भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक के मिनट्स (Minutes of Meeting) जारी कर दिए हैं। इससे पता चलता है कि इस महीने की शुरुआत में हुई बैठक में मॉनेटरी पॉलिसी को अकोमोडेटिव (Accommodative Policy) बनाए रखने का फैसला किस तरह लिया गया। इससे यह भी पता चलता है कि किस सदस्य का इस बारे में क्या रुख था। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
एमपीसी के मिनट्स से पता चलता है कि कमेटी के सदस्य जयंत वर्मा की राय बाकी सदस्यों से जुदा थी। उन्होंने अकोमोडेटिव पॉलिसी जारी रखने के खिलाफ अपनी राय दी थी। उन्होंने कहा था कि कोरोना की महामारी से निपटने पर एमपीसी के लगातार फोकस करने के विपरीत नतीजे सामने आए हैं। वर्मा एमपीसी के एकमात्र सदस्य थे, जिन्होंने न्यूट्रल पॉलिसी की तरफ बढ़ने की राय दी थी।
इस महीने की शुरुआत में हुई एमपीसी की बैठक में ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया गया था। इसके अलावा आरबीआई ने अकोमोडेटिव रुख जारी रखने का संकेत दिया था। इससे पहले भी वर्मा कह चुके हैं कि महामारी से निपटने में मॉनेटरी पॉलिसी की सीमित भूमिका है। वह अकोमोडेटिव पॉलिसी जारी रहने के खिलाफ रहे हैं। उनका मानना रहा है कि आरबीआई को पॉलिसी से जुड़े मुख्य मसलों पर फोकस करना चाहिए।
एमपीसी की बैठक इस महीने 8 से 10 तारीख को हुई थी। इसमें आरबीआई ने कहा था कि जब तक जरूरी होगा वह ग्रोथ की रफ्तार बढ़ाने के लिए अकोमोडेटिव पॉलिसी जारी रखेगा। इस बैठक में एमपीसी के छह सदस्यों ने हिस्सा लिया था। इनमें शशांक भिडे (Shashanka Bhide), अशिमा गोयल (Ashima Goyal), जयंत आर वर्मा (Jayanth R. Varma), मृदुल के सागर (Mridul K. Saggar), माइकल देबब्रत पात्रा (Michael Debabrata Patra) शामिल थे। आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) ने इस बैठक की अध्यक्षता की थी।
दुनियाभर में केंद्रीय बैंक अपनी मॉनेटरी पॉलिसी में बदलाव ला रहे हैं। कुछ ने तो मॉनेटरी पॉलिसी को सख्त बनाना शुरू कर दिया है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने अगले महीने से प्रमुख ब्याज दर में वृद्धि का सिलसिला शुरू करने का ऐलान किया है। माना जा रहा है कि वह इस साल 7 बार इंट्रेस्ट रेट बढ़ा सकता है। यूरोपीय केंद्रीय बैंक ने भी अपनी पॉलिसी में बदलाव करने का संकेत दिया है।
इधर, इंडिया में आरबीआई ने अब तक यह नहीं बताया है कि वह अपने रुख में कब बदलाव करेगा। ज्यादातर इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि आरबीआई इस साल के अंत में अपनी पॉलिसी के रुख में बदलाव करेगा। वह इकोनॉमिक रिकवरी के रफ्तार पकड़ने के बाद इंट्रेस्ट रेट बढ़ाना शुरू करेगा।