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समीर अरोड़ा ने कहा- न तो चाइनीज फैक्टर और न ही मिडिलईस्ट क्राइसिस का इंडिया पर ज्यादा असर पड़ेगा

समीर अरोड़ा ने कहा कि मिडिलईस्ट क्राइसिस का मार्केट्स पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है। इसका मतलब यह है कि ग्लोबल मार्केट्स यह मानकर चल रहा है कि अभी मामला नियंत्रण में है। अगर इस लड़ाई के बढ़ने की आशंका होती तो मार्केट्स में इतनी शांति नहीं दिखती। चर्चा है कि आगे ऑयल की कीमत गिर सकती है। सऊदी अरब ने तो इसके गिरकर 50 डॉलर प्रति बैरल तक आ जाने की बात कही है

MoneyControl Newsअपडेटेड Oct 04, 2024 पर 1:40 PM
समीर अरोड़ा ने कहा- न तो चाइनीज फैक्टर और न ही मिडिलईस्ट क्राइसिस का इंडिया पर ज्यादा असर पड़ेगा
समीर अरोड़ा ने कहा कि इंडियन म्यूचुअल फंडों के पास अभी काफी कैश है। अगर अमेरिका और चीन सहित दूसरे मार्केट्स का प्रदर्शन अच्छा रहता है तो इंडियन फंड मैनेजर्स भी ज्यादा आत्मविश्वास के साथ अपने कैश का इस्तेमाल कर सकेंगे।

इंडियन स्टॉक मार्केट्स 3 अक्टूबर को क्रैश कर गए। 4 अक्टूबर को मार्केट कमजोर खुले। दोपहर तक बिकवाली का दबाव बढ़ गया। इससे सेंसेक्स और निफ्टी 0.40 फीसदी तक लुढ़क गया। इंडियन मार्केट्स तीन बड़ी वजहों से लड़खड़ाता दिख रहा है। विदेशी निवेशक चीन में पैसे लगाने के लिए इंडियन मार्केट्स में बिकवाली कर रहे हैं। दूसरा, सेबी के एफएंडओ के नए नियमों का बाजार पर असर दिख रहा है। आखिर में मिडिलईस्ट क्राइसिस है। आखिर ये तीनों इंडियन मार्केट्स के लिए कितने बड़े रिस्क हैं? मनीकंट्रोल ने इस सवाल का जवाब जानने के लिए दिग्गज इनवेस्टर और फंड मैनेजर समीर अरोड़ा से बातचीत की।

विदेशी फंड नहीं करेंगे इंडिया में ज्यादा बिकवाली

विदेशी निवेशकों के इंडियन मार्केट से पैसे निकालने के बारे में उन्होंने कहा कि यह सोचना सही नहीं है कि विदेशी इनवेस्टर्स चीन के मार्केट में निवेश करने के लिए इंडियन मार्केट्स से अपने पैसे निकाल लेंगे। कुछ फंड्स ऐसा कर रहे हैं। खासकर ऐसे फंड चीन में निवेश के लिए इंडिया में बिकवाली कर सकते हैं, जिनके पास पैसे की कमी है। जब चीन के मार्केट्स का प्रदर्शन अच्छा रहता है तो पैसा एशिया-जापान फंड्स और एशिया-पैसेफिक फंड्स जैसे इमर्जिंग मार्केट्स फंडों में जाता है, जो इंडिया सहित पूरे क्षेत्र के लिए पॉजिटिव है।

अच्छे रिटर्न के लिए जरूरी है हर क्षेत्र का अच्छा प्रदर्शन

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