म्यूचुअल फंड बेचा तो सिर्फ 3 दिन में मिल जाएगा पैसा, सेबी ने बदला OFS लाने का नियम, जानिए क्या हैं नए बदलाव

सेबी ने ये भी कहा है कि एसेट्स मैनेजमेंट कंपनियों (AMC) की तरफ से रिडम्प्शन के बाद पैसों का भुगतान और डिविडेंड पेमेंट में लगने वाला वक्त कम किया जाएगा। अभी तक रिडम्पशन के बाद निवेशकों को पैसे मिलने में 10 दिन लगता है जिसे घटाकर 3 दिन कर दिया जाएगा। वहीं डिविडेंड पेमेंट में जहां अभी 15 दिन लगता है उसे घटाकर अब 7 दिन कर दिया जाएगा

अपडेटेड Sep 30, 2022 पर 11:01 PM
सेबी की चेयरपर्सन माधवी बुच की अगुवाई में आज सेबी की बोर्ड बैठक हुई जिसमें कई अहम फैसले लिए गए

मार्केट रेगुलेटर सेबी ने 30 सितंबर को एक खास प्रपोजल को पास कर दिया है जिसके तहत IPO लाने वाली कंपनियों को अब पहले से ज्यादा जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। सेबी की तरफ से जारी एक रिलीज के मुताबिक, "इश्यू जारी करने वाली कंपनी को पिछले ट्रांजैक्शन और इनवेस्टर्स से फंड जुटाने के आधार पर प्राइसिंग की डिटेल देनी होगी।"

छोटे निवेशकों को जल्दी मिलेगा पैसा

सेबी ने ये भी कहा है कि एसेट्स मैनेजमेंट कंपनियों (AMC) की तरफ से रिडम्प्शन के बाद पैसों का भुगतान और डिविडेंड पेमेंट में लगने वाला वक्त कम किया जाएगा। अभी तक रिडम्पशन के बाद निवेशकों को पैसे मिलने में 10 दिन लगता है जिसे घटाकर 3 दिन कर दिया जाएगा। वहीं डिविडेंड पेमेंट में जहां अभी 15 दिन लगता है उसे घटाकर अब 7 दिन कर दिया जाएगा।


सेबी चेयरपर्सन ने बताया क्यों बदले गए नियम

सेबी की चेयरपर्सन माधवी पुरी बुच ने कहा, "पुराने नियम जब बनाए गए थे तब चेक जारी किए जाते थे। आज पेमेंट सिस्टम्स काफी एडवांस और बेहतरीन हो चुके हैं।  लिहाजा अब निवेशकों को भी अपने पैसे के लिए इतने लंबे समय तक इंतजार करने की जरूरत नहीं है।"

ऑफर फॉर सेल (OFS) के नियमों में भी बदलाव

रेगुलेटर ने ऑफर फॉर सेल के तरीकों में बदलाव को भी मंजूर कर दिया है। सेबी की तरफ से जारी रिलीज में कहा गया है कि अभी तक ऑफर फॉर सेल में नॉन-प्रमोटर शेयरहोल्डर्स को कम से कम 10% हिस्सेदारी बेचना अनिवार्य था। लेकिन नए नियम में 10% स्टेक सेल की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है।

फिलहाल नॉन-प्रमोटर शेयरहोल्डर्स अगर कम से कम 10% या 25 करोड़ रुपए के शेयर बेचने की पेशकश करते तभी ऑफर फॉर सेल (OFS) लाने की मंजूरी थी।

दूसरे कई सुधारों के साथ सेबी ने ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म के लिए स्टॉक ब्रोकर के तौर पर रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य कर दिया है। इसके साथ ही लिस्टेड प्राइवेट प्लेस्ड डेट सिक्योरिटीज के फेस वैल्यू को घटाने की मंजूरी दे दी है।

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