Redington Share Price : गुरुवार के कारोबार में रेडिंगटन के शेयरों में 5 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त देखने को मिली है। यह बढ़त उन खबरों के बाद देखने को मिली जिनमें कहा गया है कि Apple मेमोरी और स्टोरेज चिप की तेजी से बढ़ती लागत की भरपाई के लिए अपने कुछ प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ा सकता है। फिलहाल, 12 बजे के आसपास NSE पर यह शेयर 14.01 रुपए यानी 5.63 फीसदी की बढ़त के साथ 265 रुपए के आसपास दिख रहा था। रेडिंगटन के Apple के साथ करीबी कारोबारी रिश्ते हैं, इसके चलते ही स्टॉक में तेजी आई है।
यह कंपनी भारत,मिडिल ईस्ट और अफ्रीका(MEA)में Apple के मेन ऑथराइज्ड नेशनल सप्लाई चेन और डिस्ट्रीब्यूशन पार्टनर्स में से एक है। इसके मोबिलिटी सेगमेंट के रेवेन्यू में Apple प्रोडक्ट्स का बड़ा हिस्सा है।
Apple के CEO टिम कुक ने 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' से हुई बातचीत में बताया कि कंपनी को प्रोडक्ट्स के उत्पादन के लिए जरूरी पार्ट्स की लागत बढ़ने के कारण कीमतें बढ़ाना जरूरी हो सकता है। कुक के अनुसार,डेटा सेंटर्स के लिए AI-आधारित मांग में तेजी आने से मेमोरी और स्टोरेज चिप्स के लिए कॉम्पिटिशन बढ़ गया है,जिससे पूरी सप्लाई चेन में कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है।
उन्होंने आगे कहा कि Apple ने बढ़ी हुई लागत का बोझ खुद उठाने की कोशिश की है,लेकिन हालात लगातार मुश्किल होते जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि मेमोरी सप्लायर्स कीमतें काफी तेजी से बढ़ा रहे हैं क्योंकि ज्यादातर कैपेसिटी AI सर्वर में इस्तेमाल होने वाली हाई-बैंडविड्थ मेमोरी की ओर लगाई जा रही है। कुक ने कीमतों में संभावित बढ़ोतरी के समय या उसकी मात्रा के बारे में कोई जानकारी नहीं दी और न ही यह बताया कि किन प्रोडक्ट्स पर इसका असर पड़ेगा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक,कंपनी इस साल के आखिर में iPhone 18 Pro और Pro Max के साथ अपना पहला फोल्डेबल iPhone भी लॉन्च कर सकती है। DRAM और NAND चिप्स सप्लाई पर भी दबाव है। डिमांड बढ़ने से कंपोनेंट कॉस्ट तेजी से बढ़ रही है। Apple अब तक बढ़ी लागत खुद ही उठा रहा था। कंपनी के मुताबिक यह मॉडल अब टिकाऊ नहीं है। कीमतों में बढ़ोतरी टालना अब मुश्किल हो गया है। iPhone, MacBook और iPad महंगे हो सकते हैं।
गौरतलब है कि रेडिंगटन की कमाई में Apple का बड़ा योगदान है। अगर कीमतों में यह बढ़त होती है कि कंपनी की Apple से होने वाली तिमाही कमाई 30% से बढ़कर 33% हो सकती है। Apple प्रोडक्ट महंगे हुए तो कंपनी को फायदा। इस कंपनी के डिमांड और मार्जिन पर असर दिख सकता है।