जुलाई में UK की खुदरा महंगाई दर 10.1 प्रतिशत रही है। UK की खुदरा महंगाई (Retail Inflation) दर सालाना आधार पर 9.4 प्रतिशत से बढ़कर 10.1 प्रतिशत पर आई है। हालांकि इसके 9.8 प्रतिशत पर रहने का अनुमान था। इंग्लैंड में खुदरा महंगाई 40 सालों के नए हाई पर पहुंच गई है। फूड और एनर्जी की कीमतों में बढ़त जारी है। इसका असर जुलाई के महंगाई आंकड़ों पर देखने को मिला है।
जुलाई में ब्रिटेन की महंगाई (U.K. inflation) बढ़कर 40 साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई। खाद्य और ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी ने वहां के घरों पर महंगाई का दबाव बढ़ाना जारी रखा है।
ऑफिस फॉर नेशनल स्टैटिस्टिक्स द्वारा बुधवार को प्रकाशित अनुमानों के अनुसार कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (consumer price index) में सालाना 10.1% की वृद्धि हुई है। जो कि रॉयटर्स की आम राय के 9.8% के पूर्वानुमान से ज्यादा है। वहीं जून में ये वृद्धि 9.4% से ऊपर रही।
इसमें 0.9% मासिक वृद्धि नजर आई है। ये जून में 0.8% की वृद्धि से और 0.6% पूर्वानुमान से ज्यादा है।
ओएनएस ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों ने जून और जुलाई के बीच वार्षिक महंगाई की दरों को बढ़ाने में सबसे बड़ा योगदान दिया है।
ओएनएस ने दोहराया कि इसके पहले सीपीआई दर 1982 के दौरान सबसे अधिक रही होगी। जहां इसके अनुमान की रेंज जनवरी में करीब 11% से लेकर दिसंबर में लगभग 6.5% तक रही थी।
बैंक ऑफ इंग्लैंड ने महंगाई पर लगाम लगाने के लिए ब्याज दरों में लगातार छह बार बढ़ोतरी की है। इस महीने की शुरुआत में 1995 के बाद से एक बार में की गई सबसे बड़ी बढ़ोत्तरी की थी। यह अनुमान लगाया गया था कि इंग्लैंड में साल की चौथी तिमाही में ग्लोबल वित्तीय संकट के बाद से सबसे लंबी मंदी देखने को मिलेगी।
बैंक को उम्मीद है कि अक्टूबर में महंगाई 13.3 प्रतिशत पर पहुंच जाएगी। अब कंजर्वेटिव पार्टी (Conservative Party) के उम्मीदवार लिज़ ट्रस (Liz Truss) और ऋषि सोनक (Rishi Sunak) जिनमें से कोई एक पार्टी के सदस्यों के एक सर्वेक्षण के बाद 5 सितंबर को बोरिस जॉनसन के स्थान पर प्रधानमंत्री बन सकता है। उन पर देश पर मंडरा रहे ऐतिहासिक जीवन-यापन संकट से बचने का दबाव बढ़ रहा है।