पिछले 6 महीने के दौरान FPI की लगातार बिकवाली के बावजूद भारतीय बाजार में अक्टूबर के इसके रिकॉर्ड हाई से सिर्फ 6 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है। घरेलू स्टॉक मार्केट की इस मजबूती का श्रेय अगले रिटेल निवेशकों की तरफ से बाजार में आ रहे पैसे को दिया जा सकता है। रिटेल निवेशक बाजार में सीधे निवेश करने के साथ ही म्यूचुअल फंडों के जरिए भी जोरदार निवेश कर रहे हैं।
अक्टूबर से फरवरी की अवधि में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली की है जबकि इसी अवधि में घरेलू म्यूचुअल फंडों ने 77,634 करोड़ रुपये की खरीदारी की है। इस अवधि में रिटेल निवेशकों ने भारतीय बाजार में सीधे निवेश के जरिए 97,500 करोड़ रुपये लगाए हैं।
ब्रोकरेज फर्म Kotak Institutional Equities का मानना है कि FPI और रिटेल निवेशकों की तरफ से बाजार में आने वाले फ्लो के पैटर्न से उनके एक दूसरे से अलग नजरिए का पता चलता है। FPI के निवेश पैटर्न से पता चलता है कि उनको भारतीय बाजार में अब लो रिटर्न मिलने की उम्मीद है। ऐसे में वे भारतीय बाजार में काफी आक्रमक बिकवाली कर रहे हैं। Kotak Institutional Equities ने यह बातें 30 मार्च को जारी अपने नोट में कही हैं।
इस नोट में यह भी कहा गया है कि FPI के मन में भारतीय बाजार के बारे में इस सोच की वजह महंगा वैल्यूएशन और पूरी दुनिया में बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी है। भारत का निफ्टी 50 इंडेक्स इस समय अपने वन ईयर फॉरवर्ड अर्निंग के 18 गुने के आसपास है जो इसको अमेरिका के बाद दूसरा सबसे महंगा इक्विटी मार्केट बना देता है। निफ्टी 50 का वैल्यूएशन इस समय इसके लॉन्ग टर्म वैल्यूएशन से काफी ज्यादा हो गया है।
Kotak Institutional Equities के इस नोट में यह भी कहा गया है कि भारत के ग्रोथ मार्केट की पहचान के नजरिए से देखें तो निवेशक इस समय तमाम कथाकथित ग्रोथ स्टॉक्स के वैल्यूएशन को आर्कषक नहीं मान रहे है हालांकि इन कथाकथित ग्रोथ स्टॉक्स में पिछले 6 महीने में काफी गिरावट देखने को मिली है लेकिन इनका फॉर्वड वैल्यूएशन अभी भी इनके एतिहासिक औसत से ज्यादा है।
इस नोट में आगे कहा गया है कि भारतीय स्टॉक मार्केट में FPI की बड़ी हिस्सेदारी है और इनके द्वारा की जाने वाली खरीद-बिक्री का दारोमदार बहुत हद तक रिटर्न से संबंधित उनकी उम्मीद से जुड़ा होता है। इसके विपरीत रिटेल इन्वेस्टर भारतीय बाजार में लगातार अरबों डॉलर डाल रहे हैं।
Kotak Institutional Equities का मानना है कि भारतीय बाजार में रिटेल निवेशकों के पैसे का प्रवाह स्टॉक्स के फंडामेंटल पर आधारित भविष्य में मिलने वाले रिटर्न पर आधारित ना होकर पिछले 1 -2 साल में भारतीय बाजार में मिले बड़े फायदे पर आधारित है यानी रिटेल निवेशक बाजार में स्टॉक की बुनियादी मजबूती और भविष्य में उनके बेहतर प्रदर्शन के आधार पर पैसे ना लगाकर उनके पिछले 1 -2 साल के प्रदर्शन के आधार पर पैसे लगा रहे हैं।
Kotak Institutional Equities का आगे कहा है कि अगर बाजार का वर्तमान कंसोलिडेशन अगस्त-सितंबर में जारी रहता है तो रिटेल इन्वेस्टरों के रूख में बदलाव आ सकता है क्योंकि वर्तमान स्थितियों में बाजार का 12 महीने का रोलिंग रिटर्न काफी हद तक सपाट हो जाएगा।
ब्रोकरेज फर्म ने इस नोट में आगे कहा कि इक्विटी मार्केट में लो रिटर्न के एक लंबी अवधि के बाद रिटेल निवेशकों के निवेश व्यवहार को समझना काफी दिलचस्प होगा। खासकर उस स्थिति में जब दूसरे एसेट क्लास से मिलने वाले रिटर्न में बढ़त होने की संभावना है।