Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 2 मार्च को भारी गिरावट दिखी। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से वैश्विक निवेशक घबरा गए। अगर आप भी अपना पोर्टफोलियो देखकर परेशान हैं, तो एक्सपर्ट कहते हैं कि घबराने की जरूरत नहीं है। जरूरी यह है कि समझें बाजार ऐसे समय में कैसे चलता है और आपको क्या करना चाहिए।
बाजार को युद्ध नहीं, अनिश्चितता डराती है
Growthvine Capital के को-फाउंडर और CFA शुभम गुप्ता कहते हैं कि बाजार युद्ध से कम और अनिश्चितता से ज्यादा डरता है। 2003 में इराक पर हमला और 2022 का रूस-यूक्रेन युद्ध इसका उदाहरण हैं।
उन्होंने कहा कि पहले तेल और सोने जैसे सुरक्षित एसेट की कीमतें उछलती हैं। फिर निवेशक डरकर शेयर बेचते हैं और इक्विटी गिरती है। लेकिन जैसे ही तस्वीर साफ होती है, बाजार अक्सर तेजी से संभल भी जाता है। अक्सर बाजार की बड़ी हलचल घटनाओं से पहले होती है, न कि उनके दौरान।
Fortuna Asset Managers के पार्टनर आशीष आनंद के मुताबिक, युद्ध जैसे हालात में कच्चे तेल, धातु और निर्यात से जुड़े सेक्टर ज्यादा प्रभावित होते हैं। तेल महंगा होता है तो कंपनियों की लागत बढ़ती है। इससे मुनाफा और शेयर कीमत दोनों पर दबाव आता है।
हालांकि वे कहते हैं कि फिलहाल वैश्विक तेल सप्लाई मजबूत है। रणनीतिक भंडार और उत्पादन क्षमता बड़े उछाल को रोक सकते हैं, जब तक कि संघर्ष लंबा न चले।
विदेशी और घरेलू निवेशकों का रुख
तनाव के समय विदेशी निवेशक अक्सर बिकवाली करते हैं। इससे बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ता है। लेकिन घरेलू निवेशक, खासकर म्यूचुअल फंड और SIP के जरिए निवेश करने वाले, बाजार को सहारा देते हैं।
SIP जारी रखना ऐसे समय में मददगार होता है। इससे आप गिरावट में भी निवेश करते रहते हैं और लंबी अवधि में औसत लागत कम होती है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए
एक्सपर्ट की सलाह साफ है कि निवेशकों को जल्दबाजी नहीं करना चाहिए। उन्हें कोई भी फैसला सोच-समझकर लेना चाहिए।
हेडलाइंस नहीं, फंडामेंटल देखें
शुभम गुप्ता का कहना है कि स्थिति स्पष्ट होते ही बाजार स्थिर हो जाते हैं। ऐसे में कोई भी जल्दबाजी नुकसान पहुंचा सकती है। इसमें आशीष आनंद जोड़ते हैं कि संपत्ति अनुशासन से बनती है, रिएक्शन से नहीं। निवेश में धैर्य सबसे बड़ी ताकत है।
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