Promoter Buying Stocks: इन तीन कंपनियों में प्रमोटर ने बढ़ाई हिस्सेदारी, क्या आप भी लगाएंगे दांव?

Promoter Buying Stocks: तीन कंपनियों में प्रमोटर हिस्सेदारी बढ़ी है। क्या यह बड़े रिटर्न का संकेत है या सिर्फ भरोसे का इशारा? जानिए कंपनियों के ताजा आंकड़े और समझें निवेश से पहले किन बातों पर ध्यान देना जरूरी है।

अपडेटेड Mar 02, 2026 पर 5:15 PM
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जब प्रमोटर अपनी कंपनी के शेयर खरीदते हैं, तो यह मजबूत संकेत होता है।

Promoter Buying Stocks: प्रमोटर हिस्सेदारी में बढ़ोतरी को आम तौर पर सकारात्मक संकेत माना जाता है। प्रमोटर कंपनी के कारोबार, वित्तीय स्थिति, जोखिम और भविष्य की योजनाओं को सबसे बेहतर समझते हैं। जब वे बाजार से अपने ही शेयर खरीदते हैं, तो यह संकेत होता है कि उन्हें मौजूदा कीमत आकर्षक लग रही है और भविष्य पर भरोसा है। यहां तीन ऐसे शेयर हैं, जिनमें हाल की तिमाही में प्रमोटरों ने हिस्सेदारी बढ़ाई है।

Infosys

Infosys एक वैश्विक आईटी सर्विस और कंसल्टिंग कंपनी है, जो डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, इंजीनियरिंग और आउटसोर्सिंग सेवाएं देती है। वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में प्रमोटर हिस्सेदारी 14.30% से बढ़कर 14.52% हो गई। यानी 0.22% की बढ़ोतरी। इसी दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी भी हल्की बढ़ी, जबकि म्यूचुअल फंड की हिस्सेदारी घटी।


हाल के हफ्तों में आईटी सेक्टर दबाव में रहा है। बाजार में चिंता है कि AI के कारण पारंपरिक आईटी सेवाओं की मांग और कीमतों पर असर पड़ सकता है। तीसरी तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 45,479 करोड़ रुपये रहा, जो 8.8% की ग्रोथ दिखाता है। नेट प्रॉफिट 6,654 करोड़ रुपये रहा, जो 2.2% घटा। मुनाफे पर नए श्रम कोड लागू करने से जुड़ा 1,289 करोड़ रुपये का एकमुश्त खर्च असर डाल गया।

कंपनी ने पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए रेवेन्यू ग्रोथ अनुमान 2-3% से बढ़ाकर 3-3.5% कर दिया है। आगे की ग्रोथ काफी हद तक अमेरिका और यूरोप में टेक खर्च पर निर्भर करेगी। AI कंपनी के लिए अवसर भी है और जोखिम भी।

Vardhman Textiles

Vardhman Textiles यार्न और फैब्रिक सेगमेंट में मजबूत वैश्विक मौजूदगी वाली बड़ी टेक्सटाइल कंपनी है। वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में प्रमोटर हिस्सेदारी 64.21% से बढ़कर 64.44% हो गई। यानी 0.23% की बढ़ोतरी। वहीं विदेशी संस्थागत निवेशकों और म्यूचुअल फंड की हिस्सेदारी में हल्की कमी आई।

इस तिमाही में रेवेन्यू 2.3% बढ़कर 2,533 करोड़ रुपये रहा। लेकिन नेट प्रॉफिट 16.5% घट गया। मार्जिन पर दबाव और 23.6 करोड़ रुपये के एकमुश्त श्रम कोड प्रावधान का असर दिखा।

कंपनी वित्त वर्ष 2025-26 में बदलाव के दौर से गुजर रही है। यह पारंपरिक कॉटन यार्न से हटकर सिंथेटिक और टेक्निकल टेक्सटाइल पर ज्यादा फोकस कर रही है। साथ ही बड़ा पूंजीगत व्यय कार्यक्रम इसकी लंबी अवधि की रणनीति का हिस्सा है।

Godrej Industries

यह गोदरेज ग्रुप की होल्डिंग कंपनी है। इसका कारोबार केमिकल, एग्री, रियल एस्टेट और फाइनेंशियल सर्विसेज जैसे कई क्षेत्रों में फैला है। वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में प्रमोटर हिस्सेदारी 71.31% से बढ़कर 74.64% हो गई। यानी 3.33% की बड़ी बढ़ोतरी, जो तीनों कंपनियों में सबसे ज्यादा है। म्यूचुअल फंड ने भी हिस्सेदारी बढ़ाई, जबकि विदेशी संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी घटी।

इस तिमाही में कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 5,051 करोड़ रुपये रहा और नेट प्रॉफिट 241 करोड़ रुपये पहुंचा। कंपनी अब पारंपरिक होल्डिंग स्ट्रक्चर से आगे बढ़कर हाई ग्रोथ समूह बनने की दिशा में काम कर रही है। Godrej Capital को ग्रोथ इंजन के रूप में मजबूत किया जा रहा है। ग्रीन केमिस्ट्री और फाइनेंशियल सर्विसेज में विस्तार भविष्य की रणनीति का अहम हिस्सा है।

क्या सिर्फ प्रमोटर खरीद के आधार पर निवेश करें?

जब प्रमोटर अपनी कंपनी के शेयर खरीदते हैं, तो यह मजबूत संकेत जरूर होता है। इसका मतलब है कि उन्हें लगता है मौजूदा बाजार कीमत कंपनी की असली वैल्यू से कम है।

लेकिन यह गारंटी नहीं है। प्रमोटर भी समय के मामले में गलत हो सकते हैं। इसलिए निवेश से पहले कंपनी के फंडामेंटल, बैलेंस शीट और ग्रोथ संभावनाओं का एनालिसिस जरूरी है। प्रमोटर की खरीद को संकेत मानें, लेकिन अंतिम फैसला आंकड़ों के आधार पर लें।

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