रिलायंस का क्लीन एनर्जी पर बड़ा दांव, एडवांस स्टेज में पहुंची बैटरी गीगा फैक्ट्री

रिलायंस अब तेल और टेलीकॉम से आगे ग्रीन एनर्जी में बड़ा साम्राज्य खड़ा करने की तैयारी में है। बैटरी गीगा फैक्ट्री से लेकर ग्रीन हाइड्रोजन, सोलर और क्लीन फ्यूल तक कंपनी ने ऐसा रोडमैप पेश किया है, जो भारत की ऊर्जा तस्वीर बदल सकता है। जानिए डिटेल।

अपडेटेड May 28, 2026 पर 6:59 PM
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रिलायंस अपने सोलर मैन्युफैक्चरिंग और रिन्यूएबल एनर्जी कारोबार का भी तेजी से विस्तार कर रही है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) अब तेजी से क्लीन एनर्जी कारोबार को बढ़ाने में जुटी है। कंपनी ने बैटरी मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन हाइड्रोजन, ग्रीन अमोनिया और बड़े रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स को लेकर बड़ा रोडमैप पेश किया है।

FY26 की एनुअल रिपोर्ट में कंपनी ने बताया कि वह आने वाले वर्षों में न्यू एनर्जी कारोबार को अपने सबसे बड़े ग्रोथ इंजन में बदलना चाहती है।

बैटरी फैक्ट्री का काम आखिरी चरण में


रिलायंस ने कहा कि उसका Battery Energy Storage System (BESS) गीगा फैक्ट्री प्रोजेक्ट अब कमीशनिंग के एडवांस स्टेज में पहुंच चुका है।

कंपनी के मुताबिक, 2026 की दूसरी छमाही से लिथियम आयरन फॉस्फेट (LFP) आधारित बैटरियों का उत्पादन तेजी से बढ़ाया जाएगा। इस फैक्ट्री की शुरुआती सालाना उत्पादन क्षमता 40 GWh होगी। आगे चलकर इसे बढ़ाकर 100 GWh तक ले जाने की योजना है।

जामनगर बनेगा बड़ा ग्रीन एनर्जी हब

रिलायंस का यह बैटरी प्रोजेक्ट जामनगर में बन रहे उसके विशाल ग्रीन एनर्जी कॉम्प्लेक्स का हिस्सा है। कंपनी इसे एक बड़े इंटीग्रेटेड क्लीन एनर्जी इकोसिस्टम के रूप में डेवलप कर रही है। इस प्रोजेक्ट में सोलर पैनल मैन्युफैक्चरिंग, एनर्जी स्टोरेज और ग्रीन फ्यूल्स जैसे कई कारोबार शामिल होंगे।

रिलायंस चेयरमैन मुकेश अंबानी ने शेयरधारकों को लिखे संदेश में कहा कि कंपनी सोलर PV मैन्युफैक्चरिंग, एनर्जी स्टोरेज और ग्रीन एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर में मजबूत क्षमताएं तैयार कर रही है। इसका मकसद भारत को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाना है।

ग्रीन हाइड्रोजन पर बड़ा फोकस

रिलायंस ने ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया कारोबार को लेकर भी नई टाइमलाइन साझा की है। कंपनी का लक्ष्य 2032 तक हर साल 30 लाख मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता तैयार करना है।

कंपनी ने बताया कि Samsung C&T के साथ हुए 15 साल के ग्रीन अमोनिया सप्लाई समझौते के तहत FY29 की दूसरी छमाही से सप्लाई शुरू होने की उम्मीद है।

रिलायंस का कहना है कि यह किसी भारतीय कंपनी की ओर से किए गए सबसे बड़े लॉन्ग टर्म ग्रीन अमोनिया सप्लाई समझौतों में से एक है। इससे साफ है कि कंपनी वैश्विक स्तर पर क्लीन फ्यूल एक्सपोर्ट कारोबार खड़ा करना चाहती है।

किन सेक्टर्स में होगा इस्तेमाल?

ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया को रिफाइनिंग, केमिकल, फर्टिलाइजर, शिपिंग और भारी उद्योग जैसे सेक्टर्स के लिए भविष्य का अहम ईंधन माना जा रहा है।

दुनिया भर में इन सेक्टर्स से कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए इन फ्यूल्स पर तेजी से काम हो रहा है।

सोलर कारोबार का भी बड़ा विस्तार

रिलायंस अपने सोलर मैन्युफैक्चरिंग और रिन्यूएबल एनर्जी कारोबार का भी तेजी से विस्तार कर रही है।

कंपनी ने कहा कि जामनगर का सोलर मैन्युफैक्चरिंग कॉम्प्लेक्स हर साल 10 GWp क्षमता तक पहुंचने की राह पर है। आगे इसे बढ़ाकर 20 GWp सालाना करने की योजना है। इसके अलावा कंपनी आंध्र प्रदेश में 6 GWp का बड़ा सोलर पावर प्रोजेक्ट भी डेवलप करने जा रही है।

कच्छ प्रोजेक्ट से बनेगा ग्रीन फ्यूल

रिलायंस ने बताया कि गुजरात के कच्छ में 5.5 लाख एकड़ में फैले उसके रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट से FY27 में बिजली उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। इस बिजली का इस्तेमाल कंपनी खुद करेगी और ग्रीन फ्यूल उत्पादन में भी किया जाएगा।

कंपनी का कहना है कि कच्छ प्रोजेक्ट उसके ग्रीन हाइड्रोजन प्लान का अहम आधार बनेगा। बड़े स्तर पर सस्ती रिन्यूएबल बिजली मिलने से हाइड्रोजन उत्पादन लागत कम करने में मदद मिलेगी।

पूरा इंटीग्रेटेड इकोसिस्टम बना रही रिलायंस

रिलायंस ने कहा कि उसका पूरा क्लीन एनर्जी निवेश एक ऐसे इंटीग्रेटेड सिस्टम पर आधारित है, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग, रिन्यूएबल पावर, एनर्जी स्टोरेज और ग्रीन फ्यूल उत्पादन सब एक साथ जुड़े होंगे।

कंपनी का फोकस सिर्फ बिजली बनाने पर नहीं, बल्कि पूरी ग्रीन एनर्जी वैल्यू चेन तैयार करने पर है।

Disclaimer: मनीकंट्रोल, नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।

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