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सहारा ग्रुप को लौटाने होंगे निवेशकों के ₹14,106 करोड़, SAT ने सेबी के आदेश को रखा बरकरार

SAT Action Against Sahara Group: सहारा ग्रुप को सिक्योरिटीज अपीलेट ट्राइब्यूनल (SAT) से बड़ा झटका लगा है। ट्राइब्यूनल ने SEBI के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें सहारा इंडिया कमर्शियल कॉरपोरेशन लिमिटेड (SICCL) और उसके निदेशकों को लगभग 14,106 करोड़ रुपये निवेशकों को वापस लौटाने का निर्देश दिया गया था

Edited By: Vikrant singhअपडेटेड Mar 10, 2026 पर 3:50 PM
सहारा ग्रुप को लौटाने होंगे निवेशकों के ₹14,106 करोड़, SAT ने सेबी के आदेश को रखा बरकरार
Sahara Group ने ऑप्शनली फुली कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (OFCDs) के जरिए करीब 1.98 करोड़ निवेशकों से जुटाई थी

SAT Action Against Sahara Group: सहारा ग्रुप को सिक्योरिटीज अपीलेट ट्राइब्यूनल (SAT) से बड़ा झटका लगा है। ट्राइब्यूनल ने SEBI के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें सहारा इंडिया कमर्शियल कॉरपोरेशन लिमिटेड (SICCL) और उसके निदेशकों को लगभग 14,106 करोड़ रुपये निवेशकों को वापस लौटाने का निर्देश दिया गया था। यह राशि कंपनी ने ऑप्शनली फुली कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (OFCDs) के जरिए करीब 1.98 करोड़ निवेशकों से जुटाई थी।

SAT ने सोमवार को SICCL, सहारा इंडिया और कंपनी के कई डायरेक्टरों की ओर से दाखिल अपीलों को खारिज कर दिया। इन अपीलों में SEBI के 31 अक्टूबर 2018 के आदेश को चुनौती दी गई थी। ट्रिब्यूनल ने कहा कि जुलाई 1998 से जून 2008 के बीच बड़ी संख्या में निवेशकों को OFCD जारी किए गए थे। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह फंड जुटाने की प्रक्रिया एक पब्लिक इश्यू थी और इसमें सिक्योरिटीज कानूनों का उल्लंघन हुआ।

पब्लिक इश्यू माना गया OFCD इश्यू

SAT ने कहा कि कंपनी ने करीब 1.98 करोड़ लोगों को डिबेंचर जारी किए, जिसे किसी भी तरह प्राइवेट प्लेसमेंट नहीं माना जा सकता। उस समय लागू कंपनियों अधिनियम, 1956 के अनुसार अगर किसी निवेश प्रस्ताव को 50 या उससे अधिक लोगों को दिया जाता है, तो उसे पब्लिक इश्यू माना जाता है।

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