Rishabh Instruments IPO Listing: ऋषभ इंस्ट्रूमेंट्स (Rishabh Instruments) के आईपीओ को निवेशकों का तगड़ा रिस्पांस मिला था और अब आज इसकी घरेलू मार्केट में धांसू एंट्री हुई है। आईपीओ निवेशकों को इसके शेयर 441 रुपये के भाव पर जारी हुए हैं। बीएसई पर आज इसके सफर की शुरुआत 460 रुपये के भाव पर हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को महज 4 फीसदी का लिस्टिंग गेन (Rishabh Instruments Listing Gain) मिला। लिस्टिंग के बाद शेयर सुस्त हुए हैं। फिलहाल यह 444.45 रुपये के भाव (Rishabh Instruments Share Price) पर ट्रेड कर रहा है यानी कि आईपीओ निवेशक आधे फीसदी से थोड़ा अधिक ही मुनाफे में हैं।
Rishabh Instruments IPO को मिला था तगड़ा रिस्पांस
ऋषभ इंस्ट्रूमेंट्स का 490.78 करोड़ रुपये का आईपीओ 30 अगस्त से 1 सितंबर तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों को शानदार रिस्पांस मिला था और ओवरऑल यह 31.65 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाईड इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (QIB) का हिस्सा 72.54 गुना, नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का 31.29 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 8.44 गुना भरा था।
आईपीओ के तहत 10 रुपये की फेस वैल्यू वाले 1,11,28,858 शेयर जारी हुए हैं। इसमें से 75 करोड़ रुपये के 17,00,680 नए शेयर जारी हुए हैं। इन शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल नासिक में स्थित प्लांट के विस्तार के साथ-साथ आम कॉरपोरेट उद्देश्यों में होगा।
यह कंपनी टेस्ट और मीजरिंग इंस्ट्रूमेंट्स और इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट प्रोडक्ट्स बनाती है। 2011 में इसने यूरोप में एक नॉन-फेरस प्रेशर कास्टिंग कंपनी Lumel Alucast को खरीद लिया, जिससे कंपनी को कम वोल्टेज वाले करेंच ट्रांसफार्मर को बनाने में मदद मिली। इसका कारोबार चार सेगमेंट्स- इलेक्ट्रिकल ऑटोमेशन डिवाइसेज; मीटरिंग, कंट्रोल और प्रोटेक्शन डिवाइसेज; पोर्टेबल टेस्ट और मीजरिंग इंस्ट्रूमेंट्स; सोलर स्ट्रिंग इनवर्टर्स में फैला हुआ है।
इसके तीन मैनुफैक्चरिंग प्लांट हैं और दुनिया भर में 70 से अधिक देशों में 270 से अधिक डीलर्स हैं। देश भर में इसके 150 से अधिक डीलर्स हैं। इसके वित्तीय सेहत की बात करें तो वित्त वर्ष 2023 में इसे 49.69 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ था जबकि एक वित्त वर्ष पहले भी लगभग इतना ही 49.65 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा मिला था। वित्त वर्ष 2020-21 में इसे 35.94 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट हासिल हुआ था।
निवेश को लेकर रिस्क क्या है
ऋषभ इंस्ट्रूमेंट्स कारोबार के लिए अपनी सब्सिडरीज पर बहुत निर्भर है और वित्त वर्ष 2023 में इसके रेवेन्यू में सब्सिडियरीज की 67.09 फीसदी हिस्सेदारी थी। रेवेन्यू से जुड़ा एक और रिस्क ये है कि इसका 66 फीसदी रेवेन्यू निर्यात से आता है तो फॉरेन एक्सचेंज और प्रोडक्ट्स की मांग में उतार-चढ़ाव के साथ-साथ इकनॉमिक साइकिल से इसके कारोबार पर असर दिख सकता है।
मैनुफैक्चरिंग की बात करें तो वित्त वर्ष 2023 के आंकड़ों के हिसाब से पोलैंड मैनुफैक्चरिंग फैसिलिटी 2 की इसके मैनुफैक्चरिंग में 62.73 फीसदी हिस्सेदारी रही यानी अगर इसके शेड्यूल के हिसाब से प्रोडक्शन नहीं हुआ तो इसका कारोबार प्रभावित हो सकता है। कंपनी में निवेश को लेकर एक रिस्क ये है कि इसके अधिकतर ग्राहकों ने लॉन्ग टर्म कांट्रैक्ट नहीं किया और वे इसमें बदलाव भी कर सकते हैं। चिप की सप्लाई में दिक्कत होती है तो भी इसके कारोबार को झटका लग सकता