Currency Check : 5 नवंबर को लगातार पांचवें दिन भी भारतीय रुपये की बढ़त का सिलसिला जारी है। तेल की कीमतों में गिरावट आई है। इससे रुपए के सपोर्ट मिल रहा है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी की हार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान युद्ध से बाहर निकलने के लिए मजबूर कर सकती है। इसके चलते ही तेल की कीमतों में नरमी आई है।
बुधवार के 94.64 रुपए प्रति डॉलर के बंद भाव की तुलना में रुपया आज 29 पैसे की बढ़त के साथ 94.35 रुपए प्रति डॉलर पर खुला। आज अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ज्यादातर एशियाई मुद्राओं में तेजी देखने को मिली है। फिलीपीन पेसो सबसे ज्यादा मजबूत हुआ है। इसमें 0.36 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है। इसके बाद थाई बाहत का नंबर है जो 0.42 प्रतिशत मजबूत हुआ है। जापानी येन और मलेशियाई रिंगित में 0.29-0.29 प्रतिशत की तेजी आई है, जबकि दक्षिण कोरियाई वॉन और सिंगापुर डॉलर में 0.18 प्रतिशत और 0.08 प्रतिशत की बढ़त देखी गई है।
दूसरी ओर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ताइवान डॉलर में 0.21 प्रतिशत की कमजोरी आई है। जबकि चीनी रेनमिनबी और इंडोनेशियाई रुपिया में 0.07 प्रतिशत और 0.04 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
गुरुवार को डॉलर में थोड़ी गिरावट आई। अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेट्स की भारी जीत ने अनिश्चितता के एक बड़े कारण को दूर कर दिया है,जिससे ग्लोबल शेयर बाजार में तेजी आई है। कई बड़ी मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर इंडेक्स पिछले सत्र में 0.36% की गिरावट के बाद आज भी 0.06% गिरकर 101.41 पर आ गया है। यूरो 0.12% बढ़कर 1.1241 डॉलर पर पहुंच गया है।
केयरएज रेटिंग्स में चीफ इकोनॉमिस्ट रजनी सिन्हा का कहना है कि चुनाव के शुरुआती नतीजों के बाद अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में मामूली गिरावट आई है। डॉलर इंडेक्स में भी नरमी आई है, इससे अमेरिकी शेयर बाजारों में (खासकर एआई शेयरों में) करेक्शन का खतरा बढ़ गया है। बाजार की तात्कालिक प्रतिक्रिया के अलावा,सेक्टोरल प्रिफरेंस में संभावित बदलाव पर भी ध्यान देना जरूरी है।
डेमोक्रेट्स पारंपरिक रूप से टेक्नोलॉजी सेक्टर पर मजबूत संघीय निगरानी, कड़े सुरक्षा उपायों और डेटा गोपनीयता की बेहतर सुरक्षा के पक्षधर रहे हैं। डेमोक्रेटिक सांसदों ने डेटा सेंटर के विस्तार के बिजली और पानी की खपत पर पड़ने वाले प्रभावों के साथ-साथ उपयोगिता लागत पर संभावित असर को लेकर भी चिंता जताई है। अगर एआई शेयरों में सेक्टर रोटेशन के बजाय तेज गिरावट आती है, तो इससे मंदी का डर पैदा हो सकता है और ग्लोबल अर्थव्यवस्थाओं पर इसका असर पड़ सकता है।
डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।