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2023 के अंत तक अमेरिका में आ सकती है मंदी, महंगे भारतीय बाजार में कंसोलीडेशन मुमकिन : एंटिक रिसर्च

एंटिक रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट में भारतीय बाजार पर भी अपनी राय दी है। उसका कहना है कि भारतीय इक्विटी में हाई वैल्यूएशन पर ट्रेडिंग हो रही है। जिसके चलते आगे बाजार में कंसोलीडेशन देखने को मिल सकता है। इस कंसोलीडेश में महंगे वैल्यूएशन के अलावा कई दूसरे फैक्टर्स का भी योगदान होगा। इनमें घरेलू अर्थव्यवस्था में मंदी, कुछ हद तक उम्मीद से कमजोर कॉर्पोरेट आय जैसे फैक्टर शामिल हैं

Edited By: Sudhanshu Dubeyअपडेटेड May 30, 2023 पर 3:28 PM
2023 के अंत तक अमेरिका में आ सकती है मंदी, महंगे भारतीय बाजार में कंसोलीडेशन मुमकिन : एंटिक रिसर्च
एंटिक रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में मार्च तिमाही का नतीजों का मौसम समाप्ति की ओर है। दुर्भाग्य से इस अवधि के नतीजे कुछ हद तक निराशाजनक रहे हैं

अमेरिका में हाल में आए मैक्रोइकोनॉमिक डेटा को देखते हुए यूएसफेड को 2023 के लिए अपने रेट आउटलुक में एक अहम संशोधन करना पड़ा है। इन आंकड़ों के बाद जून या जुलाई की नीति बैठक में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी की उम्मीद बढ़ गई है। एंटिक रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबित यूएस फेड के इस संशोधित पूर्वानुमान में 2023 के अंतिम भाग में अमेरिका में आने वाली संभावित मंदी के बारे में भी चिंता जताई गई है

अमेरिका में ब्याज दरों बढ़ोतरी जारी रहने की उम्मीद

अमेरिका में अप्रैल के पीसीई डिफ्लेटर आंकड़े (PCE deflator reading) उम्मीद से अधिक रहे हैं। इनसे अमेरिकी इकोनॉमी पर महंगाई की ऊंची दर से बन रहे दबावों का संकेत मिलता है। इसके अलावा देश में मांग में कायम मजबूती, उम्मीद से ज्यादा हो रहे व्यक्तिगत खर्च, कैपिटल गुड्स के ऑर्डर और सर्विसेज पीएमआई के आंकड़ों से भी इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि 2023 में यूएस फेड की दरों में बढ़त जारी रहेगी। एंटिक रिसर्च की इस रिपोर्ट में इस बात का भी अनुमान लगाया गया है कि जून-जुलाई के नीति बैठक में यूएस फेड में अपनी ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी करता नजर आ सकता है।

गौरतलब है कि यूएस फेड के अधिकारी जून की मीटिंग में ब्याज दरों में बढ़ोतरी के विराम लगाने के पक्ष में नजर आ रहे हैं। आर्थिक स्थिति की अनिश्चितता को देखते हुए यह निर्णय लिया जा सकता है कि हालांकि यूएस फेड की तरफ से इस तरह के सकेत मिले हैं कि वो अभी बढ़ती महंगाई के खिलाफ अपनी लड़ाई को बंद करने के मूड में नहीं हैं। 2-3 मई को हुई बैठक के दौरान पॉलिसी मेकरों ने इस बात को लेकर अनिश्चतता व्यक्त की अभी दरों में इतनी बढ़ोतरी की जा सकती है। हालांकि उन्होंने ये कहा कि महंगाई से लड़ने के लिए चालू लड़ाई की प्रगति उम्मीद से कम रही है। उन्होंने यह चिंता भी जताई थी कि हाल के बैंकिंग संकट के कारण क्रेडिट से जुड़ी दिक्कतें पैदा हो सकती हैं।

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