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Short Call: आरबीआई की पॉलिसी के बाद कैसी होनी चाहिए मार्केट स्ट्रेटेजी, Zen Tech और Newgen Software क्यों सुर्खियों में हैं?

RBI की मॉनेटरी पॉलिसी से यह साफ हो गया है कि इकोनॉमिक ग्रोथ सुस्त पड़ी है और इनफ्लेशन का दबाव बढ़ा है। केंद्रीय बैंक और सरकार के सामने ग्रोथ की रफ्तार बढ़ाने की चुनौती है। फिलहाल, आरबीआई ने सीआरआर घटाकर बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी बढ़ाने की कोशिश की है

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 09, 2024 पर 11:01 AM
Short Call: आरबीआई की पॉलिसी के बाद कैसी होनी चाहिए मार्केट स्ट्रेटेजी, Zen Tech और Newgen Software क्यों सुर्खियों में हैं?
RBI ने FY25 के लिए जीडीपी ग्रोथ के अनुमान में कमी कर दी। इनफ्लेशन के अपने अनुमान को बढ़ा दिया।

आरबीआई के लिए फिर से मुश्किल बढ़ गई है। इकोनॉमिक ग्रोथ में सुस्ती है, इनफ्लेशन बढ़ा है और वैश्विक स्थितियां चुनौतीपूर्ण दिख रहा है। केंद्रीय बैंक ने 6 दिसंबर को इन स्थितियों को ध्यान में रख अपनी मॉनेटरी पॉलिसी पेश की। इंटरेस्ट रेट में लगातार 11वीं बार कोई बदलाव नहीं किया। कैश रिजर्व रेशियो (सीआरआर) 50 बेसिस प्वाइंट्स घटाने का ऐलान किया। सीआरआर 50 बेसिस प्वाइंट्स घटने से बैंकिंग सिस्टम में 1.2 लाख करोड़ रुपये आ जाएंगे। इससे लिक्विडिटी बढ़ेगी। केंद्रीय बैंक ने बैंकों को एफसीएनआर अकाउंट्स के जरिए भी पैसे जुटाने को कहा है। इससे बैकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी बढ़ेगी।

सुस्त पड़ती ग्रोथ और बढ़ते इनफ्लेशन से चिंता

RBI ने FY25 के लिए जीडीपी ग्रोथ (GDP Growth) के अनुमान में कमी कर दी। इनफ्लेशन (Inflation) के अपने अनुमान को बढ़ा दिया। इनफ्लेशन खासकर बढ़ते फूड इनफ्लेशन ने आम आदमी की मुश्किल बढ़ाई है। इससे कंजम्प्शन घटा और प्राइवेट इनवेस्टमेंट में कमी आई है। यह इकोनॉमी की ग्रोथ के लिहाज से ठीक नहीं है। लेकिन, आरबीआई और सरकार की नजरें इस पर है। आरबीआई का फोकस इनफ्लेशन को काबू में करने पर है। उधर, सरकार का प्लान पूंजीगत खर्च बढ़ाकर इकोनॉमी की रफ्तार तेज करने का है। इस बीच, स्टॉक मार्केट्स (Stock Markets) में कंसॉलिडेशन जारी रहने की उम्मीद है। इनवेस्टर्स गिरावट के मौके का इस्तेमाल निवेश के लिए कर सकते हैं। फिलहाल एक बार में ज्यादा निवेश नहीं करना ठीक रहेगा।

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