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Kenneth Andrade ने अपनाया बाजार से उलट रुख, आईटी सर्विसेज और फार्मा कंपनियों के शेयरों में दी निवेश की सलाह

Old Bridge Capital के फाउंडर और चीफ इनवेस्टमेंट अफसर Kenneth Andrade की आईटी सर्विसेज और फॉर्मा सेक्टर को लेकर अलग राय है। जब प्रमुख एनालिस्ट्स इन दोनों सेक्टर से दूरी बनाने की सलाह दे रहे है, तब एंडराडे को इनमें निवेश के मौके दिख रहे हैं। उनका मानना है कि आईटी सर्विसेज कंपनियों की लोअर ग्रोथ का असर उनकी वैल्यूएशंस पर पड़ा है। उन्होंने फार्मा सेक्टर के बारे में कहा कि अमेरिका में अपनी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के मुकाबले इंडिया फॉर्मा कंपनियों ने मजबूत पैठ बनाई है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jun 12, 2023 पर 5:20 PM
Kenneth Andrade ने अपनाया बाजार से उलट रुख, आईटी सर्विसेज और फार्मा कंपनियों के शेयरों में दी निवेश की सलाह
एंडराडे ने कहा कि बैंकों के बिजनेस में अब एसएमई की हिस्सेदारी ज्यादा है। एसएमई की ग्रोथ अच्छी रही है। उनके लिए संभावनाएं हैं। लेकिन कैपिटल तक पहुंच एक दिक्कत रही है। ऐसे में बैंक इस सेगमेंट पर अपना फोकस बढ़ा रहे हैं। टॉप तीन बैंकों का प्रदर्शन अच्छा है।

Old Bridge Capital के फाउंडर और चीफ इनवेस्टमेंट अफसर Kenneth Andrade की आईटी सर्विसेज और फॉर्मा सेक्टर को लेकर अलग राय है। जब प्रमुख एनालिस्ट्स इन दोनों सेक्टर से दूरी बनाने की सलाह दे रहे है, तब एंडराडे को इनमें निवेश के मौके दिख रहे हैं। उनका मानना है कि आईटी सर्विसेज कंपनियों की लोअर ग्रोथ का असर उनकी वैल्यूएशंस पर पड़ा है। उन्होंने फार्मा सेक्टर के बारे में कहा कि अमेरिका में अपनी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के मुकाबले इंडिया फॉर्मा कंपनियों ने मजबूत पैठ बनाई है। ग्लोबल इकोनॉमी के बारे में उन्होंने कहा कि अगले कुछ समय तक इनफ्लेशन को लेकर दबाव बना रह सकता है। मनीकंट्रोल से बातचीत में उन्होंने कई सेक्टर के बारे में अपनी राय बताई।

बेहतर रहा FY23 में ंकंपनियों का प्रदर्शन

फाइनेंशियल ईयर 2022-23 के कंपनियों के नतीजों के बारे में उन्होंने कहा कि रिजल्ट्स को गौर से देखने पर आपके लिए ऐसी कंपनियों का चुनाव करना मुश्किल हो सकता है, जिन्होंने लॉस दिखाया है। इसमें न्यू एज कंपनियां शामिल नहीं हैं। पिछला दशक ऐसा था जब इंडियन कंपनियों पर कर्ज का बोझ बहुत ज्यादा था। अगर हम FY23, FY24 की बात करें तो कंपनियां इक्विटी के जरिए पैसे जुटा रही हैं। यह पिछले 2-3 साल के मुकाबले बड़ा बदलाव है। अब बैंकों की बैलेंसशीट पर भी रिस्क नहीं दिख रहा। यह पश्चिमी देशों के हालात से उलट है। पश्चिमी देशों में कंपनियों पर कर्ज का ज्यादा बोझ है।

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