RBI MPC Meet June 2026: रेपो रेट पर इस बार क्या रहेगा रुख? कब, कहां और कैसे देखें फैसले

RBI MPC Meet June 2026: विशेषज्ञों का मानना है कि एक बार फिर प्रमुख ब्याज दरें जस की तस रह सकती हैं। ऊर्जा कीमतों में उछाल, सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियों और रुपये में गिरावट से RBI महंगाई के अनुमान को बढ़ा सकता है, GDP ग्रोथ के अनुमान को घटा सकता है

अपडेटेड Jun 04, 2026 पर 10:28 AM
RBI MPC की मीटिंग हर 2 महीने पर होती है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की जून महीने की मीटिंग 3 जून से शुरू हो गई है। फैसलों की घोषणा 5 जून को RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा करेंगे। देश में अभी रेपो रेट 5.25 प्रतिशत है। अप्रैल महीने की मीटिंग में इसे जस का तस छोड़ा गया था। माना जा रहा है कि इस बार भी पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण महंगाई और आर्थिक वृद्धि को लेकर पैदा हुई चुनौतियों को देखते हुए केंद्रीय बैंक रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रख सकता है। MPC की मीटिंग हर 2 महीने पर होती है।

किस वक्त सामने आएंगे फैसले

जून महीने की मीटिंग के फैसलों की घोषणा 5 जून को सुबह 10 बजे की जाएगी। बाद में दिन में RBI गवर्नर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे।


कहां देख सकते हैं फैसले

घोषणाओं और उसके बाद होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस का सीधा प्रसारण RBI के YouTube चैनल पर किया जाएगा। दर्शक अपडेट्स के लिए RBI के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स को भी फॉलो कर सकते हैं। मनीकंट्रोल हिंदी भी रियल-टाइम कवरेज और मुख्य बातों की जानकारी देने के लिए एक लाइव ब्लॉग चलाएगा।

RBI MPC जून मीटिंग पर विशेषज्ञों के क्या हैं अनुमान

विशेषज्ञों का कहना है कि ऊर्जा कीमतों में उछाल है, सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियां बरकरार हैं और रुपये में गिरावट है। ऐसे में आरबीआई महंगाई के अपने अनुमान को बढ़ा सकता है और सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के वृद्धि दर के अनुमान को घटा सकता है। यस बैंक की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि युद्ध की स्थिति में कुछ सुधार के बावजूद नीतिगत चुनौतियां बनी हुई हैं और अर्थव्यवस्था अब भी आपूर्ति संबंधी झटकों के प्रति संवेदनशील है।

थोक महंगाई का असर अब खुदरा महंगाई पर दिखना शुरू हो गया है। जून में दरों और नीतिगत रुख में बदलाव की संभावना बहुत कम है। IDFC फर्स्ट बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री गौरासेन गुप्ता का मानना है कि महंगाई RBI के लक्ष्य दायरे में बनी हुई है, इसलिए केंद्रीय बैंक फिलहाल विराम की नीति जारी रख सकता है। बढ़ती लागत के कारण आर्थिक वृद्धि पर दबाव का जोखिम बना हुआ है।

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के आर्थिक शोध विभाग की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा अस्थिर परिस्थितियों को देखते हुए जून की मौद्रिक नीति में यथास्थिति बरकरार रहने की संभावना है। खुदरा महंगाई अगली 3 तिमाहियों में 5 प्रतिशत से ऊपर रह सकती है, जबकि चालू तिमाही यानि कि अप्रैल-जून 2026 में इसके 4 से 4.1 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है। रिपोर्ट में जनवरी-मार्च 2027 तिमाही में रियल जीडीपी ग्रोथ 7.2 प्रतिशत और पूरे वित्त वर्ष में 7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है।

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने भी अगले सप्ताह रेपो रेट या नीतिगत रुख में किसी बदलाव की संभावना से इनकार किया। क्रिसिल की प्रधान अर्थशास्त्री दीप्ति देशपांडे का मानना है कि आरबीआई के रेपो रेट को अपरिवर्तित रखने और पॉलिसी पर न्यूट्रल रुख बरकरार रखने की संभावना है। वर्तमान में महंगाई का दबाव मुख्य रूप से सप्लाई साइड से जुड़ा है, जिसमें ऊंची ईंधन लागत, कच्चे माल की बढ़ी कीमतें और कमजोर रुपया शामिल हैं।

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