RBI के फैसले से मार्केट को राहत! 1 अप्रैल से लागू होने वाले नियम टल गए 1 जुलाई तक

केंद्रीय बैंक RBI ने कैपिटल मार्केट से जुड़े नियमों में बदलाव को लागू करने की टाइमलाइन आगे खिसका दी है। अब ये नियम 1 अप्रैल की बजाय 1 जुलाई से लागू होंगे। वैसे इंडस्ट्री ने छह महीने तक इसे टालने का अनुरोध किया था। जानिए आरबीआई ने क्या बदलाव किया है और इसका मार्केट पर क्या असर पड़ेगा

अपडेटेड Mar 31, 2026 पर 1:13 PM
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सोमवार को बैंकों के पूंजी बाजार में एक्सपोजर से जुड़े नए नियमों के लागू होने की तारीख को 1 जुलाई तक टाल दिया। साथ ही ब्रोकर्स ने कुछ आपत्तियां जताई थी जिसे ध्यान में रखते हुए कुछ शर्तों में ढील भी दी गई है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सोमवार को बैंकों के पूंजी बाजार में एक्सपोजर से जुड़े नए नियमों के लागू होने की तारीख को 1 जुलाई तक टाल दिया। साथ ही ब्रोकर्स ने कुछ आपत्तियां जताई थी जिसे ध्यान में रखते हुए कुछ शर्तों में ढील भी दी गई है। हालांकि ध्यान दें कि प्रमुख प्रस्तावों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ऐसे में ब्रोकर्स अब 1 जुलाई तक 50% मार्जिन के जरिए बैंक गारंटी का इस्तेमाल जारी रख सकते हैं। इसके अलावा RBI ने स्टॉक एक्सचेंज क्लियरिंग कॉरपोरेशनों को पेमेंट से जुड़ी सर्विसेज देने वाले बैंकों के लिए कैपिटल एडेकेसी मानकों में भी ढील दी है, जिसके तहत उस एक्सपोजर को सीमित किया गया है जिस पर पूंजी रखना आवश्यक होगा।

RBI ने किए कुछ बदलाव भी

आरबीआई ने कैपिटल मार्केट से जुड़े नियमों में बदलाव के निर्देश फरवरी में जारी किए थे और ये 1 अप्रैल से लागू होने वाले थे लेकिन अब इसे 1 जुलाई तक के लिए टाल दिया है। इंडस्ट्री ने छह महीने तक के लिए इसे टालने का अनुरोध किया था। अब इंडस्ट्री से मिले फीडबैक के बाद आरबीआई ने इनमें कुछ बदलाव भी किए हैं। कैपिटल मार्केट इंटरमीडिएट्स को दिए जाने वाले कर्ज से जुड़े नियमों को आसान किया गया है, जिससे 100% कैश या कैश इक्विवैलेंट के आधार पर फंडिंग की मंजूरी मिल गई है। आरबीआई ने उन सिक्योरिटीज के खिलाफ मार्केट मेकर्स को फाइनेंस देने पर लगी पाबंदियां भी हटा दी हैं, जिनमें वे काम करते हैं।


नए नियमों से प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग फर्मों के लिए पूंजी जुटाना महंगा पड़ सकता है और मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है। भारतीय बैंक ट्रेडिशनल रूप से प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग को सीधे फंडिंग नहीं देते हैं, लेकिन आरबीआई के नए निर्देशों से उस खामी को दूर किया गया है जिसके तहत बैंकों से लिए शॉर्ट टर्म वर्किंग कैपिटल लोन को ब्रोकर्स की तरफ से ट्रेडिंग के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा आरबीआई ने M&A (मर्जर एंड एक्विजिशन) को शामिल करने के लिए एक्विजिशन फाइनेंस की परिभाषा में बदलाव किया है। इस बदलाव से पहले बैंक अधिग्रहण के लिए फंडिंग नहीं कर सकते थे जिससे विदेशी बैंकों और इंवेस्टमेंट फंड्स की तुलना में घाटे में थे। हालांकि इसे सिर्फ नॉन-फाइनेंशियल टारगेट कंपनी पर नियंत्रण हासिल करने के लिए दिया जा सकता है।

नए नियमों के तहत बैंकिंग सिस्टम में सिक्योरिटीज गिरवी रखकर कितना लोन लिया जा सकेगा, इसकी लिमिट तय की गई है। इसके तहत प्रति व्यक्ति ₹10 लाख और आईपीओ से जुड़े लोन के लिए ₹25 लाख की सीमा तय की गई है। साथ ही बॉरोअर्स को एक से अधिक लेंडर्स से इन लिमिट्स का फायदा उठाने से भी रोका जाएगा।

क्या कहना है मार्केट एनालिस्ट्स का?

आनंद राठी शेयर एंड ब्रोकर्स के इन्वेस्टमेंट सर्विसेज के सीईओ रूप भूटरा (Roop Bhootra) ने कहा कि आरबीआई ने टाइमलाइन बढ़ाकर बड़ी राहत दी है लेकिन इंट्रा-डे फंडिंग के नियम जैसे प्रमुख प्रस्तावों को लेकर कोई राहत नहीं दी गई है, जिसकी ब्रोकिंग इंडस्ट्री मांग कर रही थी। DRChoksey FinServ के एमडी देवेन चोकसी के मुताबिक ईरान और अमेरिका के बीच लड़ाई के चलते मार्केट में पहले से ही काफी वोलैटिलिटी है और ऐसे में नियमों को टालना एक अच्छा कदम है। देवेन के मुताबिक इससे बाजार में घबराहट कम हो सकती है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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