संवत 2082 की गिरावट बनी वरदान! जानिए क्यों संवत 2083 में शेयर बाजार से बंपर रिटर्न की उम्मीद कर रहे हैं दिग्गज ब्रोकरेज
वेस्ट एशिया का तनाव, कच्चे तेल की उठापटक और FII की बिकवाली के बीच संवत 2082 बाजार के लिए फीका रहा। अब ICICI Direct और Kotak Neo को अगले 12 महीनों में रिकवरी दिख रही है। कंपनियों की मजबूत कमाई और निफ्टी के नरम पड़े वैल्यूएशन इस भरोसे की बड़ी वजह हैं। जानिए ब्रोकरेज क्या कह रहे हैं
संवत 2082 भारतीय शेयर बाजार के लिए आसान नहीं रहा। इस दौरान निफ्टी 50 करीब 3 फीसदी नीचे आ गया। वेस्ट एशिया में लंबा खिंचता तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव और विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की लगातार बिकवाली ने बाजार को दबाए रखा। लेकिन संवत 2083 की दहलीज पर खड़े निवेशकों के लिए ब्रोकरेज हाउस अच्छी खबर लेकर आए हैं।
ICICI Direct को अगले 12 महीनों में भारतीय शेयरों से अच्छा डबल डिजिट रिटर्न मिलने की उम्मीद है, वहीं Kotak Neo का मानना है कि कंपनियों की कमाई में लगातार ग्रोथ दुनिया की अनिश्चितताओं के बीच भी बाजार को संभाले रख सकती है।
गिरावट को कमजोरी नहीं, वैल्यूएशन का सुधार मान रहे ब्रोकरेज
सबसे पहले ये समझना जरूरी है कि ब्रोकरेज इस गिरावट को किस नजर से देख रहे हैं। ICICI Direct और Kotak Neo दोनों का कहना है कि हाल की गिरावट ज्यादातर वैल्यूएशन का एडजस्टमेंट है। इसका मतलब ये नहीं कि देश की आर्थिक बुनियाद कमजोर पड़ गई है।
इसे ऐसे समझिए। किसी अच्छी दुकान का सामान कुछ समय के लिए जरूरत से ज्यादा महंगा बिकने लगे और फिर उसकी कीमत थोड़ी नीचे आ जाए, तो सामान खराब नहीं हो जाता। बस वो पहले से वाजिब दाम पर मिलने लगता है। ब्रोकरेज बाजार की मौजूदा हालत को कुछ इसी तरह देख रहे हैं।
उनके मुताबिक, कंपनियों की सुधरती कमाई, नरम पड़े वैल्यूएशन और घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती, ये तीनों बातें मिलकर अगले 12 महीनों में बाजार की रिकवरी की उम्मीद को और पक्का कर रही हैं।
Q2 नतीजों में 20 फीसदी से ज्यादा की ग्रोथ, मिड और स्मॉल कैप आगे
संवत 2083 के लिए जारी अपने दिवाली स्ट्रैटेजी नोट में ICICI Direct ने Q2FY27 के चल रहे नतीजों के सीजन की तस्वीर सामने रखी है, और ये तस्वीर काफी उत्साह बढ़ाने वाली है।
अब तक जिन कंपनियों ने नतीजे जारी किए हैं, उनकी रेवेन्यू और प्रॉफिट आफ्टर टैक्स यानी PAT, दोनों में सालाना आधार पर 20 फीसदी से ज्यादा की बढ़त दर्ज हुई है। ब्रोकरेज का कहना है कि इससे साफ संकेत मिलता है कि घरेलू कंपनियों की कमाई का साइकल रफ्तार पकड़ रहा है।
इस बार मिड कैप और स्मॉल कैप कंपनियों ने खास तौर पर दम दिखाया है। ICICI Direct के मुताबिक, इन कंपनियों का मुनाफा सालाना आधार पर 30 फीसदी से ज्यादा बढ़ा है। यानी बड़ी कंपनियों के साथ-साथ छोटी और मझोली कंपनियां भी कमाई की इस दौड़ में तेजी से कदम बढ़ा रही हैं।
11 तिमाही की सबसे तेज कमाई, FY27 में 18 फीसदी ग्रोथ का अनुमान
Kotak Neo भी कमाई की बढ़ती रफ्तार की बात करता है। ब्रोकरेज के मुताबिक, Q1FY27 में निफ्टी 50 कंपनियों की कमाई में सालाना आधार पर जो ग्रोथ दिखी, वो पिछली 11 तिमाहियों में सबसे ज्यादा रही।
Kotak Neo को उम्मीद है कि ये रफ्तार आगे भी बनी रहेगी। ब्रोकरेज ने अनुमान लगाया है कि FY27 में निफ्टी 50 की कमाई करीब 18 फीसदी और FY28 में 13 फीसदी बढ़ सकती है।
