पाएंगे।" हालांकि शेयर मार्केट ओला की इलेक्ट्रिक मार्केट में मजबूत उपस्थिति पर दांव लगा रहा है और निवेशक इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट में कंपनी के दबदबे वाली पोजिशन को लेकर उत्साहित दिख रहे हैं। ओला इलेक्ट्रिक का दावा है कि इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट में उसकी करीब 49 फीसदी हिस्सेदारी है। हालांकि इसके बावजूद कंपनी अभी तक मुनाफे में नहीं आ पाई है।

ओला इलेक्ट्रिक ने बीते 15 अगस्त को इलेक्ट्रिक मोटरबाइक सेगमेंट में भी उतरने का ऐलान किया। कंपनी ने अपनी पहली ई-बाइक 'रोडस्टर (Roadster)' लॉन्च की। इसकी शुरुआती कीमत 74,999 रुपये है। कंपनी के सीईओ भाविश अग्रवाल ने बताया कि 'रोडस्टर प्रो' की डिलीवरी अगले साल दिवाली तक शुरू हो जाएगी, जबकि 'रोडस्टर एक्स' जनवरी 2025 से बाजार में उपलब्ध होगी।

हालांकि रामदेव अग्रवाल, मोटरबाइक सेगमेंट की मौजूदा कंपनियों- हीरो मोटो और बजाज ऑटो को खारिज नहीं कर रहे हैं, और उम्मीद करते हैं कि वे भी आगे चलकर एक समय में इलेक्ट्रिक सेगमेंट की मजबूत कंपनी बन जाएंगी।

रामदेव ने कहा कि इलेक्ट्रिक व्हीकल पर फोकस बढ़ रहा है। लेकिन पारंपरिक फ्यूल इंजन वाली गाड़ियों (ICE) से इलेक्ट्रिक पर स्विच होने की रफ्तार अभी भी धीमी है। उन्होंने कहा कि अगर यह रफ्तार धीमी रहती है, तो जाहिर सी बात है कि बड़ी कंपनियों के पास 'पूरी हिस्सेदारी' बनी रहेगी, क्योंकि अब पारंपरिक फ्यूल इंजन वाले सेगमेंट में कोई नया कॉम्पिटीशन नहीं आ रहा है।

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