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SEBI ने FPI को एक्सचेंज ट्रेडेड कमोडिटी डेरिवेटिव में सीधे पार्टिसिपेट करने की इजाजत दी, जानिए इसका मतलब क्या है

DMA से ब्रोकर्स को कुछ खास तरह के फायदे मिलते हैं। ऑर्डर्स पर उसका डायरेक्ट कंट्रोल होता है। ऑर्डर्स पूरे होने में भी समय बहुत कम लगता है। मैनुअल ऑर्डर एंट्री में होने वाले एरर का रिस्क घट जाता है। इससे ट्रेड की गोपनीयता भी बनी रहती है

MoneyControl Newsअपडेटेड May 11, 2023 पर 1:36 PM
SEBI ने FPI को एक्सचेंज ट्रेडेड कमोडिटी डेरिवेटिव में सीधे पार्टिसिपेट करने की इजाजत दी, जानिए इसका मतलब क्या है
डीएमए फैसिलिटी के तहत ब्रोकर के क्लाइंट को सीधे एक्सचेंज के ट्रेडिंग सिस्टम का इस्तेमाल करने की सुविधा मिल जाती है।

SEBI ने स्टॉक एक्सचेंजों को डायरेक्ट मार्केट एक्सेस (DMA) की सुविधा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) को देने की इजाजत दी है। इससे उनके लिए एक्सचेंज ट्रेडेड कमोडिटी डेरिवेटिव (ETCSs) में पार्टिसिपेट करने का रास्ता खुल गया है। यह प्रावधान तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है। मार्केट रेगुलेटर सेबी ने इस बारे में सर्कुलर जारी किया है। डीएमए फैसिलिटी के तहत ब्रोकर के क्लाइंट को सीधे एक्सचेंज के ट्रेडिंग सिस्टम का इस्तेमाल करने की सुविधा मिल जाती है। वह ब्रोकर के इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल ऑर्डर प्लेस करने के लिए कर सकता है। इसके लिए ब्रोकर की तरफ से किसी मैनुअल हस्तक्षेप की जरूरत नहीं होती है।

DMA के फायदे

DMA से ब्रोकर्स को कुछ खास तरह के फायदे मिलते हैं। ऑर्डर्स पर उसका डायरेक्ट कंट्रोल होता है। ऑर्डर्स पूरे होने में भी समय बहुत कम लगता है। मैनुअल ऑर्डर एंट्री में होने वाले एरर का रिस्क घट जाता है। इससे ट्रेड की गोपनीयता भी बनी रहती है। बड़े ऑर्डर्स पर इम्पैक्ट कॉस्ट भी कम आता है। साथ ही इससे हेजिंग और आर्बिट्रॉज स्ट्रेटेजी के इस्तेमाल में भी आसानी होती है।

SEBI ने क्यों लिया फैसला?

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