Polycab Share Price: ₹2.78 करोड़ की कानूनी लड़ाई, NSE ने कॉल-पुट पर लगाया बैन तो शेयर धड़ाम

Polycab Shares: ₹2.78 करोड़ के एक मामले में पॉलीकैब ऐसी कानूनी लड़ाई में फंसी कि NSE ने इसे इक्विटी डेरिवेटिव सेगमेंट से बाहर कर दिया तो इसके शेयर आज धड़ाम हो गए। एनएसई ने दिसंबर के बाद से इसका F&O कॉन्ट्रैक्ट्स बंद किया तो खलबली मच गई। समझें पूरा मामला और इक्विटी डेरिवेटिव सेगमेंट से बाहर होने का क्या मतलब है

अपडेटेड Oct 13, 2026 पर 11:27 AM
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एनएसई ने Polycab को इक्विटी डेरिवेटिव सेगमेंट से बाहर करने का फैसला इसलिए किया क्योंकि यह आईबीसी फ्रेमवर्क के तहत शॉर्टलिस्ट हुई है।

Polycab Share Price: वायर और केबल बनाने वाली देश की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड कंपनी पॉलीकैब के शेयरों ने आज निवेशकों को तगड़ा शॉक दिया। एनएसई ने जब 30 दिसंबर, 2026 से इसके F&O (फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस) कॉन्ट्रैक्ट्स को बंद करने को कहा तो आज इसमें बिकवाली का दबाव दिखा। एनएसई ने दिसंबर के बाद से इसे डेरिवेटिव सेगमेंट से बाहर करने का आदेश इसलिए दिया क्योंकि कंपनी अब IBC (इनसॉल्वेंस एंड बैंकरप्सी कोड) फ्रेमवर्क के तहत आ गई। इसके बाद अब कंपनी के शेयर धड़ाम हो गए। फिलहाल बीएसई पर यह 2.16% की गिरावट के साथ ₹8232.00 पर है। इंट्रा-डे में यह 5.38% टूटकर ₹7,961.10 तक आ गया था।

Polycab क्यों आई IBC फ्रेमवर्क के शॉर्टलिस्ट में

एनएसई ने पॉलीकैब इंडिया को इक्विटी डेरिवेटिव सेगमेंट से बाहर करने का फैसला इसलिए किया क्योंकि यह आईबीसी फ्रेमवर्क के तहत शॉर्टलिस्ट हुई है। यह मामला पॉलीकैब इंडिया के खिलाफ एक दिवालिया याचिका से जुड़ा है, जिसे एशियर मेटल्स (Asier Metals) ने फाइल किया है और इस पर सुनवाई के लिए NCLT (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) ने दोनों पक्षों की बहस के बाद मंजूरी दे दी है।


यह मामला ₹2.78 करोड़ के डिफॉल्ट से जु़ड़ा है। एशियर मेटल्स का कहना है कि पॉलीकैब के साथ उसका कारोबार संबंध साल 2020 में शुरू हुआ और इसके तहत पहले ही तय हो गया था कि एलुमिनियम इनगॉट्स की सप्लाई के पेमेंट 100% एडवांस होगा। सप्लायर एशियर मेटल्स के मुताबिक ऐसा मार्च 2026 तक चलता रहा और फिर इसके बाद 8 जून और 25 जून को जो दो ऑर्डर्स पॉलीकैब ने दिए, उसका एडवांस पेमेंट नहीं मिला। सप्लायर ने बाद में सप्लाई और बकाये के आधार पर पेमेंट मांगा।

सप्लायर के दावे के मुताबिक उसने प्रति किग्रा ₹405 के भाव पर एलुमिनियम इनगॉट्स की सप्लाई की और 29 इनवॉइस जारी की। रिफंड्स, क्रेडिट नोट्स और अन्य एडजस्टमेंट्स के बाद एशियर मेटल्स ने ₹2.78 करोड़ के बकाए की बात कही, जिस पर कंपनी 26 जून को डिफॉल्ट हो गई यानी कि दे नहीं पाई। इस पर सप्लायर ने 6 अगस्त को स्टैटुअर डिमांड नोटिस भेजा। पेमेंट नहीं मिलने पर सप्लायर ने 24 अगस्त को एनसीएलटी में याचिका डाली, जिसे 7 अक्टूबर को एनसीएलटी ने स्वीकार कर लिया।

कंपनी के दावे की बात करें तो पॉलीकैब का कहना है कि इनवॉइस प्रोविजिनल बिलिंग थी और इसमें फाइनल प्राइसिंग, रिकंसिलिएशन, क्वांटिटी डिस्काउंट्स, क्रेडिट नोट्स और अन्य एडजस्टमेंट्स होने थे। पॉलीकैब ने ₹17.52 करोड़ का काउंटर-क्लेम भी किया और डिटेंशन/डेमरेज के लिए ₹80 लाख के एडजस्टमेंट की मांग की। कंपनी का दावा है कि सप्लायर ने यह रकम एकतरफा और बिना मिलान किए गए हिसाब-किताब से निकाली थी। वहीं सप्लायर ने पर्चेज ऑर्डर का हवाला देते हुए कहा कि इसमें साफतौर पर प्रति किग्रा ₹405 की कीमत तय लिखी है।

क्या है NSE के आदेश का मतलब

एनएसई ने 12 अक्टूबर के अपने आदेश में पॉलीकैब इंडिया को इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट से बाहर निकालने का आदेश दिया, जिसके तहत 30 दिसंबर, 2026 से इसके F&O (फ्यूचर्स एंड कॉन्ट्रैक्ट्स) की ट्रेडिंग नहीं होगी। हालांकि इस सर्कुलर में यह भी कहा गया है कि अक्टूबर 2026 के कॉन्ट्रैक्ट्स एक्सपायर होने के बाद एक्सपायरी महीनों के लिए कोई नया कॉन्ट्रैक्ट जारी नहीं होगा। वहीं अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर 2026 में एक्सपायर होने वाले मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट्स अपने-अपने एक्सपायरी डेट तक ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध रहेंगे। NSE का यह भी कहना है कि सभी मौजूदा डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स पर T+2 दिन के आधार पर 100% मार्जिन लगाया जाएगा। यह नियम 13 अक्टूबर, 2026 तक की सभी ओपन पोजीशन्स और 14 अक्टूबर से बनने वाली नई पोजीशन्स पर लागू होगा।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल

पॉलीकैब के शेयरों ने अमेरिका-ईरान के बीच के युद्ध, टैरिफ वार की आंच और महंगाई की मार के बीच निवेशकों को कम समय में अच्छा रिटर्न दिया है। 27 जनवरी 2026 को बीएसई पर यह ₹6,660.50 पर था, जो इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है। इस निचले स्तर से 5 महीने में यह 52.07% उछलकर 22 जून 2026 को ₹10,128.60 पर पहुंच गया था।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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