RBI ने देश में विदेशी मुद्रा (Foreign Currency) की आवक बढ़ाने के जो उपाय किए हैं, उनका ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद नहीं है। इस वजह से डॉलर के मुकाबले रुपया के एक्सचेंज रेट पर इसका असर नहीं पड़ेगा। इकोनॉमिस्ट्स ने मनीकंट्रोल को यह बात बताई है। पिछले कुछ समय से डॉलर के मुकाबले रुपया में लगातार कमजोरी आ रही है।
कोटक सिक्योरिटीज में करेंसी डेरिवेटिव के हेड विकास बजाज ने कहा, "हमने रुपया में कमजोरी आने पर इस तरह के उपाय पहले भी देखे हैं। इनका खास असर नहीं पड़ता है। हमें यह इस तथ्य को स्वीकार करना होगा कि करंट अकाउंट (बढ़ता व्यापार घाटा) और कैपिटल अकाउंट (पूंजी का देश से बाहर जाना) दोनों ही मोर्चों पर रुपया को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उधर, डॉलर को लेकर माहौल काफी सपोर्टिव है और वित्तीय स्थितियां कठिन हो रही हैं।"
उन्होंने कहा कि विदेशी माहौल अनुकूल नहीं है जिससे आरबीआई के उपायों से छोटी अवधि में थोड़ा फायदा हो सकता है। लेकिन, इनसे रुपया की दिशा बदलने की उम्मीद कम है। मंगलवार को शुरुआती कारोबार में रुपया 80 के लेवल को पार कर गया।
RBI ने इस महीने की शुरुआत में देश में विदेशी करेंसी की आवक बढ़ाने के लिए कई उपायों का ऐलान किया था। उम्मीद थी कि इन उपायों से डॉलर के मुकाबले रुपया पर दबाव घटेगा। इनमें बैंकों को नॉन-रेजिडेंट्स इंडियंस से विदेशी मुद्रा जुटाने के लिए ज्यादा आजादी दी गई थी। सरकारी और प्राइवेट कंपनियों के बॉन्ड में छोटी अवधि के लिए विदेशी इनवेस्टर्स के निवेश की सीमा हटा दी गई थी।
इस साल डॉलर के मुकाबले रुपया 4.5 फीसदी कमजोर हो चुका है। इस दौरान RBI रुपया को सहारा देने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल करता रहा है। ट्रेडर्स का अनुमान है कि RBI ने स्पॉट और फॉरवर्ड मार्केट में पिछले छह हफ्तों में 30 से 40 अरब डॉलर की बिक्री की है। रूस ने 24 फरवरी को यूक्रेन पर हमला किया था। 18 फरवरी को इंडिया का विदेशी मुद्रा भंडार 632.95 अरब डॉलर था। 24 जून को यह घटकर 593.32 अरब डॉलर पर आ गया।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि RBI ने विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने के साथ ही यह संकेत देने के लिए इन उपायों का ऐलान किया है कि वह लगातार रुपये में आ रही कमजोरी को रोकना चाहता है। साथ ही वह अपने विदेशी मुद्रा भंडार को गिरने से बचाना चाहता है। एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि RBI के उपायों से स्पॉट मार्केट में कुछ हद तक डॉलर की कमी दूर करने में मदद मिल सकती है।
IFA Global के फाउंडर अभिषेक गोएनका ने कहा, "सेंटिमेंट के लिहाज से ये उपाय अहम हैं। इससे मार्केट पार्टिसिपेंट्स को यह संकेत जाता है कि RBI रुपया में लगातार आ रही गिरावट को रोकने को लेकर प्रतिबद्ध है। वह इसमें उतार-चढ़ाव पर भी अंकुश लगाना चाहता है। "