Rupee fall: रुपये में गिरावट का क्या होगा आप पर असर, आइए जानें

गुरुवार यानी दोपहर के ट्रेड में इसमें कुछ रिकवरी देखने को मिली और कारोबार के अंत में डॉलर के मुकाबले रुपया 15 पैसे मजबूत होकर 76.08 के स्तर पर बंद हुआ।

अपडेटेड Dec 16, 2021 पर 4:56 PM
रुपये में गिरावट का सबसे पहला और तत्कालीक असर इंपोर्ट्स पर पड़ता है।

भारतीय रुपया बुधवार को 20 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया। हालांकि गुरुवार यानी दोपहर के ट्रेड में इसमें कुछ रिकवरी देखने को मिली और कारोबार के अंत में डॉलर के मुकाबले रुपया 15 पैसे मजबूत होकर 76.08 के स्तर पर बंद हुआ।

बता दें कि बुधवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 76.32 के स्तर पर पहुंच गया था जो 24 अप्रैल 2020 के बाद का सबसे निचला स्तर था।

क्यों गिर रहा है रुपया


मनीकंट्रोल ने हाल ही में एक स्टोरी पब्लिश की थी जिसमें बाजार दिग्गजों ने कहा था कि भारतीय करेंसी की इस कमजोरी के कई कारण है। इसमें ओमीक्रोन के बढ़ते मामलें, चालू खाते के बढ़ते घाटे, विदेशी पैसे की निकासी और डॉलर में मजबूती जैसे कारण शामिल है।

आरबीआई की तरफ से मजबूत फॉरेन एक्सचेंज बनाए रखने के बावजूद कोरोना के नए वैरिएंट से जुड़ी चिंता के कारण उभरते बाजारों से विदेशी पैसी की निकासी देखने को मिल रही है। भारत भी इसका अपवाद नहीं है। बता दें कि आरबीआई वित्त वर्ष 2022 में अब तक फॉरेक्स रिजर्व में 60 अरब डॉलर और जोडे है।

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आइए देखते है रुपये में इस गिरावट का भारतीय इकोनॉमी पर क्या होगा असर

रुपये में गिरावट का सबसे पहला और तत्कालीक असर इंपोर्ट्स पर पड़ता है। पर डॉलर रुपी कॉस्ट बढ़ने से उनको भारी झटका लगता है यानी उनको अपने आयात के लिए रुपये में पहले की तुलना में ज्यादा भुगतान करना होता है। हालांकि डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी एक्सपोर्ट के लिए वरदान का काम करती है क्योंकि अब उनको डॉलर के मुकाबले ज्यादा रुपये मिलते है।

मैक्रो इकोनॉमी पर नजर डालें तो इंपोर्ट महंगा होने से इसका स्थानीय कीमतों पर प्रतिकूल असर पड़ता है और देश में तमाम चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिलती है। रुपये में कमजोरी से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़त देखने को मिल सकती है जिसके कारण परिवहन लागत बढ़ती है और परिवहन लागत बढ़ने से तमाम जरुरी उपयोग की चीजों की कीमतें बढ़ती है। इसमें फल, दूध , सब्जियां जैसी चीजे भी शामिल है।

रुपये में कमजोरी से ऐसे लोगों को भी नुकसान होता है जो विदेशों में पढ़ाई करते है क्योंकि रुपये में उनकी इस पढ़ाई पर आनेवाली लागत में बढ़ोतरी हो जाती है। इसके अलावा जो लोग विदेश यात्रा पर जाने वाले होते है उनको भी रुपये की कमजोरी से नुकसान होता है क्योंकि उनको 1 डॉलर के बदले में ज्यादा रुपये देने होते है।

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