Share Market Crash: शेयर बाजार इन 4 कारणों से दहला; सेंसेक्स 1600 अंक टूटा, निफ्टी ने लगाया 2% का गोता

Share Market Crash: भारतीय शेयर बाजारों में आज 2 मार्च को भारी गिरावट देखने को मिली। कारोबार के दौरान, सेंसेक्स करीब 1600 अंकों से भी अधिक क्रैश कर गया। वहीं निफ्टी भी 500 अंकों से अधिक का गोता लगाकर 24,700 के भी नीचे चला गया। पश्चिम एशिया में जंग तेज होने और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का सीधा असर बाजार के मनोबल पर देखने को मिली

अपडेटेड Mar 02, 2026 पर 4:34 PM
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Share Market Crash: कच्चे तेल की कीमतों में सोमवार को 7% से अधिक की तेजी आई

Share Market Crash: भारतीय शेयर बाजारों में आज 2 मार्च को भारी गिरावट देखने को मिली। कारोबार के दौरान, सेंसेक्स करीब 1600 अंकों से भी अधिक क्रैश कर गया। वहीं निफ्टी भी 500 अंकों से अधिक का गोता लगाकर 24,700 के भी नीचे चला गया। पश्चिम एशिया में जंग तेज होने और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का सीधा असर बाजार के मनोबल पर देखने को मिली। बाजार में चौतरफा गिरावट देखने को मिली। मेटल सेक्टर को छोड़कर लगभग सभी प्रमुख सेक्टर लाल निशान में रहे। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी 0.8% तक गिर गए।

कारोबार के अंत में, सेंसेक्स 1,048 अंक या 1.29 फीसदी गिरकर 80,238.85 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 313 पॉइंट या 1.24 फीसदी लुढ़ककर 24,900 के नीचे चला गया और 24,865.70 के स्तर पर बंद हुआ।

शेयर बाजार में आज की इस गिरावट के पीछे 4 बड़े कारण रहे-


1. कमजोर ग्लोबल संकेत और युद्ध का असर

इजराइल और अमेरिका की ओर से ईरान पर हवाई हमलों के बाद पश्चिम एशिया में हालात बिगड़ गए हैं। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई। इसके जवाब में ईरान ने पूरे इलाके में मिसाइल हमले किए। इससे आसपास के देशों में भी इस लड़ाई में खिंच जाने का खतरा बढ़ गया है।

कच्चे तेल की कीमतों में सोमवार को 7% से अधिक की तेजी आई। ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 82.40 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जो इसके पिछले 14 महीनों का उच्चतम स्तर है। इससे शेयर बाजारों को झटका लगा और ग्लोबल इकॉनमी के लिए अनिश्चितता और बढ़ गई।

कच्चे तेल की कीमत बढ़ने के कारण ऑयल मार्केटिंग कंपनियों, पेंट और टायर बनाने वाली कंपनियों, एविएशन कंपनियों और केमिकल कंपनियों के शेयर गिर गए।

ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री आवाजाही बंद करने की घोषणा की। इस जलमार्ग से ग्लोबल क्रूड ऑयल की सप्लाई लगभग 20% और भारत के 40% से अधिक कच्चे तेल का आयात होता है। इस मार्ग के बंद होने से एनर्जी सप्लाई और महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

2. रुपया कमजोर, बॉन्ड यील्ड में उछाल

युद्ध की आहट के बीच भारतीय रुपया भी सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ, जबकि सरकारी बॉन्ड यील्ड में तेजी आई। दूसरी एशियाई करेंसी भी 0.2% से 0.6% तक गिर गई और MSCI एशिया-पैसिफिक इंडेक्स 1.5% तक फिसल गया। डॉलर इंडेक्स 97.9 पर रहा।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रेडर्स को उम्मीद है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) रुपया को रिकॉर्ड निचले स्तर 91.9875 के करीब जाने से रोकने के लिए हस्तक्षेप कर सकता है।

3. विदेशी निवेशकों की बिकवाली

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली भी शेयर बाजार में गिरावट के पीछे एक अहम कारण रही। विदेशी निवेशकों ने 27 फरवरी को ₹7,536.4 करोड़ के शेयर बेचे। हालांकि दूसरी घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने ₹12,292.8 करोड़ की खरीदारी की, जिससे बाजार को कुछ सपोर्ट मिला।

जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटजिस्ट्स वीके विजयकुमार ने कहा कि मिडिल-ईस्ट संघर्ष ने बाजार में जोखिम की भावना बढ़ा दी है। विदेशी निवेशक फिलहाल उभरते बाजारों में नए निवेश से पहले हालात पर नजर रख सकते हैं।

4. VIX में तेज उछाल

शेयर बाजार में अस्थिरता का संकेत देने वाला वोलैटिलिटी इंडेक्स, India VIX सोमवार को 15% से अधिक उछलकर 15.78 पर पहुंच गया। यह इंडेक्स निवेशकों में बढ़ती घबराहट को दिखाता है।

एक्सपर्ट्स का क्या है कहना?

जियोजित इनवेस्टमेंट्स के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट, वीके विजयकुमार ने बताया, "वेस्ट एशिया में चल रहे युद्ध से जुड़ी अनिश्चितता का असर आने वाले समय में बाजार पर बना रहेगा। बाजार के लिए सबसे बड़ा खतरा कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में बढ़ोतरी है। अगर क्रूड ऑयल की कीमत लगभग 20% तक तेजी से बढ़ती है, तो इसकी बड़ी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना हो सकती है। इससे क्रूड की सप्लाई बाधित होगी। फिलहाल इसे लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अगर ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 76 डॉलर के आसपास रहती है, तो शेयर बाजार कमजोर रह सकता है, लेकिन बड़ी गिरावट या क्रैश की संभावना कम है।"

उनका कहना है कि अनुभव बताता है कि किसी भी संकट के समय घबराकर शेयर बेचना गलत रणनीति होती है। निवेशकों को जल्दबाजी में बिक्री करने से बचना चाहिए और देखना चाहिए कि हालात आगे कैसे बदलते हैं।

उन्होंने कहा, "पिछले कई दशकों के आंकड़े बताते हैं कि ऐसे संकटों का असर बाजार पर लंबे समय तक नहीं रहता। आम तौर पर छह महीने बाद बाजार पर इनका खास प्रभाव नहीं दिखता। कोविड संकट, रूस-यूक्रेन जंग और गाजा संघर्ष जैसे हाल के संकटों के बाद भी बाजार ने यही रुख दिखाया है। माना जा रहा है कि मौजूदा वेस्ट एशिया संकट भी अलग नहीं होगा। हालांकि, युद्ध के दौरान अचानक और अप्रत्याशित घटनाएं हो सकती हैं, इसलिए निवेशकों को सावधान रहना चाहिए। अगर बाजार में कमजोरी आती है, तो इसे मौके के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। धीरे-धीरे अच्छे और मजबूत कंपनियों के शेयर खरीद सकते हैं, खासकर घरेलू खपत से जुड़े सेक्टर जैसे बैंकिंग, ऑटोमोबाइल, कैपिटल गुड्स और डिफेंस।"

ब्रिकवर्क रेटिंग्स के हेड (क्राइटेरिया, मॉडल डेवलपमेंट और रिसर्च), राजीव शरण ने बताया, "भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अगर ब्रेंट क्रूड की कीमतें लंबे समय तक बढ़ी रहती हैं, तो इसका सीधा असर देश पर पड़ता है। तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ती हैं, महंगाई बढ़ती है और देश का चालू खाता घाटा भी ज्यादा हो जाता है।"

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