Reliance Share Price: मार्केट में आज शुरुआती उठा-पटक बाद दिन भर सुस्ती छाई रही। घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) और निफ्टी 50 (Nifty 50) ग्रीन जोन में बंद हुए हैं। वहीं मार्केट कैप के हिसाब से देश की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस के शेयर दिन के शुरुआती तेजी के बाद मुनाफावसूली के चलते फिसल गए और दिन के आखिरी में गिरावट के साथ बंद हुए हैं। हालांकि एनालिस्ट्स का रिलायंस को लेकर जो रुझान है, उसके हिसाब से इस गिरावट को मौके के तौर पर देखना चाहिए। इसे ट्रैक करने वाले अधिकतर एनालिस्ट्स का रुझान बुलिश है। सबसे अधिक टारगेट प्राइस तो नुवामा ने दिया है जो मौजूदा लेवल से 25 फीसदी से अधिक अपसाइड है।
आज इसके शेयर दिन के आखिरी में 0.69 फीसदी की बढ़त के साथ 3019.75 रुपये के भाव पर बंद हुए हैं। दिन की शुरुआत में इसके शेयर 1.42 फीसदी की बढ़त के साथ 3083.95 रुपये पर खुले थे। इंट्रा-डे में यह 3006.95 रुपये के भाव तक आ गया था। पिछले साल 26 अक्टूबर 2023 को यह एक साल के निचले स्तर 2,221.05 रुपये और पिछले महीने 8 जुलाई 2024 को यह 3,217.90 रुपये के रिकॉर्ड हाई पर था।
कितना है Reliance का टारगेट प्राइस?
रिलायंस को कवर करने वाले 26 एनालिस्ट्स में से 25 ने इसे खरीदारी, 8 ने होल्ड और 3 ने ही सेल की रेटिंग दी है। सबसे हाईएस्ट टारगेट प्राइस नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने दिया है। नुवामा ने रिलायंस के शेयरों में निवेश के लिए खरीदारी की रेटिंग के साथ 3786 रुपये का टारगेट प्राइस फिक्स किया है।
ब्रोकरेज क्यों है रिलायंस पर फिदा?
एजीएम में रिलायंस ने पांच से सात साल में नए एनर्जी बिजनेस, डिजिटल और रिटेल के मजबूत आउटलुक और ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) के भारी विस्तार से कमाई में 50 फीसदी से अधिक बढ़ोतरी की बात कही। इसके अलावा 5 सितंबर की बैठक में 1:1 के रेश्यो में बोनस के प्रस्तावित सौदे पर बोर्ड फैसला लेगा। 47वीं एजीएम में रिलायंस ने अनुमान लगाया कि पांच से सात साल में इसके नए कारोबार में कंपनी के मौजूदा ओ2सी प्रॉफिटेबिलिटी के बराबर पहुंचने की उम्मीद है। नुवामा का अनुमान है कि इससे रिलायंस का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 50 फीसदी से अधिक बढ़ सकता है। इसके साथ ही क्लीन एनर्जी की पहल से इसकी वैल्यू में भी अहम बढ़ोतरी होगी। अभी ओ2सी कारोबार से ही रिलायंस को सबसे अधिक मुनाफा मिलता है जिसकी इसके EBITDA में करीब 2/5 हिस्सेदारी ही और आधे से अधिक मुनाफे में हिस्सेदारी है।
इसके अलावा रिटेल और डिजिटिल EBITDA के वित्त वर्ष 2028 तक दोगुना होने की उम्मीद है और रिलायंस का ओवरऑल बिजनेस वित्त वर्ष 2030 तक दोगुने से अधिक हो सकता है। डिजिटिल, रिटेल और पेट्रोकेमिकल कैपेसिटी को लेकर मजबूत रुझान से रिलायंस के ग्रोथ को तगड़ा सपोर्ट मिलेगा। नुवामा का कहना है कि रिलायंस के नए एनर्जी कारोबार से न सिर्फ इसके नेट प्रॉफिट में 50 फीसदी की अतिरिक्त बढ़ोतरी होगी बल्कि इसकी फिर से रेटिंग करनी होगी। इसके अलावा कंपनी ने ओ2सी कारोबार के लिए 2035 तक नेट-जीरो कॉर्बन का लक्ष्य रखा है जिसे लेकर ब्रोकरेज काफी पॉजिटिव हैं। नोमुरा का कहना है कि जियो ब्रेन और जियो क्लाउड की लॉन्चिंग से इसके एआई इंटीग्रेशन जर्नी को सपोर्ट मिलेगा। ब्रोकरेज के मुताबिक फ्री कैश फ्लो जेनेरेशन और नेट डेट लेवल में तेज गिरावट से इसकी EBITDA ग्रोथ को सपोर्ट मिलेगा।
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