खतरे भी पूरी तरह टले नहीं हैं। भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी निवेशकों के पैसों का अनिश्चित आना-जाना अब भी बाजार के लिए बड़े रिस्क बने हुए हैं। लेकिन इस बीच घरेलू संस्थागत निवेशक यानी DII लगातार खरीदारी कर रहे हैं, और यही खरीदारी भारतीय शेयर बाजार को सहारा दे रही है। जब विदेशी निवेशक पैसा निकाल रहे हैं, तब देश के अपने निवेशक बाजार को थामे खड़े हैं।
निफ्टी का P/E 10 साल के औसत से नीचे
बाजार में आई गिरावट के बाद वैल्यूएशन पहले से ज्यादा वाजिब हो गए हैं। इससे लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए रिस्क और रिवॉर्ड का हिसाब पहले से बेहतर हो गया है।
ICICI Direct के मुताबिक, निफ्टी 50 का दो साल आगे का प्राइस-टू-अर्निंग्स यानी P/E रेशियो 16.6 गुना पर है। ये इसके 10 साल के औसत 18.2 गुना से नीचे है। आसान शब्दों में कहें तो कंपनियों की आने वाली कमाई के मुकाबले बाजार अभी अपने पिछले 10 साल के औसत भाव से कम पर मिल रहा है।
ब्रोकरेज का मानना है कि वैल्यूएशन में आई इस नरमी और कमाई को लेकर बढ़ती स्पष्टता की वजह से क्वालिटी शेयर अब और आकर्षक हो गए हैं।
एनालिस्ट्स की सलाह भी साफ है। उनका कहना है कि निवेशकों को बाजार का सही वक्त पकड़ने की कोशिश करने के बजाय इस गिरावट का इस्तेमाल मजबूत बुनियाद वाली कंपनियों के शेयर धीरे-धीरे जमा करने में करना चाहिए। यानी एक झटके में सारा पैसा लगाने या सबसे निचले स्तर का इंतजार करने के बजाय कदम-दर-कदम आगे बढ़ना बेहतर है।
IPO की लाइन से बढ़ रहा निवेश का दायरा
Kotak Neo ने भारत में निवेश के बढ़ते मौकों पर भी ध्यान दिलाया है। इसकी एक बड़ी वजह इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग यानी IPO की लगातार लगी लाइन है।
ब्रोकरेज मानता है कि नई लिस्टिंग कुछ समय के लिए बाजार की घरेलू लिक्विडिटी को अपनी ओर खींच सकती हैं। जब निवेशकों का पैसा नए IPO में जाता है, तो पहले से लिस्टेड शेयरों में उतना पैसा नहीं आता। लेकिन Kotak Neo के मुताबिक, आखिरकार ये लिस्टिंग निवेश के विकल्पों का दायरा बढ़ाती हैं और देश के कैपिटल मार्केट को और मजबूत बनाती हैं। निवेशक के सामने जितने ज्यादा अच्छे विकल्प होंगे, बाजार उतना गहरा और मजबूत होगा।
लिक्विडिटी नहीं, कमाई चलाएगी अगली रैली
आगे की राह को लेकर ICICI Direct की राय दिलचस्प है। ब्रोकरेज का मानना है कि आने वाले समय में शेयर बाजार के रिटर्न में कंपनियों की कमाई की भूमिका सबसे बड़ी होगी। यानी बाजार की चाल पैसों की भरमार या ऊंचे वैल्यूएशन मल्टीपल के दम पर नहीं, बल्कि कंपनियों के असली मुनाफे के दम पर बनेगी।
ICICI Direct ने FY26 से FY28 के बीच निफ्टी की कमाई में 16 फीसदी की सालाना चक्रवृद्धि ग्रोथ यानी CAGR का अनुमान लगाया है। ब्रोकरेज को इस अनुमान के लिए कोई बड़ा खतरा नजर नहीं आता।
ICICI Direct भारतीय शेयर बाजार को लेकर पॉजिटिव बना हुआ है। इसके पीछे वो दो वजहें गिनाता है, ग्रोथ का मजबूत आउटलुक और ऐसे वैल्यूएशन जो अपने ऐतिहासिक औसत से नीचे आ चुके हैं।
Kotak Neo भी लॉन्ग टर्म को लेकर ऐसी ही सकारात्मक राय रखता है। ब्रोकरेज का कहना है कि भू-राजनीतिक अनिश्चितता और ग्लोबल बाजारों के उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत में ग्रोथ के ढांचागत मौके पूरी तरह बरकरार हैं।
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