मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने सेटलमेंट एप्लिकेशन दाखिल करने की समयसीमा को 180 दिन से घटाकर 60 दिन कर दिया है। SEBI ने यह कदम सिस्टम को अधिक कुशल बनाने के इरादे से उठाया है। बता दें कि अभी 'कारण बताओ नोटिस' मिलने की तारीख से 60 दिन के भीतर सेटलमेंट या रिजॉल्यूशन एप्लिकेशन जमा करना होता है।
मौजूदा समय में 'कारण बताओ नोटिस' मिलने की तारीख से 60 दिन के भीतर निपटान या समाधान आवेदन जमा करना होता है। हालांकि आवेदक रिजॉल्यूशन फीस पर 25 फीसदी का अतिरिक्त भुगतान कर समयसीमा को अतिरिक्त 120 दिन बढ़वा सकते हैं। इस तरह सेटलमेंट एप्लिकेशन जमा करने की कुल समयसीमा 180 दिन हो जाती है।
अब सेबी ने एक अधिसूचना जारी कर 120 अतिरिक्त दिनों के प्रावधान को हटा दिया है। इस कदम का मकसद निपटान प्रक्रिया के नियमों को युक्तिसंगत बनाना है। इसके अलावा रेगुलेटर ने आंतरिक समिति (IC) की बैठक के बाद संशोधित निपटान शर्तों का फॉर्म जमा करने की समयसीमा को भी युक्तिसंगत कर 15 दिन कर दिया है। ये 15 दिन IC की बैठक के दिन से गिने जाएंगे। मौजूदा नियमों के तहत 10 दिन के ऊपर 20 अतिरिक्त दिनों की अनुमति है।
IPO से जुड़े नियम भी बदले गए
मार्केट रेगुलेटर SEBI ने इनीशियल पब्लिक ऑफर (IPO) और उसके साथ आने वाले ऑफर-फॉर-सेल (OFS) से जुड़े नियमों को कड़ा किया है। सोमवार 17 जनवरी को जारी एक नोटिफिकेशन के मुताबिक, अब भविष्य के ‘अज्ञात’ अधिग्रहणों के लिए IPO से एक सीमित राशि ही जुटाई जा सकेगी। साथ ही प्रमुख शेयरहोल्डरों की तरफ से बिक्री के लिए जाने वाले शेयरों की संख्या को भी सीमित कर दिया गया है।
SEBI ने एक अधिसूचना में कहा है कि एंकर निवेशकों की लॉक-इन अवधि 90 दिनों तक बढ़ा दी गई है और अब सामान्य कंपनी कामकाज के लिए रिजर्व किए गए फंड की निगरानी भी क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां करेंगी।