इंटरेस्ट रेट्स का बढ़ना रियल एस्टेट शेयरों के लिए अच्छी खबर नहीं है। इसकी वजह यह है कि ग्राहकों की EMI बढ़ जाती है, जिसे चुकाने में उन्हें दिक्कत आती है। लेकिन, जमीनी हकीकत अलग है। लग्जरी रियल एस्टेट की मांग मेट्रो शहरों में बहुत स्ट्रॉन्ग है। एनालिस्ट और मैनेजमेंट की कमेंटी भी रियल एस्टेट को लेकर काफी बुलिश है। कुछ समय पहले इनवेस्टर्स रियल एस्टेट शेयरों में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे थे। अब सेंटिमेंट में बदलाव दिख रहा है। विदेशी ब्रोकरेज फर्म जेफरीज का कहना है कि इनवेंट्री कम है, जिसके चलत रियल एस्टेट शेयरों की कीमतों में डबल डिजिट ग्रोथ दिखी है। इस सेक्टर के पक्ष में एक प्रमुख दलील यह है कि रियल एस्टेट कंपनियों के शेयरों की वैल्यूएशन उनके पीक लेवल से कम है। जिसने भी 2008 में 'लैंड बैंक बूम' को देखा है, वह इस बात से सहमत होगा।
