दिग्गज फंड मैनेजर प्रशांत जैन ने उन निवेशकों के लिए बड़ी बात कही है, जो बाजार में लगातार गिरावट से मायूस हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से बाजार के कमजोर प्रदर्शन का मतलब यह नहीं है कि इनवेस्टर्स का पैसा डूबने जा रहा है। उन्होंने कहा कि कई बड़े उतार-चढ़ाव की साइकिल के बावूजद भारतीय शेयर बाजारों ने उन निवेशकों को बड़ा इनाम दिया है, जिन्होंने अपना धैर्य बनाए रखा।
रिटर्न कुछ समय के लिए रुक सकता है, खत्म नहीं हो सकता
मनीकंट्रोल के एक प्रोग्राम में जैन ने कहा कि इनवेस्टर्स हमेशा जियोपॉलिटिकल टेंशन, क्रूड ऑयल में उछाल, विदेशी फंडों की खरीदारी जैसी वजहों से डर जाते हैं। उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि रिटर्न कुछ समय के लिए रुक सकता है, लेकिन यह खत्म नहीं हो सकता।" उन्होंने कहा कि भारतीय बाजरों में कई बार लंबे समय तक नहीं रिटर्न नहीं दिखा है। लेकिन, इकोनॉमिक ग्रोथ और कंपनियों की अर्निंग्स बढ़ने पर बाजार में रिकवरी आई है।
बड़ी गिरावट के बावजूद बाजार में पैसा बना है
जैन ने कहा, "यह पहली बार नहीं है कि इंडियन मार्केट्स में करेक्शन है या बीते दो सालों से रिटर्न नहीं मिला है। मैंने अपना करियर तब शुरू किया था, जब सेंसेक्स का रिटर्न करीब 10 सालों तक जीरो था।" उन्होंने कहा कि बीच-बीच में गिरावट के बावजूद लंबी अवधि में भारतीय बाजारों में बड़ा पैसा बना है।
सेंसेक्स में 100 रुपये का निवेश 1.20 लाख हो गया
उन्होंने कहा, "अगर आप बीते 45 सालों को देखें तो सेंसेक्स में 100 रुपये 75,000 रुपये हो गए हैं। अगर आप इसमें डिविडेंड जोड़ दें तो शायद यह 1,20,000 रुपये हो जाएगा।" उन्होंने कहा कि शेयर बाजारों में ऐसा समय आता है, जब पैसे नहीं बनते हैं। लंबी अवधि के निवेशकों को इससे हैरान नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, "सेंसेक्स के 47 सालों के इतिहास में 14 साल ऐसे हैं, जब मार्केट ने निगेटिव रिटर्न दिया। 5 साल का एक ऐसा दौर था जब मार्केट ने रिटर्न नहीं दिया। एक बार तो 10 साल तक पॉजिटिव रिटर्न नहीं मिला था।"
शॉर्ट टर्म की चुनौतियों के बावजूद ग्रोथ स्टोरी पर असर नहीं
जैन ने कहा कि ऑयल की हाई कीमतें, वैश्विक अनिश्चितता और विदेशी फंडों की बिकवाली जैसे शॉर्ट टर्म चैलेंजेज के बावूजद इंडिया की स्ट्रक्चरल ग्रोथ स्टोरी पर असर नहीं पड़ा है। इसकी वजह यह है कि इकोनॉमी बढ़ रही है और कंपनियों के प्रॉफिट में इजाफा हो रहा है। इसका मतलब है कि आखिरकार मार्केट की दिशा बदलेगी। उन्होंने कहा कि भारतीय शेयर बाजारों के हालिया कमजोर प्रदर्शन की वजह ग्लोबल इनवेस्टर्स की ताइवान, दक्षिण कोरिया और अमेरिका जैसे बाजारों में निवेश है, जहां एआई से जुड़ी कंपनियां हैं।
एआई कंपनियां नहीं होने से भारतीय बाजार का प्रदर्शन कमजोर
उन्होंने कहा, "इंडिया में एआई से जुड़ी कंपनियां नहीं है, जिससे विदेशी फंडों ने एआई कंपनियों वाले मार्केट्स का रुख किया।" उन्होंने कहा कि विदेशी फंडों के थोड़े समय के लिए इंडिया से दूरी बनाने के बावजूद बाजार में लंबी अवधि के निवेश के मोके रहे हैं। उन्होंने कहा कि इंडिया में निवेश का सबसे अच्छा समय तब है जब करेंसी की चिंता की वजह से विदेशी फंड्स बिकवाली कर रहे होते हैें।
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