Q2 Results के बाद क्रैश हो गया है Paradeep Phosphates का शेयर, इंट्राडे में 14% की आई गिरावट
Paradeep Phosphates का शेयर शुक्रवार, 30 अक्टूबर को 14% तक टूटकर Nifty 500 का सबसे बड़ा लूजर बन गया। महंगे कच्चे माल और फर्टिलाइजर की कमजोर मांग ने Paradeep Phosphates की सितंबर तिमाही बिगाड़ दी। मुनाफा ₹393 करोड़ से घटकर ₹121 करोड़ पर आ गया और EBITDA मार्जिन 9.6% से फिसलकर 5.6% रह गया।
Paradeep Phosphates का शेयर शुक्रवार को इंट्राडे में 14% तक गिर गया.
फर्टिलाइजर कंपनी Paradeep Phosphates के शेयर में शुक्रवार, 30 अक्टूबर को जोरदार बिकवाली देखने को मिली। इंट्राडे कारोबार में शेयर 14% तक टूट गया और Nifty 500 इंडेक्स का सबसे बड़ा लूजर बन गया। ये गिरावट कंपनी के सितंबर तिमाही के कमजोर नतीजों के एक दिन बाद आई है। तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 69% गिर गया, जबकि EBITDA में 37% की गिरावट आई। कच्चे माल की ऊंची लागत और फर्टिलाइजर की कमजोर मांग ने कंपनी के मुनाफे पर भारी चोट की।
Paradeep Phosphates Q2 Results
सितंबर तिमाही में Paradeep Phosphates का नेट प्रॉफिट घटकर ₹121 करोड़ रह गया। पिछले साल की इसी तिमाही में कंपनी ने ₹393 करोड़ का मुनाफा कमाया था। यानी 1 साल में कंपनी के मुनाफे से ₹272 करोड़ गायब हो गए और ये पिछले साल के एक तिहाई से भी नीचे आ गया।
मुनाफे में इतनी बड़ी गिरावट के पीछे दो बड़ी वजहें रहीं। पहली, कच्चे माल की लागत ऊंची बनी रही। दूसरी, फर्टिलाइजर की मांग कमजोर रही। सितंबर तिमाही में कंपनी की रेवेन्यू बढ़ी, लेकिन कमजोर मांग और महंगे कच्चे माल ने इस बढ़त का फायदा मुनाफे तक नहीं पहुंचने दिया।
EBITDA 37% टूटी, मार्जिन 9.6% से घटकर 5.6% पर आया
ऑपरेटिंग लेवल पर भी कंपनी दबाव में रही। सितंबर तिमाही में EBITDA सालाना आधार पर 37% घटकर ₹413.4 करोड़ रह गई, जो पिछले साल की इसी तिमाही में ₹656.6 करोड़ थी। यानी ऑपरेशन से होने वाली कमाई ₹243.2 करोड़ घट गई।
मार्जिन की तस्वीर और साफ बताती है कि दबाव कितना गहरा था। EBITDA मार्जिन पिछले साल की इसी तिमाही के 9.6% से फिसलकर 5.6% पर आ गया। इसे ऐसे समझिए कि पिछले साल कंपनी को हर ₹100 की बिक्री पर ऑपरेशन से ₹9.6 बच रहे थे, जो अब घटकर सिर्फ ₹5.6 रह गए हैं। मार्जिन में ये 4 परसेंटेज पॉइंट की गिरावट है।
उत्पादन में बढ़त, फॉस्फोरिक एसिड की क्षमता 7 लाख टन करने की तैयारी
कमजोर नतीजों के बीच ऑपरेशनल मोर्चे पर कुछ अच्छी खबरें भी रहीं। सितंबर तिमाही में कंपनी का सल्फ्यूरिक एसिड उत्पादन सालाना आधार पर 32% बढ़ा, जबकि फॉस्फोरिक एसिड का उत्पादन 7% ऊपर रहा।
कंपनी फॉस्फोरिक एसिड की क्षमता बढ़ाने के पहले चरण पर भी आगे बढ़ रही है। इस विस्तार के बाद सालाना क्षमता 5 लाख टन से बढ़कर 7 लाख टन हो जाएगी, यानी हर साल 2 लाख टन का अतिरिक्त उत्पादन संभव होगा। ये मौजूदा क्षमता से 40% ज्यादा है।
इसके अलावा कंपनी ने एल्युमिनियम फ्लोराइड प्लांट लगाने के लिए ₹250 करोड़ के निवेश को भी मंजूरी दी है।
1 साल में 58% टूटा शेयर, इस साल अब तक 51.97% की गिरावट
शुक्रवार की गिरावट Paradeep Phosphates के शेयर के लिए कोई अकेली घटना नहीं है। शेयर लगातार नीचे जा रहा है। BSE के आंकड़ों के मुताबिक पिछले 6 महीने में शेयर 38% और पिछले 1 साल में 58% तक गिर चुका है। इस साल अब तक शेयर में 51.97% की गिरावट आ चुकी है। यानी साल की शुरुआत में शेयर की जो कीमत थी, उसका आधे से भी कम अब बचा है।
52 हफ्ते के दायरे में देखें तो शेयर ने ₹180.70 का हाई और ₹99.80 का लो बनाया है। इसे ऐसे समझिए कि 1 साल पहले अगर किसी ने इस शेयर में ₹10,000 लगाए होते, तो 58% की गिरावट के बाद उसकी रकम घटकर ₹4,200 रह गई होती।
आगे किन बातों पर रहेगी निवेशकों की नजर
आने वाले दिनों में निवेशक कंपनी के कच्चे माल की कीमतों पर खास नजर रखेंगे। इनमें सल्फर, फॉस्फोरिक एसिड और अमोनिया की कीमतें सबसे अहम हैं। इनके साथ फ्रेट और इंश्योरेंस की लागत भी ट्रैक की जाएगी, क्योंकि यही लागतें इस तिमाही में मुनाफे पर भारी पड़ी हैं।
मांग के मोर्चे पर NPK फर्टिलाइजर की बिक्री में रिकवरी अहम रहेगी। सब्सिडी की रकम कितनी तेजी से कंपनी तक पहुंचती है, इन्वेंटरी का स्तर क्या रहता है और कंपनी को कितने कर्ज की जरूरत पड़ती है, ये भी निवेशकों की निगरानी में रहेंगे।
इनके अलावा फॉस्फोरिक एसिड की क्षमता बढ़ाने का काम कितनी तेजी से आगे बढ़ता है और ₹250 करोड़ के प्रस्तावित एल्युमिनियम फ्लोराइड प्रोजेक्ट में क्या प्रगति होती है, इस पर भी बाजार की नजर रहेगी।
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