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Damani Portfolio: इंडिया सीमेंट्स के शेयर बेचकर राधाकिशन दमानी ने कमाए करोड़ों; मुनाफा और तगड़ा होता, अगर...

Damani Portfolio: अल्ट्राटेक सीमेंट की मेजॉरिटी हिस्सेदारी अब इंडिया सीमेंट्स की होने वाली है यानी अब जल्द ही इंडिया सीमेंट्स पर अल्ट्राटेक का नियंत्रण हो जाएगा। अल्ट्राटेक ने जून में दिग्गज निवेश राधाकिशन दमानी और उनसे जुड़ी एंटिटीज से 22.77 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी थी और अब यह 32.72 फीसदी अतिरिक्त हिस्सेदारी खरीद रही है। अब बात करें राधाकिशन दमानी और उनसे जुड़े एंटिटीज की तो उन्होंने जब अपनी होल्डिंग बेची, उस समय निवेश करीब तीन गुना हो चुका था

Edited By: Moneycontrol Newsअपडेटेड Aug 01, 2024 पर 9:12 AM
Damani Portfolio: इंडिया सीमेंट्स के शेयर बेचकर राधाकिशन दमानी ने कमाए करोड़ों; मुनाफा और तगड़ा होता, अगर...
अल्ट्राटेक सीमेंट ने हाल ही में इंडिया सीमेंट्स के प्रमोटर्स से शेयर खरीदे। दमानी लंबे समय से इंडिया सीमेंट्स में शेयरहोल्डर्स रहे हैं।

Damani Portfolio: अल्ट्राटेक सीमेंट की मेजॉरिटी हिस्सेदारी अब इंडिया सीमेंट्स की होने वाली है यानी अब जल्द ही इंडिया सीमेंट्स पर अल्ट्राटेक का नियंत्रण हो जाएगा। अल्ट्राटेक ने जून में दिग्गज निवेश राधाकिशन दमानी और उनसे जुड़ी एंटिटीज से 22.77 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी थी और अब यह 32.72 फीसदी अतिरिक्त हिस्सेदारी खरीद रही है। अब बात करें राधाकिशन दमानी और उनसे जुड़े एंटिटीज की तो उन्होंने जब अपनी होल्डिंग बेची, उस समय निवेश करीब तीन गुना हो चुका था। राधाकिशन दमानी और उनसे जुड़ी एंटिटीज इंडिया सीमेंट्स में समय-समय पर अपनी हिस्सेदारी बढ़ाते रहे और उन्होंने करीब 600-700 करोड़ रुपये की खरीदारी की थी। अब 27 जून 2024 को उन्होंने 1889 करोड़ रुपये में यह हिस्सेदारी बेची।

Radhakishan Damani को होता और फायदा, अगर...

अल्ट्राटेक सीमेंट ने हाल ही में इंडिया सीमेंट्स के प्रमोटर्स से शेयर खरीदे। दमानी लंबे समय से इंडिया सीमेंट्स में शेयरहोल्डर्स रहे हैं। उनके पोर्टफोलियो में यह 2015 से ही है। तब से वह समय-समय पर अपनी हिस्सेदारी बढ़ाते रहे हैं। हालांकि बीचे में कुछ समय उन्होंने अपनी हिस्सेदारी हल्की थी थी। 2015 से 2019 के बीच उन्होंने अपनी हिस्सेदारी करीब 2.4 फीसदी से कम करके 1 फीसदी कर दी थी। मार्च 2024 के शेयरहोल्डिंग पैटर्न के हिसाब से दमानी और उनके भाई के पास इंडिया सीमेंट्स की 21 फीसदी के करीब हिस्सेदारी थी और कुछ शेयर इनवेस्टमेंट कंपनियों के जरिए थे।

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