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Patanjali Foods पर क्या लगाया जा सकता है दांव? ₹1,100 करोड़ में कंपनी कर रही 2 नए बिजनेस का अधिग्रहण

Patanjali Foods Shares: पतंजलि फूड्स का एक बार फिर से नाम बदलने की संभावना है। पहले इस कंपनी को रुचि सोया इंडस्ट्रीज के नाम से जाना जाता था। हालांकि बाबा रामदेव की अगुआई वाली पतंजलि आयुर्वेद ने अधिग्रहण के बाद इसका नाम बदलकर 'पतंजलि फूड्स' कर दिया। अब यह कंपनी पतंजलि आयुर्वेद के होम और पर्सनल केयर बिजनेस का अधिग्रहण करने जा रही है। ऐसे में अब शायद इसे फिर से नाम बदलने की जरूरत पड़े

Moneycontrol Newsअपडेटेड Jul 04, 2024 पर 11:55 PM
Patanjali Foods पर क्या लगाया जा सकता है दांव? ₹1,100 करोड़ में कंपनी कर रही 2 नए बिजनेस का अधिग्रहण
पतंजलि आयुर्वेद के होम एंड पर्सनल केयर बिजनेस को खरीदने के लिए पतंजलि फूड्स 1100 करोड़ का भुगतान करेगी

Patanjali Foods Shares: पतंजलि फूड्स का एक बार फिर से नाम बदलने की संभावना है। पहले इस कंपनी को रुचि सोया इंडस्ट्रीज के नाम से जाना जाता था। हालांकि बाबा रामदेव की अगुआई वाली पतंजलि आयुर्वेद ने NCLT प्रक्रिया के जरिए अधिग्रहण के बाद इसका नाम बदलकर 'पतंजलि फूड्स' कर दिया। अधिग्रहण के बाद, पतंजलि फूड्स ने नकद और रॉयल्टी भुगतान के जरिए पतंजलि आयुर्वेद के कुछ फूड बिजनेस का अधिग्रहण किया। इसमें बिस्कुट, घी, अनाज और न्यूट्रास्युटिकल्स आदि शामिल थे। अब कंपनी ऐसे ही एक कदम के तहत पतंजलि आयुर्वेद के होम और पर्सनल केयर बिजनेस का अधिग्रहण करने जा रही है। ऐसे में अब शायद कंपनी को एक बार फिर से नाम बदलने की जरूरत पड़ सकती है, जिससे ग्राहकों को यह साफ किया जा सके कि वह फूड बिजनेस के अलावा दूसरे FMCG सेगमेंट में भी कारोबार करती है।

हालांकि, निवेशकों के सामने मुख्य सवाल यह है कि उन्हें इस अधिग्रहण से क्या लाभ हो सकता है और क्या कंपनी आगे ऐसे और रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन करती रहेगी। पतंजलि फूड्स जिस होम और पर्सनल केयर बिजनेस का अधिग्रहण करने जा रही है, उसका वित्त वर्ष 2024 में रेवेन्यू 2,771 करोड़ रुपये था। वहीं इसका ग्रॉस मार्जिन 48 प्रतिशत और EBITDA मार्जिन 18 प्रतिशत था। पतंजलि फूड्स इस बिजनेस को 1100 करोड़ रुपये में खरीदेगी।

यह आंकड़ा पतंजलि फूड्स के मौजूदा फूड और FMCG सेगमेंट से अच्छा है, जिसका EBIT मार्जिन 12.8 प्रतिशत है। हालांकि कंपनी अधिग्रहण के बाद अगले 20 साल तक पतंजलि आयुर्वेद को 3 फीसदी की रॉयल्टी देगी। अगर इसे शामिल करें तो EBITDA मार्जिन कुछ कम हो जाएगा। आसान कैलकुलेशन के लिए यह मान लेते हैं EBITDA मार्जिन पहले के 18 प्रतिशत से 3 फीसदी घटकर 15 प्रतिशत पर आ जाएगा।

हालांकि यहां डील की सबसे आकर्षक बात यह है कि पंतजलि फूड्स सिर्फ बिक्री का 0.4 प्रतिशत भुगतान कर यह अधिग्रहण कर रही है। आमतौर पर FMCG कंपनियों का वैल्यूएशन उनके बिक्री के 5 से 8 गुना पर होता है। इसलिए यहां रॉयल्टी की शर्त शामिल है, जिससे यह सुनिश्चत किया जा सके कि प्रमोटरों को आने वाले सालों में एक बढ़ती हुई राशि मिलती रही और अभी के कम वैल्यूएशन की भरपाई की हो सके। रॉयल्टी की मात्रा से शेयरधारक निराश हो सकते हैं, लेकिन इससे जुड़ी कई अच्छी बातें भी हैं।

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