बाजार नियामक सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) की आज 24 मार्च को बैठक होनी है। इसमें विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) को अतिरिक्त खुलासे से जुड़े नियमों पर ढील देने पर चर्चा होगी। इसके अलावा बैठक में रिसर्च एनालिस्ट्स (RAs) और निवेश सलाहकार (IAs) से एडवांस कलेक्शन पर चर्चा होगी। मनीकंट्रोल को सूत्रों के हवाले से यह जानकारी मिली है। सूत्रों ने बताया कि बैठक में कैटेगेरी 2 अल्टरनेटिव इंवेस्टमेंट फंड्स (AIFs) की तरफ से लिस्टेड डेट में निवेश से जुड़े नियमों और सोशल स्टॉक एक्सचेंजों (SSEs) पर लिस्टेड नॉन-प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन्स (NPOs) के लीगल स्ट्रक्चर्स पर भी चर्चा होगी।
SEBI के बोर्ड की बैठक में किन बातों पर चर्चा?
अभी 24 अगस्त 2023 के सर्कुलर के मुताबिक उन एफपीआई को अतिरिक्त खुलासा करना होता है, जिनका भारतीय सिक्योरिटीज में 25 हजार करोड़ रुपये से अधिक एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) है। सूत्रों के मुताबिक सेबी की बैठक में इस सीमा को दोगुना बढ़ाकर 50 हजार करोड़ रुपये करने पर चर्चा होगी। इसके अलावा बोर्ड की बैठक में रजिस्टर्ड इंवेस्टमेंट एडवाइजर्स को और राहत देने पर चर्चा हो सकती है और उन्हें तीन महीने से अधिक समय के लिए फीस एडवांस में लेने की अनुमति दी जा सकती है। अगर मंजूरी मिली तो वे एक साल की फीस ले सकेंगे। इससे पहले 8 जनवरी को जो गाइडलाइंस जारी हुई थी, उसके बाद कुछ इंवेस्टमेंट एडवाइजर्स ने ऐलान किया था कि सिर्फ तीन महीने तक की एडवांस फीस के नियम के चलते उनके बिजनेस पर निगेटिव असर पड़ा है। सूत्रों ने कहा कि इंवेस्टमेंट एडवाइजर्स के इस फीडबैक पर सेबी की बैठक में आज विचार किया जाएगा।
SSEs को लेकर क्या होगी चर्चा?
लॉन्च होने के बाद से सोशल स्टॉक एक्सचेंजेज (SSEs) को रेगुलेट करने वाले फ्रेमवर्क में कई अहम बदलाव हो चुके हैं। हाल ही में इसके तहत एप्लीकेशन का मिनिमम साइज 10 हजार रुपये से घटाकर 1 हजार रुपये किया जा चुका है। सूत्रों के मुताबिक बोर्ड की बैठक में एसएसई पर जीरो कूपन जीरो प्रिंसिपल (ZCZP) के जरिए पैसे जुटाने वाले नॉन-प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशंस (NPOs) की परिभाषा और मंजूर की गई एक्टिविटीज पर चर्चा होगी। इससे पहले 20 जनवरी के कंसल्टेशन पेपर में सेबी ने कंपनीज एक्ट, 1956 के सेक्शन 25 के तहत रजिस्टर्ड ट्रस्ट, चैरिटेबल सोसायटीज और लिमिटेड लायबिलिटी कंपनीज को एनपीओ के लीगल स्ट्रक्चर पर्मिटेड में रखने का प्रस्ताव रखा था।
AIFs के लिए क्या होगी चर्चा?
सूत्रों के मुताबिक लिस्टिंग ऑब्लिगेशंस एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट (LODR) रूल्स में बदलाव के चलते अनलिस्टेड सिक्योरिटीज में गिरावट से निपटने के लिए Category II AIFs (अल्टरनेटिव इंवेस्टमेंट फंड्स) को लिस्टेड सिक्योरिटीज में निवेश की मंजूरी दी सकती है। इस कैटेगरी के एआईएफ को अपने फंड का आधे से अधिक हिस्सा अनलिस्टेड सिक्योरिटीज में निवेश करना होता है लेकिन एलओडीआर में बदलाव के चलते स्थिति बदल गई है। ऐसे में 7 फरवरी 2025 को कंसल्टेशन पेपर में सेबी ने इन फंडों को अपने फंड का बड़ा हिस्सा लिस्टेड सिक्योरिटीज में निवेश का प्रस्ताव रखा था। हालांकि इन्हें क्रेडिट रेटिंग 'ए' या इसके नीचे के हायर रिस्क वाले लिस्टेड एसेट में निवेश की मंजूरी मिलेगी।