No jobs in Unilever: डव (Dove) साबुन बनाने वाली यूनीलीवर में अब तीन महीने तक किसी को जॉब नहीं मिलेगी। कंपनी ने यह रोक जूनियर से लेकर सीनियर लेवल तक यानी हर लेवल पर लाई है। न्यूज एजेंसी रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी का कहना है कि पश्चिमी एशिया में चल रही जंग के चलते तत्काल प्रभाव से कम से कम तीन महीने के लिए दुनिया भर में यह हायरिंग पर रोक लगा रही है। कंपनी ने इससे जुड़ा मेमो अपने स्टॉफ को पिछले हफ्ते भेजा था। यूनीलीवर के शेयरों की बात करें तो सोमवार को लंदन स्टॉक मार्केट में यह 1.1% मजबूत हुआ।
US-Iran War के चलते Unilever को रोकनी पड़ी हायरिंग
अमेरिका और ईरान के बीच चल रही लड़ाई के चलते दुनिया भर की कंपनियां, एयरलाइंस से लेकर रिटेल तक, खुद को बचाने के लिए कदम उठा रही हैं। इस लड़ाई के चलते वैश्विक कारोबार प्रभावित हुआ है। इसने तेल और गैस की सप्लाई में अब तक की सबसे बड़ी रुकावट पैदा की है। एनर्जी कॉस्ट में तेज उछाल अब अन्य बाजारों में भी दिखाई दे रही है, जिससे केमिकल और प्लास्टिक जैसी इंडस्ट्रीज में उत्पादन धीमा हो रहा है।
यूनीलीवर के पर्सनल केयर बिजनेस के प्रमुथ फेबियन ग्रेसिया (Fabian Garcia) का कहना है कि मैक्रो इकनॉमिक और जियोपॉलिटिकल वास्तविकताओं खासतौर से मिडिल ईस्ट की लड़ाई ने आने वाले कुछ महीनों के लिए कुछ बड़ी चुनौतियां पेश की हैं। फेबियन ने आगे कहा कि इसे देखते हुए यूनीलीवर की लीडरशिप एग्जीक्यूटिव टीम सभी लेवल पर अपने वैश्विक हायरिंग को फ्रीज करने पर राजी हुई है जोकि तत्काल प्रभाव से कम से कम तीन महीने के लिए लागू है।
लंदन की कंज्यूमर प्रोडक्ट्स कंपनी यूनीलीवर का कारोबार दुनिया भर में फैला हुआ और यह कई मशहूर ब्रांड्स की मालकिन है। यह अधिकतर प्रोडक्ट्स वहीं बनाती है, जहां इसकी बिक्री करती है लेकिन यह केमिकल, फूड, पैकेजिंग और अन्य कच्चा माल खरीदती है जिसके लिए काफी एनर्जी लगती है और इसकी लागत इस समय आसमान छू रही है।
यूनीलीवर पहले से ही कर रही खर्चों में कटौती
वैश्विक हायरिंग रोकने का यह फैसला यूनीलीवर ने तो अभी किया है लेकिन खर्चों में कटौती की पहल तो इसने पहले से ही शुरू किया है। वर्ष 2024 में इसने तीन साल में 80 करोड़ यूरो ($91.67 करोड़) बचाने की मुहिम शुरू की। इसके तहत कंपनी ने जो प्रस्ताव पेश किए, उससे दुनिया भर में करीब 7500 जॉब्स पर असर पड़ने के आसार जताए गए जिसमें से अधिकतर ऑफिस वाली जॉब्स है। अभी इसके 96 हजार एंप्लॉयीज हैं जबकि वर्ष 2020 में इसके करीब 1.49 लाख एंप्लॉयीज थे।