वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 जुलाई को डॉलर के मुकाबले रुपये के नए लो को हिट करने के बाद कहा कि रिजर्व बैंक और भारत सरकार दोनों की नजरें रुपये के विनिमय दर पर लगी हुई हैं। एक इवेंट के मौके पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रिपोर्टरों से कहा कि इस दुनिया में हम अकेले नहीं हैं । ऐसे में दुनिया में होने वाली घटनाएं हम पर भी असर डालती हैं।
रुपये की गिरावट पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि डॉलर के मुकाबले दुनिया भर की तमाम करेंसीज में गिरावट आई है। रुपया इनमें अकेला नहीं है। फिर भी दूसरी करेंसीज के मुकाबले रुपये का प्रदर्शन बेहतर रहा है।
इस बातचीत में उन्होंने आगे कहा कि रिजर्व बैंक के गवर्नर समय-समय पर मुझसे बात करते रहते हैं और यह बताते रहते हैं कि स्थितियों पर नजर बनाए रखने के लिए रिजर्व बैंक क्या कर रहा है?
वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि वह इस बात को लेकर काफी सर्तक हैं कि डॉलर के मुकाबले कमजोर रुपये का तत्कालीन प्रभाव क्या होगा और देश में होने वाला इंपोर्ट इससे कितना महंगा होगा।
बता दें कि 1 जुलाई को डॉलर के मुकाबले रुपया इंट्राडे में 79.1187 के रिकॉर्ड लो पर पहुंच गया। खराब होती ग्लोबल माइक्रो स्थितियों की वजह से दुनिया भर की तमाम करेंसीज में डॉलर के मुकाबले कमजोरी आई है। रुपया भी इस गिरावट का शिकार हो रहा है।
इसके अलावा विदेशी निवेशक लगातार भारतीय बाजार से अपना पैसा निकाल रहे हैं। बढ़ती महंगाई और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से भी रुपये पर निगेटिव असर पड़ा है। अर्थशास्त्रियों ने देश के बढ़ते चालू खाते के घाटे को लेकर चिंता जताई है। सरकार ने आज ही आयात घटाने के लिए गोल्ड पर लगने वाला इंपोर्ट टैक्स बढ़ा दिया है और इसके साथ ही पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर होने वाले एक्सपोर्ट पर टैक्स लगा दिया है।
आरबीआई के डिप्टी गवर्नर माइकल पात्रा (Michael Patra) ने पिछले हफ्ते कहा था कि केंद्रीय बैंक रुपये में किसी एकाएक अवमूल्यन को बर्दाश्त नहीं करेगा। हम यह नहीं जानते हैं कि रुपया कहां तक जाएगा, यहां तक की यूएस फेड भी यह नहीं जानता है कि डॉलर कहां पहुंचेगा लेकिन एक बात को लेकर हम दृढ़ हैं कि रुपये की स्थिरता के लिए कुछ भी किया जाएगा।