डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर 11 अक्टूबर को 84 के पार पहुंच गया। काफी समय से यह 84 की दहलीज पर खड़ा था। 11 अक्टूबर को इसने दहलीज पार कर दी। हाल में क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल और इंडियन स्टॉक मार्केट्स में विदेशी निवेशकों की बिकवाली से रुपये में कमजोरी बढ़ने की आशंका थी। सरकार को क्रूड ऑयल के आयात के लिए डॉलर में पेमेंट करना पड़ता है। क्रूड ऑयल की कीमत पर बढ़ने पर इसलिए डॉलर की मांग बढ़ जाती है, जिसका असर रुपये पर पड़ता है।
क्रूड की कीमतों में उछाल का असर
डॉलर (Dollar) के मुकाबले रुपया (Rupee) 11 अक्टूबर को गिरकर 84.05 के स्तर पर आ गया। पिछले काफी समय से रुपया 83.90 के लेवल के आसपास चल रहा था। इसके करीब दो हफ्ते पहले यह मजबूती के साथ 83.50 के लेवल तक पहुंच गया था। मिडिलईस्ट में टेंशन बना हुआ है। इसका असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर पड़ा है। अक्टूबर में क्रूड 10 फीसदी चढ़ चुका है। 10 अक्टूबर को ब्रेंट क्रूड का भाव 3.5 फीसदी के उछाल के साथ 79.1 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था।
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इंडिया क्रूड के आयात पर निर्भर है
इंडिया क्रूड ऑयल की अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। पिछले वित्त वर्ष में सरकार ने 139 अरब डॉलर मूल्य के क्रूड ऑयल का इंपोर्ट किया था। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर मध्यपूर्व में हालात नहीं सुधरते हैं तो क्रूड की कीमतों में तेजी जारी रहेगी। यह इंडिया जैसे ऑयल इंपोर्ट करने वाले देशों के लिए चिंता की बात है। महंगा क्रूड रुपये पर दबाव बढ़ाने के साथ इकोनॉमी के लिए कई दूसरे संकट भी पैदा कर सकता है।